जिले की समितियाें का हाल बुरा

Maharajganj Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
महराजगंज। जिले में संचालित साधन सहकारी समितियों की हालत ठीक नहीं है। सभी 96 समितियां कोमा की स्थिति में हैं। इससे जुड़े करीब तीन लाख किसानों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। समितियों को जिंदा करने की कोशिश में जिले को केवल 40 लाख रुपये मिले हैं। इसमें से दो-दो लाख रुपये 20 समितियों में वितरित किया जाएगा। ऐसा होने पर केवल 3000 किसानों को ही एक-एक बोरी डीएपी उपलब्ध हो सकेगी। बाकी 2.97 लाख किसानों के हाथ कुछ नहीं आएगा। अगर उपेक्षा का हाल यही रहा तो फंड के अभाव में कई समितियों पर ताला लटक सकता है।
जिले के किसानों को कर्ज पर खाद और बीज उपलब्ध कराने के लिए साधन सहकारी समितियों का गठन किया गया है। जिले में उनकी संख्या 96 है। लेकिन फंड न होने के कारण उनका नियमित संचालन नहीं हो पा रहा है। लिहाजा समितियां डेड होने की कगार पर हैं। इन समितियों से करीब तीन लाख किसान जुड़े हुए हैं। एडवांस डिमांड ड्राफ्ट न देने के कारण इफ्को ने इन समितियों को खाद देने से इंकार कर दिया है। काफी हो हल्ला मचने के बाद शासन ने 20 समितियों को दो-दो लाख रुपये की संजीवनी दी है। लेकिन उससे एक समिति पर केवल 150 बोरी डीएपी खरीदी जा सकती है। इस तरह फंडिंग वाली सभी 20 समितियों को मिलाकर कुल 3000 बोरी खाद ही खरीदी जा सकती है। उसे अधिकतम 3000 किसानों में एक-एक बोरी डीएपी वितरित की जा सकती है। बाकी दो लाख 97 हजार किसान दुश्वारियां झेलेंगे। लाभान्वित होने वाले किसानों को भी केवल नकद खाद मिलेगी। उनको किसी भी तरह का ऋण नहीं दिया जाएगा। शासन से मिले धन सभी 12 ब्लाकों की एक, दो समितियों में बांटा जाएगा। उनका चयन हो गया है।
कैसे बनते हैं सदस्य
साधन सहकारी समिति का आजीवन सदस्य बनने के लिए किसानों को मामूली शुल्क देना पड़ता है। पुराने प्राविधानों के तहत कोई भी किसान अपने क्षेत्र की सोसाइटी पर 20 रुपये की रसीद कटवाकर उसकी सदस्यता हासिल कर सकता है। हालांकि अब बाइलाज में संशोधन करवह रकम 100 रुपये कर दी गई है। समिति उनको खाद और बीज कर्ज पर उपलब्ध कराती है। इसके अलावा उनको समिति के चुनाव में वोट देने का अधिकार होता है। नियमित लेनदेन न करने वाले किसानों को कम से कम 1000 रुपये का शेयर समिति में रखना होता है। धान, गेहूं खरीद में उनको प्राथमिकता मिलती है।
तीन फीसदी ब्याज पर कर्ज
साधन सहकारी समितियों से जुड़े किसानों को खाद और बीज ऋण पर दिया जाता है। उनसे तीन फीसदी वार्षिक की दर से साधारण ब्याज वसूला जाता है। एक एकड़ जोत वाले काश्तकारों को 10 हजार रुपये तक का कर्ज मिलता है। अधिकतम सीमा 10 एकड़ पर एक लाख रुपये है। इसके अलावा किसानों को किसान हित बीमा योजना का लाभ भी मिलता है। हर चार बोरी यूरिया की खरीद पर एक लाख रुपये का बीमा हो जाता है। किसी दुर्घटना में उनकी मौत पर घर वालों को लाभ दिया जाता है।
समितियों की हालत ठीक नहीं है। उसे सुधारने का प्रयास किया जा रहा है। शासन से 40 लाख रुपये मिले हैं। इससे 20 समितियों से जुड़े किसानों को कुछ राहत मिलेगी। आगे अभी प्रयास जारी है।
-एसपी मिश्रा, सहायक निबंधक सहकारिता

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