एक टीचर के भरोसे 106 विद्यार्थी

Maharajganj Updated Fri, 05 Oct 2012 12:00 PM IST
महराजगंज। जिले में राइट टू एजूकेशन (आरटीई) एक्ट की धज्जियां उड़ रही हैं। बिना शिक्षक बच्चों को पढ़ाने का दावा किया जा रहा है। यहां पहले से ही शिक्षकों का भारी टोटा था, इस पर अंतर जनपदीय ट्रांसफर से अनुपात और भी खराब हो गया है। 3725 शिक्षकों के पद पहले से ही खाली चल रहे थे। अब 418 शिक्षक अपने मूल जनपद चले गए हैं। इस तरह जिले में 4143 शिक्षकों के पद रिक्त हैं। 1270 प्राथमिक विद्यालयों और 610 जूनियर हाईस्कूलों में पढ़ाई किस तरह से होती होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। आरटीई के तहत 30 छात्र पर एक शिक्षक होने चाहिए, लेकिन जिले में हाल यह है कि 106 छात्रों पर एक टीचर है। आरटीई एक्ट को लेकर अमर उजाला ने सदर ब्लाक के कुछ विद्यालयों का जायजा लिया। प्रस्तुत है रिपोर्ट-
तीन क्लास, दो शिक्षक
पूर्व माध्यमिक विद्यालय धनेवा-धनेई में कक्षा छह से आठ तक की कक्षाएं चलती हैं। कुल 89 छात्र पंजीकृत हैं। उनको पढ़ाने के लिए दो ही टीचर शुचेता मिश्रा और बबीता वर्मा हैं। दो शिक्षिकाएं तीन कक्षाओं को एक साथ कैसे शिक्षण कार्य करती होंगी, यह अच्छी तरह से समझा जा सकता है। हर कक्षा में 14 विषय की पढ़ाई होती है। यहां शौचालय और बाथरूम की हालत अच्छी नहीं है।
एक टीचर के भरोसे 147 छात्र
प्राथमिक विद्यालय धनेवा-धनेई प्रथम में कक्षा एक से पांच तक कुल पांच कक्षाएं संचालित होती हैं। इनमें 147 बच्चे पंजीकृत हैं। उनको पढ़ाने के लिए केवल एक ही टीचर मीना त्रिपाठी तैनात हैं। उन पर पढ़ाई के साथ ही मिड-डे मील बनवाने, खिलाने और विभागीय लिखा-पढ़ी की भी जिम्मेदारी है। हालांकि उनको सहयोग करने के लिए दो शिक्षामित्र हैं। यहां एक और शिक्षिका थीं जो अंतर जनपदीय ट्रांसफर करवाकर चली गईं।
शिक्षामित्रों के भरोेसे पढ़ाई
प्राथमिक विद्यालय धनेवा-धनेई द्वितीय में कुल 173 बच्चे नामांकित हैं। यहां किसी भी शिक्षक की तैनाती नहीं है। बच्चों के पढ़ाने की जिम्मेदारी शिक्षामित्र मनोज त्रिपाठी और राजिदा खातून के कंधों पर है। अंतर जनपदीय ट्रांसफर से पहले वहां चार शिक्षिकाएं तैनात थीं, लेकिन ट्रांसफर कराकर अपने मूल जिले में लौट गईं। विद्यालय परिसर में बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय हैं, लेकिन बालकों का शौचालय खराब होने से बंद रहता है।
प्राथमिक विद्यालय मुंडेरा कला में 183 बच्चे पंजीकृत हैं। उनको पढ़ाने के लिए केवल दो ही टीचर हैं। नीतू सागर इंचार्ज और शालिनी मिश्रा सहायक टीचर हैं। उसके अलावा दो शिक्षामित्र सुमन देवी और पूनम सिंह हैं। विद्यालय में शौचालय की स्थिति ठीक है।
शिक्षकों के अभाव में जिले के 56 प्राथमिक और 89 जूनियर हाईस्कूल बंद चल रहे हैं। उनको खोलने के लिए ट्रांसफर और समायोजन किया गया है। लेकिन शिक्षक उसे मानने से इंकार कर रहे हैं। इस समय जिले में करीब 300 विद्यालय ऐसे हैं, जहां कोई शिक्षक तैनात नहीं है।
इसी में से 418 शिक्षकों का अंतर जनपदीय ट्रांसफर हो गया है। उसमें से करीब 413 शिक्षक रिलीव होकर अपने मूल जिले में लौट गए हैं। लेकिन विभाग ने अभी सूची अपडेट नहीं की है।
जिले में पहले से ही शिक्षकों की कमी चली आ रही है। ऊपर से अंतर जनपदीय ट्रांसफर के चलते शिक्षकों के और पद खाली हो गए। इसके बावजूद सभी विद्यालयों को खोलकर पठन-पाठन सुचारु रूप से चलाने का प्रयास हो रहा है। अधिकतर परिषदीय विद्यालयों में शौचालय बने हैं।
-आनंद प्रकाश शर्मा
बीएसए।

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