आरक्षण नहीं संरक्षण की जरूरत

Maharajganj Updated Mon, 24 Sep 2012 12:00 PM IST
महराजगंज। फ्यूचर ऑफ इंडिया ने आरक्षण पर लोक विमर्श कार्यक्रम का आयोजन रविवार को स्थानीय मैरेज हाउस में किया। इसमें सामाजिक न्याय पर बुद्धिजीवियों ने अपने विचार रखे।
हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता व प्रदेश के पूर्व महाधिवक्ता एसएम काजमी ने कहा कि आरक्षण की जगह संरक्षण की व्यवस्था करनी चाहिए। इसे मानवीय संवेदना के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्हाेंने कहा कि जो दलित सांसद या विधायक रह चुके हैं, उन्हें आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।
सवर्ण समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजयन त्रिपाठी ने दलितों और पिछड़ाें के आरक्षण पर सवाल उठाते हुए कहा कि इन्हें सरकार संरक्षण दे। नौकरी या शिक्षा में आरक्षण देकर इन्हें आगे करना और सवर्णों को पीछे ढकेलने की नीति खतरनाक एवं घातक है। उन्होंने कहा कि आजादी के 64 साल बाद भी सिर्फ 12 प्रतिशत दलितों को आरक्षण का लाभ मिला। इसका क्या औचित्य है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के अवकाश प्राप्त भूगोल विभागाध्यक्ष प्रो. शिवशंकर वर्मा ने कहा कि गरीबों की योजनाओं पर संपन्न लोग डाका डाल रहे हैं। पात्रों को लाभ एवं गरीबों के अधिकार को सुगम बनाने के लिए सरकार को कड़े नियम बनाने होंगे।
आरडीआईसी कालेज सिद्धार्थनगर के शिक्षक स्वरूपम द्विवेदी ने निजी क्षेत्र में आरक्षण की मांग को नाजायज बताया। उन्होंने कहा कि प्राइवेट सेक्टर में किसी भी कीमत पर आरक्षण नहीं होना चाहिए। फ्यूचर ऑफ इंडिया के संस्थापक मजहर आजाद ने आर्थिक रूप से संपन्न लोगाें को रसोई गैस में सब्सिडी देने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि आर्थिक संपन्नता का पैमाना तय किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में जवाहर लाल नेहरू पीजी कालेज के राजनीति शास्त्र विभागाध्यक्ष इनामुल्लाह सिद्दीकी, समाजसेवी केएन अग्रवाल और डॉक्टर शांतिशरण मिश्र ने जातिगत आधार की जगह गरीब लोगों को आरक्षण देने की वकालत की। कार्यक्रम के संरक्षक चंद्रशेखर मुन्ना, हरेन्द्र मिश्र, सुशील श्रीवास्तव, शमशुल हुदा खान, डॉ. सच्चिदानंद सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
संचालन शिक्षक आदित्य नाथ शुक्ल ने किया। संयोजक तबारक हुसैन ने सभी के प्रति आभार जताया। इस दौरान अमरनाथ पटेल, प्रवक्ता राजेश कुमार, आलोक चंद्र मिश्र, दुर्गेश मणि त्रिपाठी और प्रमोद श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे।

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