एएमए ने तैयार की थी घोटाले की जमीन

Maharajganj Updated Fri, 06 Jul 2012 12:00 PM IST
महराजगंज। पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि (बीआरजीएफ) के तहत करीब 1.38 करोड़ रुपये का गोलमाल पूरी तैयारी के साथ किया गया था। इस घोटाले की जमीन जिला पंचायत के तत्कालीन अपर मुख्य अधिकारी (एएमए) ने तैयार की थी। 13 ग्राम सचिवालयों के लिए जमीन नहीं मिलने पर उसके हिस्से का पैसा पचाने के लिए दो शासनादेश जारी किए गए। इस मामले को लेकर 30 जून का आरसी जारी हुई तो जिले में हड़कंप मच गया।
पंचायती राज विभाग के विशेष सचिव एमएम खान ने 13 अगस्त 2009 को एक शासनादेश जारी किया। इसमें 34 जिलों का नाम है। शासनादेश की प्रति पैक्सफेड सिद्धार्थनगर और ग्रामीण अभियंत्रण सेवा महराजगंज को भेजी गई। जबकि बाकी जिले का उसमें जिक्र नहीं है। ऐसा अनायास नहीं है। बल्कि कागज मजबूत करने के इरादे से किया गया है। शासनादेश में कहा गया है कि बीआरजीएफ के तहत ग्राम सचिवालय निर्माण की मानक लागत 14.72 लाख रुपये अनुमोदित की गई है। उसका आगणन तैयार कराकर और स्वीकृत प्राप्त कर निर्माण कार्य कराने को कहा गया।
इसके बाद तीन मई 2010 को अधिशासी अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण सेवा (आरईएस) अनूप कुमार गुप्ता ने अपर मुख्य अधिकारी/नोडल अधिकारी बीआरजीएफ से 66 की जगह 53 ग्राम सचिवालय का निर्माण कराने की स्वीकृति मांगी। इस पर अपर मुख्य अधिकारी/नोडल अधिकारी बीआरजीएफ ज्ञानेन्द्र कुमार सिंह ने चार जुलाई 2010 को एक्सईएन आरईएस को जवाबी पत्र लिखा। उसमें उन्होंने 66 की जगह 53 सचिवालय बनाने और उसकी रिवाइज प्रोजेक्ट कास्ट 13.22 लाख प्रति सचिवालय करने की स्वीकृति दे दी। पहले इसके निर्माण की दर 10.74 लाख तय थी।

हमने कोई घोटाला नहीं किया है। नए शासनादेश के तहत रेट बढ़ाया गया था। उसके अनुरूप कार्य कराने के लिए अपर मुख्य अधिकारी/नोडल अधिकारी (बीआरजीएफ) ज्ञानेन्द्र कुमार सिंह से स्वीकृति ली गई थी। उस समय वे प्रदेश के डिप्टी डायरेक्टर बीआरजीएफ भी थे। आरसी गलत तरीके से साजिशन जारी कराई गई है।
-अनूप कुमार गुप्ता
एक्सईएन, आरईएस
प्रोजेक्ट कास्ट रिवाइज करने के लिए प्रमुख सचिव से स्वीकृति ली जानी चाहिए थी। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। मिलीभगत कर लागत मनमानी तरीके से बढ़ा दिया गया। इस कारण 66 में से 13 का निर्माण नहीं कराया गया। उसका बाकी धन सचिवालय पर डायवर्ट करना गलत है। लिहाजा आरसी जारी कर उसकी रिकवरी कराने की प्रक्रिया चल रही है।
-अशोक कुमार मद्धेशिया
अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत

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