ग्यारह भव्य जिनालय बने नगर की शोभा

Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 10 Sep 2021 01:50 AM IST
श्री महावीर जिनालय
श्री महावीर जिनालय - फोटो : LALITPUR
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मड़ावरा। जिला मुख्यालय से 70 किमी दूर मड़ावरा कस्बा जैन धर्म-प्रभावना का केंद्र बना हुआ है। नगर में स्थित ग्यारह भव्य जिनालय धर्म प्रभावना के साथ नगर की शोभा भी बढ़ा रहे हैं। शुक्रवार से शुरू हो रहे दस लक्षण पर्व के प्रत्येक दिन नगर के सभी जैन मंदिरों में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे।
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श्रीमहावीर जिनालय-नगर के ग्यारह जैन मंदिरों में से नवीनतम एवं भव्य जिनालय महावीर जिनालय है, जो तहसील कार्यालय के पास में स्थित है। मंदिर की दिशा पूरबमुखी है, जिसमें मूलनायक भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा स्थापित है। पद्मासन में श्याम वर्ण की प्रतिमा काफी सुंदर एवं विशाल है। भगवान महावीर जिनालय की आधारशिला संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महाराज की परम शिष्या आर्यिका गुणमती माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में वर्ष 2014 में रखी गई थी। वर्ष 2017 में आर्यिका माता ऋजुमति माताजी ससंघ के सानिध्य में मंदिर निर्माण कार्य संपन्न हुआ। मंदिर निर्माण में सकल दिगंबर जैन समाज मड़ावरा एवं सभी समाजसेवी संस्थाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। चातुर्मास समिति के महामंत्री डॉ. राकेश सिंघई ने बताया कि वर्ष 2018 के फरवरी माह में गुरुवर विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनिराज समय सागर महाराज संघ एवं प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी विनय भैया के सानिध्य में नगर में 60 वर्ष बाद धर्म प्रभावना पूर्वक भव्य एवं पंचकल्याणक संपन्न हुआ।

पर्यूषण पर्व का आज से शुभारंभ
ललितपुर। पर्यूषण पर्व शुक्रवार से शुरू हो रहा है। दस दिवसीय इस पर्व पर भगवान महावीर स्वामी के मूल सिद्घांत जिओ और जीने दो की राह पर चलना सिखाता है और मोक्ष प्राप्ति के द्वार खोलता है। इन दिनों में दस संकल्प लिए जाएंगे।
आचार्य विद्यासागर की परम प्रभाविका शिष्या आदर्शमति माता ने बताया कि पहले दिन कोशिश की जाती है कि इंसान अपने अंदर क्रोध का भाव न पैदा होने दे, अगर ऐसा भाव मन में आए भी तो उसे विनम्रता से शांत कर दे। दूसरे दिन अपने व्यवहार में मिठास और शुद्धता लाने का प्रयास किया जाता है, मन में किसी के लिए घृणा नहीं रख सकने का संकल्प लिया जाता। तीसरा दिन जो सोच लेते हैं उस पर अमल करके उसे सफल अंजाम देना आवश्यक है, यानी आपने जो कहा है उसे पूर्ण करना जरूरी है। चौथे दिन कोशिश की जाती है कि आप कम बोलें, लेकिन अच्छा बोलें, सच बोलें। पांचवे दिन मन में किसी भी तरह का लालच नहीं रख सकते, किसी तरह का स्वार्थ आपके मन में नहीं होना चाहिए। छठे दिन मन पर काबू रखते हुए संयम से काम लेना जरूरी होता है। सातवें दिन मलीन वृत्तियों को दूर करने के लिए जो बल चाहिए, उसके लिए तपस्या करना। आठवें दिन पात्र को ज्ञान, अभय, आहार, औषधि आदि सद्वस्तु देना, नौवे दिन किसी भी वस्तु आदि के लिए मन में स्वार्थ न रखना और दसवें दिन सद्गुणों का अभ्यास करना और अपने को पवित्र रखने का संकल्प लिया जाता है।
श्री क्षेत्रपाल मंदिर में होगा विशेष आयोजन
श्री क्षेत्रपाल मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष मोदी पंकज जैन ने बताया कि शुक्रवार सुबह 5.30 बजे ध्यान होगा, 6.30 बजे अभिषेक शांति धारा, 7.30 बजे पूजन और 9 बजे से प्रवचन होंगे। शहर के अन्य मंदिरों में भी विशेष पूजन अर्चन का कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
महावीर स्वामी की मूलनायक मूऱ्ति
महावीर स्वामी की मूलनायक मूऱ्ति- फोटो : LALITPUR

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