पानी में गए पानी के लिए खर्च लाखों रुपये

अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 06 Jun 2017 12:51 AM IST
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ललितपुर। पुलिस लाइन में शासन द्वारा पानी की टंकी पर लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी कर्मचारियों व उनके परिवारों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। प्राइवेट फंड से बनाया गया गैस गोदाम भी शोपीस बनकर रह गया है और इसका उपयोग वर्तमान में आवास के रुप में हो रहा है। लाखों रुपये की लागत से बनी पानी की टंकी सफेद हाथी साबित हो रही है, जबकि यहां की जर्जर हो चुकीं सड़कें बन नहीं पा रही हैं और आए दिन यहां पुलिस कर्मचारियों के परिवारों को परेशान होना पड़ता है।      
पुलिस लाइन में स्थित कालोनियों में लगभग दो सौ परिवार निवास करते हैं, जबकि अलग से शहर में मिलाकर लगभग एक हजार परिवार रहते हैं। इन परिवारों को घरेलू गैस सुविधा के लिए पुलिस लाइन परिसर में दो वर्ष पूर्व तत्कालीन पुलिस अधीक्षक की पहल पर प्राइवेट फंड से गैस गोदाम का निर्माण कराया गया था और गैस का लाइसेंस लेने के लिए प्रपत्र भी तैयार कर लिए गए थे। लेकिन, पुलिस अधीक्षक के स्थानांतरण के बाद गैस लाइसेंस का काम धनाभाव के कारण ठंडे बस्ते में चला गया। हालांकि, इस दौरान पुलिस लाइन का एटीएम व कैंटीन का संचालन तो शुरू कर दिया गया, लेकिन अन्य बहुत से जरूरी काम अब भी अधूरे पड़े हुए हैं।

वहीं, दो वर्ष पूर्व पुलिस लाइन परिसर में निवास कर रहे कॉलोनी के परिवारों को पेयजल की समस्या निस्तारण के लिए 39 लाख रुपये की लागत से पानी की टंकी का निर्माण जल निगम द्वारा करवाया गया और जल संस्थान से टंकी के लिए पाइप लाइन भी जोड़ दी गई। यहां तक कि पुलिस विभाग द्वारा पानी के कनेक्शन की प्रक्रिया तक कर दी गई, लेकिन इस टंकी से अब तक पेयजल सप्लाई शुरूनहीं हो सकी है, जबकि यह टंकी दो वर्ष पूर्व पुलिस विभाग को हैंडओवर करना भी बताया जाता है। वहीं, पुलिस लाइन में कॉलोनी के लिए वर्षों पूर्व बनाई गई सड़कों की स्थिति काफी जर्जर हो चुकी हैं।

विभाग द्वारा सड़कों की मरम्मत और कालोनी से जोड़ने के लिए नई सड़कों के बनाने का प्रस्ताव पुलिस मुख्यालय भी भेजा गया, लेकिन मुख्यालय में इसके लिए कोई दिलचस्पी नहीं लेने के चलते उक्त प्रस्ताव मुख्यालय में अटका हुआ है। सड़कें जर्जर और संकरी होने के चलते यहां आए दिन कई बार पुलिस कर्मी भी गिरते रहते हैं।       

इनका कहना है-      
गैस गोदाम खाली है और इसके लाइसेंस का कार्य धनाभाव के कारण अटका हुआ है। पानी की टंकी से कनेक्शन की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है, अब जलसंस्थान से कार्य होना शेष रह गया है। वहीं, सड़कों के लिए प्रस्ताव मुख्यालय में भेजे जा चुके हैं।      
अतुल कुमार सिंह, आरआई।

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