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नौ सौ साल पुराना है नवागढ़ का इतिहास

Jhansi Bureauझांसी ब्यूरो Updated Sun, 21 Jul 2019 07:24 PM IST
नवागढ़ में लगा शिलालेख
नवागढ़ में लगा शिलालेख - फोटो : LALITPUR
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नौ सौ साल पुराना है नवागढ़ का इतिहास
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ललितपुर। ब्लॉक महरौनी में स्थित जैनधर्म का तीर्थ क्षेत्र नवागढ़ (नंदपुर) जिले का ही नहीं, विश्व का एकमात्र प्राचीन क्षेत्र है, जहां नौ सौ वर्ष पूर्व भगवान महावीर, तीर्थंकर चक्रवर्ती और भगवान अरनाथ स्वामी के साथ चौबीस जैनाचार्य और मुनियों की प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। अब तक यहां पर खुदाई के दौरान 114 प्रतिमाएं मिल चुकी हैं।
नवागढ़ (नंदपुर) की स्थापना बारहवीं शताब्दी में जैन धर्मावलंबी चंदेल शासक मदन वर्मन द्वारा की गई थी। यहां पर खुदाई के दौरान अनेक अति प्राचीन ऐतिहासिक तथ्य व साक्ष्य निरंतर मिलते रहते हैं। इन पर लगातार खोज हो रही है। आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के शिष्य और एकांतप्रिय मुनिश्री सरल सागर महाराज का चातुर्मास नवागढ़ में चल रहा है। यहां पर जो भी खनन होता है, भले ही मकान की नींव खोदी जा रही हो, उसमें खुदाई के दौरान सावधानी बरती जाती है। क्योंकि, खुदाई के दौरान अक्सर प्रतिमाएं निकल आती हैं। हाल ही में रूपसिंह गुर्जर के यहां खुदाई के दौरान पार्श्वनाथ भगवान की खंडित प्रतिमा प्राप्त हुई थी।
इतिहासकार तथा पुरातत्ववेत्ता बता चुके हैं कि नवागढ़ (नंदपुर) गुप्तकालीन नगर है, जिसका विकास प्रतिहार काल एवं चंदेलकाल में हुआ था। महोबा से लेकर देवगढ़ तक पूरा बुंदेलखंड ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है।
नवागढ़ क्षेत्र कमेटी के प्रचार मंत्री डॉ सुनील संचय ने बताया कि नवागढ़ में होने वाली खोज यहां की समृद्ध संस्कृति, इतिहास, राजनीतिक संबद्धता और ग्रामीणों की खुशहाली को दर्शाता है। नवागढ़ में 1959 से अब तक 114 प्राचीन प्रतिमाएं खुदाई में मिल चुकी हैं, जिन पर पीएचडी हो रही है। फाइटोन पहाड़ी के निकट जैन पहाड़ी पर स्थित संघ साधना स्थल, गुफाओं में उकेरी गई आकृति और चरण चिह्न यहां जैन विरासत का साक्षात्कार कराते हैं। रॉक पेंटिंग, कपमार्ग, हैंगिंग रॉक, बैलेंस रॉक, मैटेलिक साउंड रॉक इसके विशेष पर्यटन स्थल होने का साक्ष्य हैं।
रॉक आर्ट सोसायटी ऑफ इंडिया आगरा के जनरल सेक्रेटरी डॉ. गिरिराज कुमार ने इस क्षेत्र के 10 किलोमीटर में स्थित विभिन्न पहाड़ियों का अध्ययन करने के बाद दो से पांच लाख वर्ष पुराने प्री मिडिल और पोस्ट मेचुलियन काल के पत्थर के औजार खोज निकाले थे, जो आज भी नवागढ़ के संग्रहालय में संग्रहित हैं। इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के लिए पर्यटन, सांस्कृतिक धरोहर, ऐतिहासिक धरोहर और बुंदेलखंड की सभ्यता के विकास में रुचि रखने वाले सभी विद्यार्थियों के लिए नवागढ़ विलक्षण तीर्थ, कला तीर्थ और धर्म तीर्थ है, जहां खोज करने के लिए विशेष सामग्री उपलब्ध है। नवागढ़ इतिहासकारों के आकर्षण का केंद्र है।
नवागढ़ में जो भी खनन कार्य होता है, उसमें सावधानी बरती जाती है। पिछले दिनों भगवान पार्श्वनाथ की खंडित प्रतिमा प्राप्त हुई थी।
- डॉ. एसके दुबे, पुरातत्व अधिकारी
नवागढ़ में रखीं प्राचीन प्रतिमाएं।
नवागढ़ में रखीं प्राचीन प्रतिमाएं।- फोटो : LALITPUR
नवागढ़ में खुदाई के दौरान मिलीं प्राचीन प्रतिमा।
नवागढ़ में खुदाई के दौरान मिलीं प्राचीन प्रतिमा।- फोटो : LALITPUR
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