जमीनों की नाप कराने के लिए किसान परेशान

Jhansi Bureauझांसी ब्यूरो Updated Thu, 29 Oct 2020 12:57 AM IST
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तालबेहट। तहसील में इस समय जमीनों की नाप न होने से किसान काफी परेशान हैं। लगभग एक हजार वाद सिर्फ हदबंदी के ही विचाराधीन हैं। वहीं राजस्व निरीक्षक काम की अधिकता का हवाला देकर किसानों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं। जिससे आए दिन अधिकारियों के सामने शिकायतें भी आ रही हैं। जिसके चलते अधिकारी भी परेशान हैं। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता में हदबंदी फीस जमा होने के 45 दिन में कास्तकार की भूमि की पैमाइश का नियम हैं। लेकिन तहसील में तो वर्षों पुुरानी हदबंदी की फाइलें नाप का इंतजार कर रही हैं।
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तहसील क्षेत्र में चकबंदी की प्रक्रिया न होने से गरीब किसानों की जमीनों पर दबंग और सामंत शाही लोगों का कब्जा है। इस कब्जे को हटाने के लिए क्षेत्र के किसान के पास दो ही विकल्प है। एक तो वह अपनी जमीन को औने पौने दामों में दबंग को विक्रय कर दें और दूसरा वह अपनी जमीन का न्यायालय में बंटवारा या हदबंदी कराके कब्जा लें। अधिकांश किसानों के पास जीवकोपार्जन को एक मात्र साधन उसकी जमीन है। जिसके चलते क्षेत्र का किसान दूसरे विकल्प को अधिक महत्व देता है। लेकिन तहसील में व्याप्त भ्रष्टाचार के चलते कई किसान हदबंदी दायर करने के पांच-पांच वर्ष में अपनी जमीन पर नहीं पहुंच पाए। तहसील में इस समय हदबंदी के लगभग एक हजार और बंटवारे एवं इजरा के सैकड़ों वाद विचाराधीन हैं। लेकिन राजस्व कर्मचारी काम की अधिकता का हवाला देकर गरीबों की जमीन की पैमाइश न करके अमीरों और दबंगों की जमीनों की पैमाइश पर अधिक ध्यान देते है। किसानों यदि अपनी जमीन की पैमाइश के लिए अधिक दबाव बनाता है या शिकायत करता है तो राजस्व कर्मचारी गलत रिपोर्ट लगाने की धमकी देने से भी नहीं हिचकिचाते हैं।
चार राजस्व निरीक्षक के हवाले है छह क्षेत्र
तहसील में लगभग 168 राजस्व गांव तथा तालबेहट, बानपुर और बांसी मिलाकर कुल तीन परगना हैं। तीन परगना में छह राजस्व क्षेत्र हैं। जिसमें तालबेहट परगना में तालबेहट और पूराकलां तथा बानपुर परगना में बार और बांसी परगना में जखौरा और हर्षपुर और बांसी राजस्व क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों के लिए मात्र चार राजस्व निरीक्षक कार्यरत हैं। इसमें एक राजस्व निरीक्षक को वीआईपी की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है। काम की अधिकता के चलते हर बार संपूर्ण समाधान दिवस और प्रशासनिक अधिकारियों के निरीक्षण के समय राजस्व के शिकायत पत्रों की भरमार रहती है। जिसमें सबसे अधिक शिकायत पत्र जमीन पर कब्जा और पैमाइश के होते हैं।
राजस्व निरीक्षकों को पुरानी फाइलों के निस्तारण का लक्ष्य दिया गया हैं। जिससे हदबंदी वादों को शीघ्र निस्तारित किया जा सकें।
अनिल कुमार, उपजिलाधिकारी तालबेहट।
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