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पांच हत्यारों को आजीवन कारावास की सजा

Jhansi Bureau Updated Sun, 02 Dec 2018 02:23 AM IST
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पांच हत्यारों को आजीवन कारावास की सजा
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न्यायालय ने 35-35 हजार रुपए अर्थदंड भी लगाया
जमीन के विवाद को लेकर दो वर्ष पहले हुआ था खूनी संघर्ष
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। दो वर्ष पूर्व जमीन के विवाद में ग्राम बरौदिया राइन में हुए खूनी संघर्ष के दौरान एक व्यक्ति को जान से मार देने और तीन लोगों को घायल करने के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र अधिनियम) मनोज कुमार शुक्ला की अदालत ने पांच हत्यारों को आजीवन कारावास और प्रत्येक पर 35-35 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। उक्त मामले में सात आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, जिसमें में एक अभियुक्त का नाम पुलिस ने विवेचना से हटा दिया था, जबकि एक अभियुक्त के किशोर होने के चलते उसका मामला किशोर न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया था।
सहायक शासकीय अधिवक्ता लखनलाल यादव ने बताया कि थाना पाली अंतर्गत ग्राम बरौदिया राईन निवासी नेपाल सिंह पुत्र शिवराज सिंह ने दो वर्ष पूर्व पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि उसका भाई हजरत सिंह ट्रैक्टर से अपने खेत की बुवाई कर रहा था और वह भी पास के ही खेत में ट्रैक्टर से बुवाई कर रहा था। 11 अक्टूबर 2016 को सुबह दस बजे गांव के ही सभी हमलावर ट्रैक्टर व मार्शल से खेत पर आए, जिनके पास तमंचे, कुल्हाड़ी, फरसा, लाठी थे। वह सभी उसके भाई हजरत को खेत बोने से मना करने लगे। साथ ही गाली गलौज करने लगे। शोर सुनकर वह भी ट्रैक्टर लेकर मौके पर ही पहुंच गया। सभी हमलावरों ने एकराय होकर गालीगलौज करते हुए हमला बोल दिया। उनमें से पुष्पेंद्र ने देशी रायफल से उसके भाई को गोली मार दी और सभी ने हजरत पर लाठी डंडों व कुल्हाड़ी से हमला कर दिया एवं उसका भी पीछा किया। रास्ते में उसे उसके भाई भोले उर्फ नरेंद्र सिंह व निहाल सिंह मिले, जिन्हें उसने बताया कि इन लोगों ने हजरत को गोली मार दी। तभी पीछे से मार्शल से आए पुष्पेंद्र, शंकर व अजेंद्र ने देशी रायफल से भोले व निहाल को गोली मार दी और अन्य लोगों ने लाठी व कुल्हाड़ी से हमला बोल दिया। जिससे भोले व अन्य गंभीर रुप से घायल हो गए। निहाल को जंडैल सिंह ने गोली मारी। रोड पर सभी हमलावरों ने मानवेंद्र सिंह घेर लिया। उसको कृपाल ने कुल्हाड़ी मारकर गंभीर रुप से घायल कर दिया। बाद में सभी गोलियां चलाते हुए मौके से भाग गए। गंभीर रूप से घायल भोले राजा की जिला अस्पताल में मौत हो गई। इसमें निहाल व हजरत व मानवेंद्र सिंह का इलाज चल रहा है। नेपाल की तहरीर पर पुलिस ने उस समय अभियुक्त पुष्पेंद्र सिंह, शंकर सिंह, जण्डैल सिंह, कृृपाल सिंह पुत्रगण प्यारे राजा, अजेंद्र सिंह पुत्र कृपाल सिंह, अवतार सिंह पुत्र कल्याण सिंह, शानू राजा पुत्र पुष्पेंद्र सिंह व अन्य अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इस घटना के बाद पुलिस ने अलग-अलग जगहों पर दबिश देकर हमलावरों को गिरफ्तार किया था और घटना में प्रयुक्त कट्टा, बंदूक, अद्दी, फरसी व अन्य हथियार बरामद कर लिए थे। घटना के बाद कृपाल को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी, जबकि अन्य सभी अभियुक्त जिला कारागार में निरुद्ध चल रहे थे। विवेचना के दौरान पुलिस ने अवतार का नाम हटाते हुए छह नामजद के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए थे। इसमें आरोपी शानूराजा के किशोर होने पर न्यायालय ने उसका मामला किशोर न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया था। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन था। शनिवार को न्यायाधीश ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर सुनवाई करते हुए अभियुक्त पुष्पेंद्र सिंह, शंकर सिंह, जंडैल सिंह, कृपाल सिंह व अजेंद्र को एक राय होकर भोले राजा की हत्या करने एवं अन्य लोगों को जान से मारने के प्रयास में दोषी पाते हुए सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय में विभिन्न धाराओं के अंतर्गत प्रत्येक पर अलग-अलग कुुल 35-35 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर अलग-अलग धाराओं के हिसाब से अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया है।

यह था जमीन के विवाद का कारण
ग्राम बरौदिया राइन में हजरत सिंह पुत्र शिवराज सिंह ने वर्ष 1985 में गांव के चित्तर सिंह की पत्नी से 71 डिसमिल जमीन खरीद कर रजिस्ट्री करा ली थी। इसी जमीन को रजिस्ट्री कुछ वर्ष पूर्व चित्तर सिंह के बेटे ने दूसरे पक्ष को कर दी थी। तब से ही दोनों पक्षों में विवाद चल रहा था। यहां तक घटना से एक वर्ष पूर्व हुए पंचायत चुनाव में यह रंजिश और भी गहरा गई थी। तब से दोनों पक्षों के बीच विवाद लगातार बढ़ता चला गया।

पुष्पेंद्र को पूर्व में भी मिल चुकी आजीवन कारावास की सजा
बरौदिया राईन के हत्या प्रकरण में शामिल अभियुक्त पुष्पेंद्र सिंह को पूर्व में सरदारपुरा निवासी अशोक गोस्वामी की हत्या के आरोप में दोषी पाए जाने पर न्यायालय द्वारा आजीवन कारावास की सजा मिल चुकी है। हालांकि इस प्रकरण में वह हाईकोर्ट से जमानत पर था। लेकिन बरौदिया राइन के खूनी संघर्ष की घटना के बाद से वह जेल में निरुद्घ चल रहा है।

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