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खुले आसमान में जिंदगी बसर करता है चंदेल सहरिया

lalitpur Updated Sun, 09 Dec 2018 01:08 AM IST
shariya community lalitpur
shariya community lalitpur - फोटो : demo
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सरकार भले ही गरीबों को आशियाना देने के दावे करती रहे पर महरौनी तहसील के मजरा दिगवार गांव का निवासी चंदेल आदिवासी आज भी खुले आसमान के नीचे जिंदगी गुजारने को मजबूर है। उसे एक छोटी सा जमीन का टुकड़ा सरकार ने शौचालय बनाने के लिए दिया था। इसी शौचालय के अंदर वह अपना जरूरी सामान रखे रहता है, जबकि बनाने व खाने का काम इसके पास बाहर पड़ी जमीन पर करता है। बारिश व सर्दी के दिनों में जब मौसम अपने चरम पर होता है तो चंदेल को इसी शौचालय के अंदर घुसकर किसी तरह अपना बसेरा करना पड़ता है।  
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 शौचालय में आटा रखने के लिए एक डिब्बा, सब्जी बनाने के लिए एक डेकची और चम्मच, मसाले रखने के लिए एक डलिया में छोटे-छोटे प्लास्टिक के डब्बे, आटा गूंथने के लिए एक परात और खाना खाने के लिए एक थाली और इसके बाहर खुले आसमान में खाना बनाने के लिए ईटों से बना चूल्हा है। ज्यादा ठंड या हवा चलने पर शौचालय में ही ऊकड़ू होकर सो जाता है। जंगल से लकड़ी एकत्रित करके जीवन यापन करता है। उसके पास न तो सर छिपाने के लिए छत है और न ही मनरेगा में काम करने के लिए गारंटी वाला जॉबकार्ड। भले ही सरकारें अंतिम आदमी तक योजनाएं और विकास पहुंचाने का दावा करती हों लेकिन दिगवार का चंदेल सहरिया सरकार के दावों की पोल खोलने के लिए काफी हैं। मजेदार बात तो यह हैं कि वर्ष 2013-14 दिगवार गांव लोहिया समग्र विकास गांव रह चुका है, उस समय तो चंदेल सहरिया सड़क किनारे अपना जीवन यापन कर रहा था, बावजूद इसके किसी का भी ध्यान इस ओर नहीं गया। दिगवार गांव का चंदेल सहरिया बताता है कि शौचालय बनने से पहले वह सड़क किनारे रहता था, उसके माता पिता की जिंदगी भी सड़क किनारे ही निकल गई। बरसात होने पर सड़क किनारे ही छोटी सी बरसाती डालकर रहते थे । कुछ वर्ष पूर्व तत्कालीन एसडीएम के मौखिक आदेश पर उसे ग्राम सभा की जमीन पर छोटा सा टुकड़ा रहने के लिए दिया गया था। आर्थिक स्थिति खराब होने के चलते उस पर झोपड़ी तक बनाने में सक्षम नहीं था। हाल ही में शौचालय का निर्माण हुआ तो ठंड के चलते उसी को आवास के रूप में उपयोग कर रहा हैं। आगे उसने बताया कि पात्र गृहस्थी के तहत ढ़ाई किलो चावल और ढ़ाई किलो गेहुं मिलता हैं। इसके अलावा वह जंगल से लकड़ी एकत्रित कर बेचकर उदरपूर्ति करता हैं। कई बार जॉबकार्ड बनाने के लिए भी जनप्रतिनिधि को कहा लेकिन उसका जॉबकार्ड नहीं बनाया जा रहा हैं। उसने आवास एवं जॉबकार्ड के लिए उच्चाधिकारी का ध्यान आकृष्ट कराया है।

 इस संबंध में ग्राम प्रधान मुकेश निरंजन का कहना हैं कि चंदेल सहरिया का नाम 2011 की सूची में नहीं होने के कारण उसे आवास नहीं मिल सका है। उसका नाम आवास आवंटन के लिए लिख लिया गया हैं। जहां तक जॉबकार्ड बनाने की बात हैं तो तत्कालीन सीडीओ(प्रवीण लक्षकार) ने जॉबकार्ड निर्गत करने पर रोक लगा दी थी तभी से जॉबकार्ड नहीं बनाए गए हैं। इस वजह से उसे जॉबकार्ड जारी नहीं किया जा रहा है।  

मामला संज्ञान में नहीं हैं
खंड विकास अधिकारी महरौनी डा. अजय शर्मा का कहना हैं कि शौचालय में निवास कर रहा हैं ऐसा मामला मेरे संज्ञान में नहीं हैं। क्रमानुसार आवास का आवंटन हो रहा हैं। क्रम आते ही उसका आवास बन जाएगा। सोमवार को जांच कर जॉबकार्ड बनवाया जाएगा।

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