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बिना लाइसेंस के शहर में बेचा जा रहा मांस

Jhansi Bureauझांसी ब्यूरो Updated Sun, 21 Jul 2019 12:39 AM IST
सड़क किनारे खुले मे संचालित हो रही मीट की दुकानें
सड़क किनारे खुले मे संचालित हो रही मीट की दुकानें - फोटो : LALITPUR
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बिना लाइसेंस के शहर में बेचा जा रहा मांस
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ललितपुर। शहर में बगैर लाइसेंस के धड़ल्ले से मटन और चिकन की दुकानें संचालित हो रही हैं। ऐसे दुकानदार न तो खाद्य सुरक्षा अधिनियम का पालन कर रहे हैं और न ही अतिक्रमण का। दुकान के आसपास साफ-सफाई का ध्यान भी नहीं रख रहे हैं। इससे मांस खाने के शौकीन लोगों की सेहत बिगड़ने का अंदेशा हर समय बना रहता है। वहीं, राहगीर भी दुर्गंध से परेशान रहते हैं।
प्रदेश में योगी सरकार के सत्तारूढ़ होने के बाद अवैध बूचड़खानों पर ताले लगवा दिए गए थे। मांस के दुकानदारों ने लाइसेंस सहित जरूरी कागजात जुटाने आरंभ कर दिए थे, साथ ही उन्होंने स्लाटर हाउस खुलवाने की मांग भी तेज कर दी थी। नगर पालिका ने हरकत में आकर जमीन तलाशने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी, लेकिन सरकार का इस ओर से ध्यान हटते ही अधिकारियों ने फाइलों को ठंडे बस्ते में रख दिया था। तब से लेकर अब तक शहर में मांस बाजार नियमों को खूंटी पर टांग कर संचालित हो रहा है। अधिकतर दुकानें सड़क किनारे पानी की बड़ी टंकी के आसपास संचालित हो रही हैं, जो अतिक्रमण के दायरे में भी हैं। विडंबना यह है कि नगर पालिका समय-समय पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाती है, लेकिन मांस कारोबारियों को कभी छेड़ा ही नहीं जाता है और न ही चिकन और मटन के दुकानदारों पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के नियमों का पालन कराने का दबाव बनाया जाता है।
जनवरी में नगर पालिका के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी मधुसूदन जायसवाल ने मांस बाजार का निरीक्षण कर हकीकत जानने का प्रयास किया था। उस दौरान उन्होंने पानी की बड़ी के पास व सदनशाह दरगाह के आसपास की मटन की दुकानों का निरीक्षण किया था। कई दुकानों के लाइसेंस की तिथि कालातीत पाई गई तो किसी भी दुकानदार के पास नगर पालिका परिषद का अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं पाया गया था। जब दुकानदारों से यह पूछा गया था कि दुकानों पर बेचा जा रहा मटन या चिकन कहां से लाया जा रहा है तो उनके पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था? इस पर उन्होंने दुकानदारों को चेेतावनी दी कि जब तक मानक पूरे नहीं हो जाते, तब तक मीट की बिक्री बंद कर दें, वरना रिपोर्ट दर्ज करा दी जाएगी। लेकिन, उनका चार्ज हटते ही मीट बाजार का मामला फिर ठंडे बस्ते में चला गया।
स्लाटर हाउस को नहीं मिली भूमि
शहर में स्लाटर हाउस की स्थापना के लिए आज तक भूमि की तलाश पूरी नहीं हो सकी है, जबकि शहर में दो दर्जन दुकानें संचालित हो रही हैं। स्थानीय नागरिक कई बार नगर पालिका से मीट बाजार अन्य जगह स्थापित करने की मांग उठा चुके हैं। इस पर पालिका के अधिकारी आश्वासन देकर मामले को ठंडा कर देते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी कई जगहों पर मछली व मुर्गा की दुकानें चल रही हैं।
क्या है मानक
मीट चिकन दुकान पर केवल अधिकृत स्लाटर हाउस से लाए गए चेक मीट ब्रिकी के लिए उपलब्ध होना चाहिए। मीट चिकन शॉप के अंदर किसी पशु या पक्षी को मारना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। भैंस एवं सूअर का मीट बेचने पर किसी धर्म या संप्रदाय द्वारा शांति व्यवस्था की दृष्टि से पुलिस प्रशासन अथवा स्थानीय निकाय से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य है। मीट और चिकन शॉप में साफ पानी होना चाहिए एवं मांस को सुरक्षित रखने के लिए फ्रिज आदि होनी चाहिए। मीट चिकन शॉप किसी भी धार्मिक स्थल की बाउंड्रीवाल से 50 मीटर दूर और मंदिर के प्रवेश द्वार से 100 मीटर की दूरी पर ही होनी चाहिए। मीट शॉप का लाइसेंस मीट कारोबार से जुड़े सभी तकनीकी एवं प्रशासनिक निर्देशों पर दिया जाता है। मीट और चिकन शॉप के अंदर पशु- पक्षी के अवशेष जैसे हड्डी, खाल, सिर और आंत नहीं रखा होना चाहिए। मीट शॉप पर किसी जीवित पशु को रखने पर भी प्रतिबंध है। नियमानुसार, दुकान में मांस काटना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। इसके बाद भी शहर की कई दुकानों पर मछली, मुर्गा व बकरे का मांस काटा जाता है।
अफसर नहीं ले रहे रुचि
शहर में चल रहा मांस का कारोबार पूरी तरह से अवैध है, लेकिन अधिकारी इन्हें हटाने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं। न तो अफसर कोई संतोषजनक जवाब देते हैं और न ही किसी तरह की कार्रवाई करते हैं, जिससे मांस का अवैध कारोबार खुले आम चल रहा है।
किसी भी दुकानदार को विभाग ने लाइसेंस जारी नहीं किया है। इसकी वजह वे विभागीय मानक पूरे नहीं करते हैं। जिले में स्लाटर हाउस भी नहीं है।
- कमल निवास त्रिपाठी
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी
शहर में कई दुकानदार बगैर पर्दा लगाए मांस की बिक्री कर रहे हैं, ऐसे दुकानदारों के लाइसेंस जब्त किए जाएंगे। अनापत्ति प्रमाण पत्र संबंधी फाइल भी खंगाली जा रही है।
- डॉ. संजय कुमार मिश्र, अधिशासी अधिकारी
नगर पालिका परिषद
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