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जवानी से आया बुढ़ापा, पर नहीं मिला भूमि पर कब्जा

Lalitpur Updated Mon, 01 Dec 2014 05:31 AM IST
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ललितपुर। जमीन को व्यवस्थित करने वाली चकबंदी ने ग्रामीणों का जीवन अव्यवस्थित करदिया है। सौंजना व नाराहट में गरीबों की जवानी गुजर गई पर चकबंदी की समस्या सुलझ नहीं सकी। दो दशक गुजर जाने के बावजूद लोग अपनी मूल जोत तक नहीं पहुंच सके हैं।
खेती की भूमि को व्यवस्थित करने के लिए चकबंदी प्रक्रिया को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है, इसके तहत किसानों की बिखरी जोत संकलित करते चक आवंटित किए जाते हैं, साथ ही खेतों तक पहुंचने के चक मार्ग के साथ सिंचाई के पानी का रास्ता भी बनाया जाता है। इसके अलावा गांव में पंचायत घर, सामुदायिक भवन, खेल मैदान, स्कूल, सामान्य व हरिजन आबादी, खाद के गड्ढे आदि के लिए भी जमीन आरक्षित की जाती है। 30 अगस्त 1989 में महरौनी तहसील स्थित सौंजना व नाराहट ग्रामसभा की चकबंदी का गजट प्रकाशित किया गया। 4,938.192 हेक्टेयर बंदोबस्ती रकवा वाले इस गांव का सर्वेक्षण प्रारंभ हुआ तो मौके पर 4,659.689 हेक्टेयर भूमि पाई गई। लगभग 278.403 हेक्टेयर भूमि मौके पर नहीं मिली। बंदोबस्ती के लिहाज से तमाम रकबों का क्षेत्रफल भी कम ज्यादा मिला। सर्वे के दौरान कुल 3,852 त्रुटियां निकलकर सामने आईं। अधिकारियों ने इन स्थितियों का फायदा उठाया और साधन संपन्न किसानों को बेहतर जमीन दी जाने लगी। बड़ी जोत वाले किसानों ने अधिकारियों से साठगांठ करके अच्छी जमीन वाले चक अपने नाम करवा लिए, वहीं गरीब ग्रामीणों को अच्छी जमीन के एवज में उड़ान चक व पथरीली जमीन दे दी गई, जिसका जबरदस्त विरोध लंबे समय से चला आ रहा है। चकबंदी न्यायालय में सैकड़ों की संख्या में वाद लंबित हैं। यही हाल नाराहट का है, यहां भी साधन संपन्न ग्रामीणों को अच्छी व उपजाऊ जमीन दे दी गई, साथ ही गरीब ग्रामीणों को अधिकारियों ने उपेक्षित कर दिया। कइयों को तो अभी तक जमीन ही नहीं दी जा सकी है। चकबंदी की इस प्रक्रिया में तमाम गरीब ग्रामीणों का जीवन उलझकर रह गया है। जमीन की उम्मीद लगाए कई लोग जवान से बूढ़े हो गए तो कइयों को स्वर्गवासी होने तक भी भूमि नहीं मिल सकी।
चकबंदी के दौरान नहीं होती हदबंदी
ललितपुर। चकबंदी के दौरान हदबंदी नहीं होने का नियम ग्रामीण दबंगों के लिए वरदान बन गया है। दबंग ग्रामीण अपने खेत के आसपास ग्रामीणों की भूमि पर जबरन कब्जा कर लेते हैं। पीड़ित ग्रामीण जिलाधिकारी व उप जिलाधिकारी सदर कार्यालय की परिक्रमा लगाते रहते हैं पर चकबंदी के दौरान हदबंदी नहीं होने के नियम की वजह से उनको न्याय नहीं मिल पाता है। नाराहट व सौंजना में सैकड़ों गरीब ग्रामीण व्यवस्था की इस खामी से जूझ रहे हैं।

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