एकसूत्र में पिरोता राष्ट्रगान

Lalitpur Updated Thu, 08 May 2014 05:31 AM IST
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ललितपुर। साहित्यिक संस्था अभ्युदय के तत्वावधान में आयोजित विचार गोष्ठी में गुरूदेव रवींद्रनाथ टैगोर की रचनाओं को भारत जैसे विशाल देश के लिए जोड़ने वाला बताया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने उनके जीवन पर प्रकाश डाला।
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गुरूदेव रवींद्रनाथ टैगोर के जन्म दिवस पर घंटाघर स्थित जगदीश मंदिर में आयोजित विचार गोष्ठी में नेहरू महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर भगवत नारायण शर्मा ने कहा कि नाटककार, उपन्यास, रचनाकार, चित्रकार, शिक्षाविद गुरूदेव रवींद्रनाथ टैगोर का जीवन संपूर्णता व एकता का दर्शन है। उन्होंने आजीवन बिखराव और विभाजन के विरुद्ध संघर्ष किया। वह मानवतावादी सोच के पथ प्रदर्शक थे। टैगोर का मानना था कि अलगाव जहां होगा, वहीं अंधकार होगा। वह नया चांद जैसी कविता लिखकर बच्चों के प्रिय बन गए। जनगणमन राष्ट्रगान रचकर उन्होंने भारत जैसे विशाल देश को एकता के सूत्र में पिरोने का काम किया। अन्य वक्ताओं ने उनके जीवन पर प्रकाश डाला। विचार गोष्ठी में नेहरू महाविद्यालय के संस्कृत विभाग के अध्यक्ष डा. ओमप्रकाश शास्त्री, डा. पूरन सिंह निरंजन, डा. जनक किशोरी शर्मा, डा. पुनीत बिसारिया, डा. दीपा सिंधी, हरीश कपूर टीटू, डा. रामकुमार रिछारिया, भगवत सिंधी, डा. राजेंद्र श्रीवास्तव, अक्षय अलया, राजेश देवलिया, करीम असर, उमाशंकर गुप्त, जलील अहमद, अजीज कुरैशी, आचार्य सतभैया, प्रो चंद्र विनोद हुंडैत आदि उपस्थित रहे।
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