यातनाओं की कैद से घर नहीं लौटे आंख के तारे

Lalitpur Updated Thu, 08 May 2014 05:31 AM IST
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ललितपुर। दो वक्त की रोटी के लिए ऊंट व भेड़ पालकों के पास गिरवी रखे गए बच्चे अभी भी अपने घर वापस नहीं लौट सके हैं। बुंदेलखंड सेवा संस्थान की शिकायत पर मुख्य विकास अधिकारी ने बच्चों को घर वापस लाने के साथ मुखमरी से जूझ रहे परिजनों को अनाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में उन्होंने एसडीएम, श्रम प्रवर्तन व डीएसओ को पत्र लिखा है।
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बुंदेलखंड स्थित ललितपुर जनपद के मड़ावरा क्षेत्र में जंगलों के आसपास बसे ग्रामों में जीवन बहुत ही दुष्कर है। यहां रहने वाले सहरिया जनजाति के लोगों की आर्थिक स्थिति बहुत ही दयनीय है। भर पेट रोटी उनको यदाकदा ही नसीब होती है। वनोपज के साथ पट्टे में मिली थोड़ी सी जमीन पर खेतीबाड़ी करके यह लोग रोटी का इंतजाम करते हैं। इस बार खरीफ के बाद रबी फसल की बर्बादी ने उनकी रोटी छीन ली। परिणाम स्वरूप अच्छी परवरिश व भरपेट भोजन के आश्वासन पर राजस्थान से आए भेड़ व ऊंट कारोबारियों को धौरीसागर के सकरा मजरे में रहने वाले ग्रामीणों ने अपने 18 बच्चों को सौंप दिया। राजस्थान में यातनाएं झेलने के बाद किसी तरह भागकर घर वापस लौटे 10 बच्चों ने आपबीती सुनायी तो परिजनों के रोंगटे खड़े हो गए। अब वह अपने आठ बच्चों के वापस आने का इंतजार कर रहे हैं। इस संबंध में बीते दिनों बुंदेलखंड सेवा संस्थान के मंत्री वासुदेव ने मुख्य विकास अधिकारी को अवगत कराया कि सकरा गांव में रहने वाले लोगों को कोटेदार अनाज नहीं देता है, अभी तक फसलों के नुकसान की भरपाई भी नहीं की जा सकी है, और तो और गिरवी रखे गए नाबालिग बच्चों को छुड़ाकर वापस लाने की दिशा में भी कोई सार्थक पहल नहीं की गई। इसको ध्यान में रखते हुए मुख्य विकास अधिकारी ने श्रम प्रवर्तन अधिकारी को पत्र लिखकर नाबालिग बच्चों को अतिशीघ्र छुड़वाने के निर्देश दिए। वहीं, उप जिलाधिकारी महरौनी को पत्र लिखकर प्राकृतिक आपदा के दौरान फसल के नुकसान की भरपाई कराने को कहा है। सीडीओ ने जिलापूर्ति अधिकारी को पत्र लिखकर सकरा ग्राम में रहने वाले लोगों को गेहूं, चावल, चीनी, मिट्टी का तेल आदि उपलब्ध कराने को निर्देशित किया है। उधर, बच्चों के परिजनों पर एक- एक दिन पहाड़ सा साबित हो रहा है। वह अपने बच्चों के घर लौटने का इंतजार कर रहे हैं।
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