बीमारी में भी नहीं मिलता अवकाश

Lalitpur Updated Tue, 06 May 2014 05:31 AM IST
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ललितपुर। दिन रात अपने फर्ज को अंजाम देने वाले सिपाही अपने ही अफसरों की मनमानी का शिकार हो रहे हैं। बीमार होने के बावजूद कांस्टेबलों का मेडिकल अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाता है, बल्कि चिकित्सकीय अभिलेखों के बावजूद उनको जबरन लीव विदाउट पे पर रखा जाता है, यही नहीं अनुशासन का हवाला देकर उनकी आवाज को दबा दिया जाता है।
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सिपाहियों के लिए सरकार की ओर से विभिन्न सुविधाएं मुहैया करायी जाती हैं। बीमार होने पर उनको पूरी सर्विस में बाकायदा 13 माह की मेडिकल लीव दी जाती है। बीमार होने पर चिकित्सक की सलाह पर उन्हें अधिकारियों द्वारा अवकाश स्वीकृत स्वीकृत करना विभागीय नियम के अंतर्गत है। बाद में चिकित्सक के ही फिटनेश प्रमाण पत्र पर उनकी आमद कराई जाती है। लेकिन, ललितपुर जनपद में पुलिस महकमे का बहुत ही बुरा हाल है। आमतौर पर विभिन्न विभागों में बीमार होने वाले कर्मचारियों को उसके साथी कर्मचारी व अधिकारी हालचाल लेने के लिए उनके घर जाते हैं और आवश्यकता पड़ने पर यथा संभव मदद भी करते हैं। लेकिन, पुलिस महकमे में स्थितियां कुछ अलग हैं। यहां मेडिकल अवकाश स्वीकृत कराना और उसकी समयावधि बढ़वाना किसी चुनौती से कम नहीं है। बीते महीनों में कई पुलिस कर्मी बीमार हुए और चिकित्सक की सलाह पर आराम करने लगे और साथियों से जिम्मेदार अफसर को इसकी सूचना भेज दी। प्रार्थना पत्र में दी गई समयावधि के अंदर तबियत दुरुस्त नहीं होने पर चिकित्सक की सलाह के बाद मेडिकल अवकाश बढ़ाने का प्रार्थना पत्र पीड़ितों ने जिम्मेदार अधिकारी को भिजवाया। बावजूद, इसके बीमार सिपाही का अफसरों ने मेडिकल अवकाश स्वीकृत करना मुनासिब नहीं समझा, और तो और कई मामलों में मेडिकल अवकाश बढ़ाने का प्रार्थना पत्र देने वाले सिपाहियों को लीव विदाउट पे कर दिया गया, जिसकी वजह से छुट्टी के दिन का वेतन भी उनको नहीं मिल सका। इस तरह के विभाग में दर्जनों मामले हैं। कई मामलों में चिकित्सीय अभिलेख होने के बावजूद अधिकारियों से जांच कराई गई। जांच में भी सिपाही के बीमार होने की पुष्टि होने पर भी उसका मेडिकल अवकाश स्वीकृत नहीं किया गया। सिपाहियों पर अफसरों की इस तानाशाही से विभागीय कर्मचारियों में आक्रोश पनप रहा है। लेकिन, अनुशासन का हवाला देकर हर बार इस आक्रोश को सक्रिय बिचौलिए दबा देते हैं।
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