किसानों को सौंपी जाएगी सिंचाई के पानी की कमान

Lalitpur Updated Wed, 29 Jan 2014 05:49 AM IST

ललितपुर। बहुत जल्द सिंचाई के पानी की कमान किसानों को सौंपी जाएगी। किसान न केवल सिंचाई के पानी का बंटवारा करेंगे बल्कि नहरों व माइनरों के मरम्मत की जिम्मेदारी भी निभाएंगे। उत्तर प्रदेश सहभागी सिंचाई प्रबंधन अधिनियम 2009 के तहत पांच स्तर की जल उपभोक्ता समितियों के गठन की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। इसके लिए नहरों और माइनरों को आधार बनाते हुए सिंचाई विभाग किसानों की सूची तैयार करने में जुट गया है। इसके पश्चात अध्यक्ष व सदस्यों का चुनाव होगा।
हर वर्ष देखने में आता है कि नहर व माइनर संचालित होने के बाद भी किसानों को पानी नहीं मिल पाता है। कारण, नहर व माइनरों के शुरूआती हिस्से से जुड़े किसान पानी का दुरुपयोग करते हैं, जिसका परिणाम अंतिम हिस्से वाले किसानों को भुगतना पड़ता है। किसानों मेें आपसी सामंजस्य व उनको पानी की महत्ता से अवगत कराने के लिए शासन सिंचाई व्यवस्था में परिवर्तन करने जा रहा है।
जानकारों का मानना है कि व्यवस्थित सिंचाई के लिए पानी के बंटवारे में किसानों की सीधी भूमिका से समस्या का समाधान हो सकता है। कई महीनों चले विचार विमर्श और अध्ययन के बाद यह तय किया गया कि किसानों की सहभागिता से पानी का बंटवारा, नहरों की देखरेख सहित उनसे विभिन्न महत्वपूर्ण कार्य कराए जाएंगे। उत्तर प्रदेश सहभागी सिंचाई प्रबंधन अधिनियम 2009 के तहत पांच स्तर की जल उपभोक्ता समितियों के गठन की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है, जिनमें कुलावा समिति, अल्पिका समिति, रजवाहा समिति, शाखा समिति व परियोजना समिति शामिल है।
पहले समिति का सदस्य बनने के लिए चुनाव होगा फिर अध्यक्ष व सचिव के लिए मतदान कराया जाएगा। समितियां गठित हो जाने के बाद सभी चरणबद्ध तरीके से एक दूसरे के काम की निगरानी करेंगी। नहरों व माइनरों की मरम्मत, इनको क्षति पहुंचाने वाले किसानों पर अर्थदंड लगाने का भी इन समितियों को अधिकार दिया जाएगा। ललितपुर जनपद में सहभागी सिंचाई प्रबंधन को अमली जामा पहनाने के लिए विभागीय अधिकारियों ने नहरों, माइनरों व कुलावों से जुड़े किसानों की मतदाता सूची बनानी शुरू कर दी है। इस कार्य को पूर्ण करने के पश्चात बाकायदा चुनाव करवाकर पानी के बंटवारे की कमान किसानों के जिम्मे सौंपी जाएगी।


जामनी, रोहिणी व सजनम को प्राथमिकता
ललितपुर। जनपद में सबसे पहले जामनी, रोहिणी व सजनम बांध से निकलने वाली नहरों व माइनरों के पानी की कमान किसानों को सौंपे जाने की उम्मीद है। कारण, विश्व बैंक जल्द से जल्द उत्तर प्रदेश सहभागी सिंचाई प्रबंधन अधिनियम 2009 के तहत सिंचाई व्यवस्था लागू करवाना चाहता है। हाल ही में उसने उक्त तीनों बांधों की नहरों व माइनरों की लाइनिंग के लिए 165 करोड़ जारी किए हैं। बीते दिनों जनपद आगमन के दौरान विश्व बैंक अफसरों ने सहभागी सिंचाई प्रबंधन को वास्तविकता में लागू करने के लिए समितियां गठित करने के निर्देश भी दिए थे। विभागीय अधिकारी इस कार्य भी जुटे हुए हैं। अन्य की तुलना में उक्त बांधों से जुड़े अधिकारी ज्यादा गंभीरता के साथ कार्य कर रहे हैं।

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