जनसंख्या नियंत्रित करेगी ‘आईयूसीडी’

Lalitpur Updated Wed, 29 Jan 2014 05:49 AM IST
ललितपुर। लगातार बढ़ती जनसंख्या में स्थिरता लाने के लिए परिवार कल्याण विभाग ने आईयूसीडी (इंट्रायूट्री कंट्रासेप्टिव डिवाइस) सेवाओं को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। यह ऐसी डिवाइस है, जो डिलेवरी के बाद लगाई जाती है। यह सबसे सुरक्षित गर्भ निरोधक साधन है। इसके प्रति महिलाओं को प्रेरित करने के लिए चिकित्सक, स्टाफ नर्स के साथ ही आशा कार्यकत्रियों को प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
जनसंख्या को स्थिर करने के लिए प्रदेश सरकार ने वर्ष 2000 में जनसंख्या नीति तैयार की थी, जिसका मुख्य लक्ष्य वर्ष 2016 तक कुल प्रजनन दर को 2.1 के स्तर पर लाना है। वर्तमान में यह दर 3.1 है। वैसे तो प्रजनन दर में स्थिरता लाने के लिए परिवार नियोजन की अनेक स्थाई व अस्थाई विधियां उपलब्ध हैं, इसके बाद भी प्रदेश में गर्भ निरोधकों का प्रयोग काफी कम किया जा रहा है। विशेषकर, ग्रामीण क्षेत्रों में लोग गर्भ निरोधक साधन अपनाने के प्रति कम जागरूक हैं, जबकि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वालों की संख्या पूरे प्रदेश की जनसंख्या का 77 प्रतिशत है। इन्हीं कारणों को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में एक हजार की आबादी वाले प्रत्येक क्षेत्र में आशा कार्यकत्रियों का चयन किया गया है, ताकि आशा की पहुंच प्रत्येक घर तक हो तथा वह पात्र दंपति को आसानी से चिन्हित कर सके।
आशा कार्यकत्रियों के सहयोग से जननी सुरक्षा योजना में संस्थागत प्रसव में काफी वृद्धि हुई है। जच्चा व बच्चा के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्रसव के बाद उनका अस्पतालों में 48 घंटे रुकना भी अनिवार्य कर दिया गया है। इस दौरान प्रसूता व उनके परिजनों को परिवार नियोजन के फायदे समझाने का जिम्मा एएनएम, एलएचवी व फैमिली वेलफेयर काउंसलर को सौंपा गया है, जिसके बेहतर नतीजे प्राप्त नहीं हो रहे हैं।
इन हालातों को दृष्टिगत रखते हुए फैमिली प्लानिंग डिवीजन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के डिप्टी कमिशभनर डा. एसके सिकंदर ने परिवार नियोजन कार्यक्रम के अंतर्गत आईयूसीडी (इंट्रायूट्री कंट्रासेप्टिव डिवाइस) सेवाओं को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। आईयूसीडी कॉपर टी की तरह है, जो डिलेवरी के बाद लगायी जाती है। लाभार्थी महिलाओं को इसके लिए प्रेरित करने पर चिकित्सक व स्टाफ नर्स के साथ ही आशा कार्यकत्रियों को डेढ़ सौ रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इस योजना के अंतर्गत लाभार्थी महिलाओं को आईयूसीडी कराने पर 50 रुपये दिए जाएंगे। छह सप्ताह फाओअप के बाद उन्हें 100 रुपया और दिया जाएगा। वहीं, चिकित्सक एवं स्टाफ नर्स को उनके सामान्य कार्य के अतिरिक्त प्रत्येक आईयूसीडी केस पर 150 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. आरसी निरंजन का कहना है कि जनपद में यह योजना लागू कर दी गई है। मुख्यालय स्थित पीपीसी में यह सेवाएं उपलब्ध हैं।
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‘आईयूसीडी (इंट्रायूट्री कंट्रासेप्टिव डिवाइस) संस्थागत प्रसव के 48 घंटे के अंदर लगाई जा सकती है। इसे लगाने में आसानी होती है। यह सबसे सुरक्षित गर्भ निरोधक है। इसे अपनाने से बच्चों में अंतर रखने में फायदा मिलता है। यह अन्य विधियों से अधिक कारगर है।’
डा. गीतांजलि
वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ, जिला महिला चिकित्सालय, ललितपुर।

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