चेहरे पर मुस्कान दिलों में ले के खाई बैठे हैं...

Lalitpur Updated Sun, 24 Nov 2013 05:44 AM IST
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ललितपुर। सरस महोत्सव की शुक्रवार की रात अखिल भारतीय मुशायरा के नाम रही। देर रात तक चले इस मुशायरे में शायरों ने अपने शेर व गजलों से लोगों के दिलों को छू लिया।
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श्री तुवन मंदिर प्रांगण में चल रहे सरस महोत्सव में आयोजित अखिल भारतीय मुशायरा का शुभारंभ जिलाधिकारी ओपी वर्मा व पुलिस अधीक्षक विजय सिंह यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मशहूर शायर मीसम गोपालपुरी ने ‘बिखेर देंगे जो महफिलों में नबी ये हक की सना की खुशबू, फरिश्ते चूमेंगे लब हमारे उड़ेगी जिस दम वफा की खुशबू, नबी की उल्फत में हर लुटा दो नबी की उल्फत में सर कटा दो, हमेशा जिंदा रहेगी तुमको न छू सकेगी फ़ज़ा की खुशबू’ पढ़कर मुशायरे का आगाज किया। सूरज राय सूरज ने ‘चेहरों पर मुस्कान दिलों में ले के खाई बैठे हैं करने सारे लोग हिसाबे पाई- पाई बैठे हैं, आज नसीयत करने वाले हैं बाबू जी दौलत की घर में पहली बार इकट्ठे सारे भाई बैठे हैं’ सुनाकर सामाजिक हकीकत को बेपर्दा कर दिया। स्थानीय शायर पंकज अंगार ने ‘जो मजहब की इबादत करता है वो मतलब की इबादत करता, करो मजलूम की खिदमत यही रब की इबादत है, फकत पूजा है हिंदू की फकत सजते हैं मोमिन के मुहब्बत इस जमाने में मगर सबकी इबादत है’ सुनाकर प्यार व मुहब्बत का संदेश दिया। सुफियाना काजी ने ‘वो हमको जानते हैं सब को ये जाहिर नहीं कराते हैं बड़े लोगों के साथ में जब हम फोटो खिंचाते हैं, दहेज की रखते हैं उम्मीद यू ससुराल वालों से चढ़ावे पर पुजारी जैसे अपना हक जताते हैं’ पढ़कर लोगों को सोचने पर विवश कर दिया। महोबा चरखारी से आईं शबाना सबा ने ‘इस तबाही में मुझे तेरी रजा लगती है, काम आती है दुआ न दवा लगती है, आह करती हूं तो छाले मेरे हिलके फूटे, सांस लेती हूं तो जख्मों को हवा लगती है’ सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। शकील कुरैशी ने ‘लोग उनको भी भूल जाते हैं, जो मुसीबत में काम आते हैं’ सुनाई। सरवर कमाल ने ‘कर्ज माफ था उसे ये बताना पड़ा मुझे, अहसान करके याद जताना पड़ा मुझे’ पढ़कर समां बांध दिया। जब्बार ने ‘वतन का कर्ज चुकाने के वास्ते, तैयार हूं जान लुटाने के वास्ते’ सुनाकर देश भक्ति का संदेश दिया। स्थानीय शायर असर ललितपुरी ने ‘ये बात और के बर्तन खनकते रहते हैं, हमारा घर है हिंदुस्तान अच्छा है’ ‘तू मालदार है तेरा मकान अच्छा है, तो क्या जरूरी है के खानदान अच्छा है’ सुनाकर वाहवाही लूटी। नासिर जौनपुरी ने ‘तुम अपने महल की भी कुछ फिक्र करना गरीबों का छप्पर जलाने से पहले, सुनाई। नासिर जौनपुरी ने ‘अपनी पलकों के शामियाने से तुम छुपा लो मुझे जमाने से, कर लिया बंद उसने आंखों को बच गए लोग डूब जाने से’ सुनाई। अतुल अजनबी ने ‘हमने जब ऐतबार किया सर्द रात पर, सूरज उदास हो गया इतनी सी बात पर’ सुनाकर लोगों का मनोरंजन किया।
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