क्या हुआ तेरा वायदा...

Lalitpur Updated Sat, 23 Nov 2013 05:44 AM IST
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ललितपुर। 28 सितंबर 2012 को गिन्नौट बाग के मंच से मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद जिमन तीन की जमीन भूमिधरी होने की उम्मीद लगाए बैठे काश्तकार मायूस हैं। डेढ़ माह के भीतर समाधान किए जाने के वायदे को एक वर्ष एक माह 24 दिन गुजर जाने के बाद भी पूरा नहीं किया गया। सिर्फ इतना ही नहीं मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी ऐतिहासिक सुम्मेरा तालाब के हालात नहीं बदले।
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जनपद में 14,312 हेक्टेयर भूमि राजस्व अभिलेखों में जिमन तीन (आसामी) के रूप में दर्ज है। इस भूमि पर पीढ़ियों से 32,166 किसान खेतीबाड़ी करते चले आ रहे हैं, बावजूद इसके इस जमीन को भूमिधरी का दर्जा नहीं दिया गया। इस वजह से इस पर खेतीबाड़ी करने वाले किसानों को विभिन्न सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। खेती करने के बावजूद ग्रामीण को किसान का दर्जा नहीं दिया जाता। किसान संगठन काफी अर्से से इस जमीन को भूमिधरी घोषित करने के लिए आंदोलन करते चले आ रहे हैं। 28 सितंबर 2012 को बेरोजगारी भत्ता व कन्या विद्या धन बांटने गिन्नौट बाग आए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विकास से संबंधित तमाम घोषणाएं की थीं। किसानों की इस समस्या का समाधान करने के लिए मुख्यमंत्री ने गिन्नौट बाग के मंच से जिमन तीन की जमीन भूमिधरी घोषित करवाने के लिए सिर्फ डेढ़ माह का समय मांगा था और कहा था कि इस समयावधि के अंदर हर हाल में समस्या का समाधान हो जाएगा। किसान उत्साहित हो गए और सरकारी निर्देश आने का इंतजार करने लगे। लेकिन, धीरे- धीरे एक वर्ष एक माह 24 दिन गुजर गए और शासन से इस संबंध में कोई भी दिशा निर्देश नहीं आया। कभी मुख्यमंत्री जिंदाबाद करने वाले किसान अब मायूस होकर घर बैठ गए हैं। किसान संगठन इसे वायदा खिलाफी के रूप में देख रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि 1939- 40 में बंदोबस्ती के दौरान राजस्व कर्मियों ने 14312.774 हेक्टेयर भूमि को त्रुटिवश खतौनी में आसामी अंकित कर दिया था, जिसकी वजह से यह जमीन जिमन तीन की श्रेणी में तब्दील हो गई। इस समस्या का तब से अब तक समाधान नहीं खोजा जा सका। सिर्फ यही नहीं मुख्यमंत्री ने नगर के सुम्मेरा तालाब को पर्यटन स्थल में परिवर्तित करने के लिए उसके जीर्णोद्धार की घोषणा की थी। नगरवासियों के लिए यह किसी तोहफे से कम नहीं था। प्रशासनिक अधिकारियों के दिशा निर्देश पर सिंचाई विभाग के राजघाट निर्माण खंड ने 7.50 करोड़ रुपये का आगणन पर्यटन विभाग को भेज दिया। लेकिन, यह घोषणा भी अभी तक कागजों में ही उलझकर रह गई है। जानकारों का कहना है कि अभी शासन ने सुम्मेरा तालाब के जीर्णोद्धार को लेकर भी धनराशि निर्गत नहीं की है। इस वजह से निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हो सका। इसके अतिरिक्त पांडव वन, रणछोर धाम, मुचकुंद गुफा, माताटीला बांध का पार्क व मुख्यमंत्री की घोषणा में शामिल डोंगराकलां पहाड़ी स्थित विंदेश्वरीधाम के विकास को प्रस्तावित कार्ययोजनाएं शासन में लंबित पड़ी हुई हैं।
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