इन दो आंखों के आंसू पर सात समंदर वारे हैं...

Lalitpur Updated Sat, 23 Nov 2013 05:44 AM IST
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ललितपुर। तुवन मंदिर प्रांगण में चल रहे सरस महोत्सव के दौरान शुक्रवार की रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के नाम रही। ओज व श्रृंगार के साथ रचनाकारों के एक से बढ़कर एक गीत सुनकर श्रोता वाह- वाह कह उठे। महफिल इस कदर जमी कि लोग सुबह चार बजे तक अपनी कुर्सियों पर डटे रहे।
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इससे पहले पूर्व सांसद एवं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष चंद्रपाल सिंह यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया। अतिथियों व कवियों को प्रतीक चिह्न व शॉल देकर सम्मानित किया गया। औपचारिकताओं के बाद कवियत्री राणा जेबा ने सरस्वती वंदना के साथ कवि सम्मेलन का आगाज किया। संचालक अशोक सुंदरानी ने दिनेश याज्ञिक को आमंत्रित किया और उन्होंने नेताओं के न पूरे होने वाले वायदों पर कविता पाठ करके लोगों को हंसने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने ‘कब तक सबर रखे रे भइया, अब तो सबर रही नइया भइया’ सुनाया। नेत्रहीन अनवर ताज ने ‘मुझे राम का मन भले न देना, सीता के दपर्ण सा मन देना, मुझे अंधे होने पर कोई सिकवा नहीं, मेरे संतान को श्रवण कुमार बना देना’ सुनाकर लोगों को भावविभोर कर दिया। मुहब्बत पर उन्होंने सुनाया ‘तुम्हारे भाइयों ने प्यार पर पहरे लगाए हैं, तुम्हें मेरी कसम तुम उनकी कोशिश फेल कर देना’ पर लोग वाह- वाह कह उठे। अनिल मिश्र तेजस ने कविता पाठ करते हुए ‘गीत नहीं लिखता मैं यारो साड़ी चूनर चोली के, गीत नहीं लिखता मैं यारो कुमकुम बिंदिया रोली के’ सुनाकर वातावरण में भक्ति का रस घोल दिया। ‘मृत्युंजय हो जाते हैं जो वतन के खातिर मरते हैं’ कविता खूब सराही गई। कवियत्री जेबा राणा ने ‘संभालो प्यार से इनको अगर ये छूट जाएंगे, खिलौने की तरह गिरकर जमीं पर फूट जाएंगे, बहुत मुश्किल से बनते हैं मुहब्बत के रिश्ते, हिफाजत कर न पाओगे तो एक दिन टूट जाएंगे’ सुनाकर युवाओं की तालियां बटोरीं। .
इसके पश्चात जलाल मैकश ने अपने ही अंदाज में ‘जब चमन में फूलों पर तितलियां नहीं होती, फिर हरीभरी दिल की खेतियां नहीं होती जिसको इस मुल्क की मिट्टी से अगर प्यार नहीं, उसको इस मुल्क में रहने का अधिकार नहीं’ सुनाकर श्रोताओं की वाहवाही लूटी। वीर रस के प्रसिद्ध कवि विनीत चौहान ने ‘ये धरती तात्या के शीश दान की है, ये धरती झलकारी के मान दान की है, बुंदेली पौरुष कभी अंग्रेजों के आगे झुका नहीं, ये धरती झांसी रानी के स्वाभिमान की है’ माहौल में गमराहट ला दी। चंद्रेश वरदिया ने ‘आप मधुर वाणी के स्वामी हैं, हृदय से ही महान हैं’ पढ़कर राजनीति पर कटाक्ष किया। मशहूर कवि कुंवर जावेद ने ‘गुलमोहर गुलनार चमेली, या गुलाम की प्रिय सहेली, तुझको फूलों में फूलों की रानी कैसे मानूं, मेरे मन आंगन में एक बार खिलो तो जानू’ सुनाकर मुहब्बत करने वालों को नयी दिशा दे दी।
संचालन कर रहे अशोक सुंदरानी ने जूतों की मनोदशा पर ‘हम कभी कपड़ों तो कभी चमड़ों के गढ़े गए’ सुनाकर वाहवाही लूटी। इसके पश्चात कवियत्री अंजुम रहबर ने ‘तेरी यादों को प्यार करती हूं, सौ जनम भी निसार करती हूं, तुझको फुर्सत मिले तो आ जाना, मैं तेरा इंतजार करती हूं’ ‘ये किसी धाम का नहीं होता, प्यार जब तक नहीं टूटे, दिल किसी काम का नहीं होता’ ‘छुकछुक छुकछुक रेल चली है जीवन की’ सुनाकर माहौल में प्यार की बहार ला दी। विष्णु सक्सेना ने ‘रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा, एक आई लहर तो कुछ बचेगा नहीं, मुझको पत्थर का दिल तुझने कह तो दिया, पत्थरों पर लिखोगी मिटेगा नहीं’ गीत सुनाकर वाहवाही लूटी। अंत में ओज के राष्ट्रीय कवि हरिओम पवार ने कारगिल युद्ध पर ‘इन दो आंखों के आंसू पर सात समंदर वारे हैं, जब मेंहदी वाले हाथों ने मंगल सूत्र उतारे हैं’ सुनाकर वीर सपूतों व उनके परिवारों को याद किया। उन्होंने ‘मैं अविरागी परंपरा का चारण हूं, आजादी की पीड़ा का उच्चारण हूं, मैं भारत की जनता का संबोधन हूं, आंसू के अधिकारों का उद्बोधन हूं’ पंक्तियों से देश की स्थिति व अपने इरादों को प्रस्तुत किया। इस दौरान प्रशासनिक अफसरों के साथ ललितपुर पावर जनरेशन कंपनी बजाज ग्रुप के अधिकारीगण व अन्य लोग मौजूद रहे।
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