जल्द मिलेगा नेहरू नगर को भरपूर पानी

Lalitpur Updated Sat, 26 Oct 2013 05:43 AM IST
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ललितपुर। बूंद- बूंद पानी के लिए तरसने वाले नेहरू नगर में टोटियां खोलते ही तेज धार के साथ पानी निकलेगा। जिलाधिकारी के निर्देश पर जल संस्थान अधिकारियों ने इस क्षेत्र की समस्या के समाधान का मसौदा तैयार कर लिया है। सर्वेक्षण पूर्ण होने के पश्चात डीटेल प्रोजेक्ट प्लान बनाया जा रहा है। धनराशि आवंटन के लिए प्रस्ताव शासन भेजा जाएगा।
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देवगढ़ रोड स्थित रेलवे लाइन पार करने के बाद नगरीय क्षेत्र का तेजी के साथ विकास हो रहा है। सैकड़ों की संख्या में भवन बनाए जा रहे हैं और आवासीय कालोनियां विकसित हो रही हैं। बढ़ते क्षेत्रफल के लिहाज से यहां की मूलभूत सुविधाओं की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। यहां तक कि पूर्व में कराए गए कार्यों की गुणवत्ता दोयम दर्जे की निकली। अवरुद्ध पाइप लाइनों की वजह से यहां की पेयजल आपूर्ति शुरुआत से ही बाधित रही। गर्मी के मौसम में यहां रहने वाले लोग बूंद-बूंद पानी को तरसते हैं। बारिश व ठंड के मौसम में भी जल संकट दूर नहीं होता। इन हालातों को गंभीरता से लेते हुए बीते दिनों जिलाधिकारी ओ पी वर्मा ने अधिशासी अभियंता जल संस्थान आर एस चौधरी को नेहरू नगर में ही पानी की टंकी आदि निर्माण के निर्देश दिए। इस पर जल संस्थान अफसरों ने एक संस्था की मदद से गोविंद सागर बांध के पास से होते हुए नेहरू नगर तक पाइप लाइन बिछाने का सर्वेक्षण करवाया। इस दौरान ट्रीटमेंट प्लांट और पानी की टंकी के लिए स्थान की तलाश की लेकिन अफसरों को सफलता नहीं मिल सकी। इस पर जिलाधिकारी ने ही बाल संप्रेक्षण गृह के पास खाली पड़ी जमीन के उपयोग का सुझाव दिया। साथ ही राजस्व अफसरों को जमीन के संबंध में जानकारी करने के निर्देश दिए गए। संयोग सेखाली पड़ी जगह नजूल की पाई गई, इससे उत्साहित जल संस्थान अधिकारियों ने योजना का डीटेल प्रोजेक्ट प्लान बनाना शुरू कर दिया है। जल संस्थान अफसरों का कहना है कि धनराशि जारी होते ही नेहरू नगर की पेयजल समस्या का निदान कर दिया जाएगा।
अन्य क्षेत्रों को मिलेगा फायदा
ललितपुर। नेहरू नगर के लिए अलग से पेयजल योजना तैयार करने से अन्य क्षेत्रों को भी फायदा मिलेगा। जानकारों का कहना है कि इससे आपूर्ति किए जाने वाले पानी की बचत होगी, जिसका उपयोग अन्य क्षेत्रों में किया जा सकेगा।


होगा खदान के पानी का उपयोग
ललितपुर। सिद्धन के पास एक खदान की कई एकड़ भूमि गहरी झील में तब्दील हो चुकी है। इसमें भारी मात्रा में हमेशा बारिश का पानी भरा रहता है, जिसका उपयोग नहीं होता। प्रशासनिक अधिकारी खदान संचालकों से बातचीत करके इसके पानी का उपयोग लोगों की प्यास बुझाने में कर सकते हैं। जानकारों की नजर में पेयजल आपूर्ति के लिए यह बेहतर विकल्प होगा।
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