सीमांकन न होने से चल रहा खनन का खेल

Lalitpur Updated Fri, 25 Oct 2013 05:43 AM IST
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ललितपुर। वन एवं राजस्व विभाग के नक्शों में भिन्नता के चलते आरक्षित क्षेत्रों के आसपास संचालित खदानों का सीमांकन नहीं हो पा रहा है। जहां वन विभाग के अफसर अपने नक्शा को सही बता रहे हैं, वहीं राजस्व विभाग के अफसरों की भी यही स्थिति है। ऐसे में जंगल के आसपास खनन कर रहे पट्टाधारकों को मनमानी करने का भरपूर मौका मिल रहा है। हालांकि वन विभाग के अफसर तरमीम नक्शा के आधार पर सीमांकन कराने को राजी हो गए हैं। लेकिन, राजस्व विभाग ने तरमीम नक्शा मुहैया कराने की अभी तक सुध नहीं ली है।
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जिले में खनन का कारोबार बडे़ पैमाने पर होता है। यहां सेंड स्टोन, डायस्फोर एवं ग्रेनाइट की खदानें हैं। जंगलों के आसपास अनेक खदानें होने से आरक्षित क्षेत्र में घुसपैठ की संभावना बनी रहती है। वन विभाग के अफसर भी इस बात को स्वीकार करते हैं। बीते कई दिनों से आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध खनन होने की शिकायतें क्षेत्रवासियों की ओर से विभागीय अफसरों को प्राप्त हो रही थी। इस पर सामाजिक वानिकी प्रभाग के प्रभागीय निदेशक वीके जैन ने रेंज अफसरों को वन क्षेत्रों के आसपास की खदानों का दोबारा सीमांकन कराकर रेंज सीमा में पिलर लगाने के निर्देश दिए थे। यही नहीं, उन्होंने खान विभाग व राजस्व विभाग को भी पत्र लिखे थे। जब खदानों के सीमांकन की बारी आई तो वन विभाग एवं राजस्व विभाग के नक्शों में भिन्नता पाई गई। इस कारण सीमांकन में अवरोध पैदा हो गया। आखिरकार दोनों विभागों के अफसर तरमीम नक्शा के आधार पर सीमांकन को सहमत हो गए। विडंबना यह है कि राजस्व विभाग तरमीम नक्शा अभी तक पेश नहीं कर सका है। इस वजह से आरक्षित वन क्षेत्रों के आसपास संचालित खदानों का सीमांकन अटका पड़ा है। ऐसे में खनन कारोबारियों को मनमानी करने का मौका मिल गया है।
विभागों में समन्वय का अभाव
ललितपुर। अवैध खनन रोकने के उद्देश्य से राजस्व, खनिज एवं वन विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम जिले स्तर पर गठित की गई है पर विभागीय अफसरों में समन्वय का अभाव देखा जा रहा है। शायद यही वजह है कि तीनाें विभागों के संयुक्त निरीक्षण नहीं होते हैं। निरीक्षणों को तिथियां तय होती हैं, लेकिन वे किसी न किसी वजह से टाल दी जाती हैं। इसका अनुचित फायदा अवैध खनन करने वाले कारोबारियों को मिलता है। विडंबना यह है कि जब कभी अवैध खनन का मामला सामने आता है तो जिम्मेवारी लेने से पीछे हटने में अधिकारी एक पल नहीं लगाते हैं। इस दौरान उनका कहना होता है कि यह तो ग्राम समाज का मामला है तो कभी राजस्व तो कभी खनन विभाग का प्रकरण बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं।


ग्राम समाज की भूमि में हो रहा खनन
ललितपुर। जिले में खनन कारोबारियों ने कार्रवाई से बचने का नया खेल शुरू कर दिया है। अब वे ग्राम समाज की भूमि पर बिना किसी नियम कायदों के खनन करा रहे हैं। इसमें न तो वन विभाग और न ही खनिज विभाग को ऐतराज है। यही वजह है कि ग्राम समाज की जमीन में खनन ने गति पकड़ ली है।
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