बुंदेलखंड पैकेज के कूप बने उपयोगी

Lalitpur Updated Tue, 22 Oct 2013 05:42 AM IST
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ललितपुर। बुंदेलखंड विशेष पैकेज के तहत बनाए जा रहे कूपों को लेकर भले ही शिकायतें की जाती रहीं हो पर यह कूप तमाम किसानों की तकदीर बन गए हैं। सिंचाई के अभाव में ऊसर पड़े कई खेतों में फसल लहलहाने लगी है। सिर्फ खरीफ की फसल उगाने वाले काश्तकार अब रबी की फसल भी उगाने लगे हैं। बीते दिनों शासन से जनपद आई नियोजन विभाग की टीम ने कूप की उपयोगिता देखकर निर्माण कार्य को सराहा।
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बुंदेलखंड विशेष पैकेज के तहत भारत सरकार ने सिंचाई के कूप निर्माण के लिए धनराशि जारी की, इसके तहत ललितपुर जनपद को 2,617 कूप बनाने का लक्ष्य सौंपा। पिछले तीन वर्षों में लघु सिंचाई विभाग चार मीटर व्यास व 15 मीटर गहराई वाले 1,680 कूप बनवा चुका है। 937 कूपों का अभी भी निर्माण कार्य कराया जाना शेष है। कूपों की उपयोगिता जांचने के लिए बीते दिनों नियोजन विभाग के संयुक्त सचिव सतवीर सिंह सिरोही के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम जनपद आई। टीम ने जखौरा स्थित करगन, नदनवारा, महरौनीखुर्द, बीघामहावत, बख्तर, महर्रा, बंधपुरा, राख पंचमपुर सहित कई ग्रामीण इलाकों में जाकर कूप बनवाने वाले काश्तकारों से सीधा संवाद किया। इस दौरान किसानों ने बताया कि वे अभी तक एक फसल की बुआई कर पा रहे थे, कूप निर्माण के पश्चात दो फसलों का लाभ उनको मिलने लगा है। कूपों के पानी से फसलों की पर्याप्त सिंचाई हो जाती है। दूसरे दिन टीम के सभी सदस्य मड़ावरा ब्लाक स्थित गौंना, सीरोन, गिदवाहा, दिदौनिया, गंगचारी सहित विभिन्न ग्रामीण इलाकों मेें गए। यहां कूपों के व्यास व गहराई की नापजोख की गई। कूपों की उपयोगिता यहां भी बेहतर पाई गई। काश्तकारों ने बताया कि कूपों की वजह से वे सब्जी आदि की भी खेतीबाड़ी कर लेते हैं। जिससे उनको अधिक फायदा हो जाता है। एक फसल बो रहे अधिकतर किसान अब दो फसलों का लाभ ले रहे हैं।
कैसे बनेंगे 937 कूप
ललितपुर। बुंदेलखंड पैकेज के तहत बनाए जा रहे कूपों के निर्माण कार्य की गति बहुत ही मंद है। वर्ष 2009-10 में पैकेज की घोषणा हुई थी। इस दौरान 2617 कूप बनाए जाने का लक्ष्य साधा गया था। वर्ष 2009-10, 2010-11, 2011-12 व 2012-13 व चल रहे वित्तीय वर्ष 2013-14 में अब तक कुल 1680 कूपों का निर्माण कराया जा सका है। अभी भी 937 कूपों का निर्माण कार्य कराया जाना शेष है। विभागीय अधिकारी कार्य में जुटे हुए तो हैं पर मौजूदा वित्तीय वर्ष में इन कूपों का निर्माण संभव दिखाई नहीं दे रहा है।
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