सतत एवं व्यापक मूल्यांकन में उदासीनता

Lalitpur Updated Sat, 31 Aug 2013 05:36 AM IST
ललितपुर। परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों के शैक्षिक एवं सह शैक्षिक पहलुओं पर नजर रखने के उद्देश्य से संचालित सतत एवं व्यापक मूल्यांकन कार्यक्रम (सीसीई) प्रभावी क्रियान्वयन के अभाव में दम तोड़ता नजर आ रहा है।
धन के अभाव में नवीन प्रवेशार्थियों की प्रोफाइल तैयार नहीं हो पा रही है। वहीं, जिन स्कूली बच्चों की प्रोफाइल बनी हैं, उनकी नियमित प्रगति को जांचने में अधिकांश शिक्षक उदासीनता बरत रहे हैं। इन स्थितियों में मूल्यांकन कार्यक्रम को गति नहीं मिल पा रही है।
प्रत्येक बच्चे की प्रकृति एवं सीखने की गति में भिन्नता होती है। शायद यही वजह है कि बच्चे अलग-अलग तरीकों से सीखते हैं। इसे ध्यान में रखकर शासन ने परीक्षा प्रणाली के स्थान पर सतत एवं व्यापक मूल्यांकन कार्यक्रम को प्रायोगिक तौर पर प्रारंभ किया है। इसमें व्यवस्था की गई है कि प्रत्येक परिषदीय स्कूल के हर बच्चे की प्रोफाइल तैयार की जाएगी। यही नहीं, शिक्षकों को शिक्षण से पूर्व और बाद में डायरी भरनी होगी। गत वर्ष विभागीय अफसरों ने इस कार्यक्रम को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से प्रत्येक बच्चे की प्रोफाइल तैयार करवाई। शुरूआत में अधिकांश शिक्षक बच्चों के मूल्यांकन में नानुकुर करते दिखाई दिए, पर विभागीय अधिकारियों के दबाव में बाद में अध्यापक बच्चों की प्रोफाइल भरने को तैयार हो गए और कई स्कूलों में बच्चों की शैक्षिक एवं सह शैक्षिक गतिविधियाें पर नजर रखी गई। वर्तमान सत्र में हालात अलग दिखाई दे रहे हैं। जिले में जहां कक्षा एक एवं छह के नवीन प्रवेशार्थियों की प्रोफाइल नहीं बन पा रही हैं। वहीं, स्कूलों में पहले से नामांकित छात्र-छात्राओं की भी प्रोफाइल को भरने में शिक्षक उदासीनता बरते रहे हैं। कमोवेश यही स्थिति शिक्षक डायरी भरने की है। अधिकांश विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक शिक्षण के पूर्व और बाद में डायरी भरना तो दूर बच्चों के नैतिक, सामाजिक, शारीरिक, भावनात्मक विकास पर भी गौर नहीं कर रहे हैं। इतना ही नहीं, विभागीय अफसरों की व्यस्तता का भी अनुचित फायदा उठाया जा रहा है। इन हालातों में सतत एवं व्यापक मूल्यांकन कार्यक्रम दम तोड़ता दिखाई दे रहा है।



ये है आरटीई
ललितपुर। एक अप्रैल 2010 से शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू हो गया है। इससे छह से चौदह वर्ष तक के सभी बचों को प्राथमिक शिक्षा पाने का हक मिल गया है। अब प्रत्येक बच्चे को कक्षा आठ तक की नि:शुल्क शिक्षा मुहैया कराने की जिम्मेदारी राज्यों की हो गई है।


क्या है सीसीई
ललितपुर। सतत एवं व्यापक मूल्यांकन के तहत बच्चों के शैक्षिक एवं सह शैक्षिक पक्षों का मूल्यांकन दो प्रकार से किया जा सकता है। इसमें आमतौर पर परीक्षा की आवश्यकता नहीं होती है। सह शैक्षणिक रचनात्मक मूल्यांकन में बच्चों के व्यक्तिगत, सामाजिक गुणों, जीवन कौशलों अभिवृत्तियों, अभिरूचियों, कार्यानुभव, प्रदर्शन आदि में वांछनीय परिवर्तन का वर्णन व मापन किया जाता है। नृत्य, गायन, चित्रकला, खेलकूद व योग में प्रतिभाग करते समय बच्चों की हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है। इस दौरान किसी भी छात्र को अनुत्तीर्ण करने का कोई प्रावधान नहीं है।


नहीं हो रहा पर्यवेक्षण
ललितपुर। विद्यालयों के निरीक्षण, पर्यवेक्षण के लिए दो प्रपत्र विकसित किए गए हैं, इनमें विद्यालय अवलोकन प्रपत्र व कक्षा अवलोकन प्रपत्र शामिल हैं। विद्यालय अवलोकन प्रपत्र में संबंधित विद्यालयों की सूचना न्याय पंचायत, ब्लाक संसाधन केंद्र एवं ब्लाक संसाधन केंद्र पर रखी जाएगी। कक्षा अवलोकन प्रपत्र विद्यालय के नियमित निरीक्षण में प्रयोग किए जाएंगे। प्रत्येक माह में एनपीआरसी छह विद्यालय, एबीआरसी पंद्रह विद्यालय एवं बीआरसी को कम से कम दस विद्यालयों का कक्षावलोकन करना है। इसके बाद भी जिम्मेदारी औपचारिकता निभाते दिखाई दे रहे हैं।

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