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गांवों के विकास को सात करोड़ की कार्ययोजना

Lalitpur Updated Tue, 12 Feb 2013 05:31 AM IST
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ललितपुर। ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से व्याप्त जनसमस्याएं अब जल्द ही दूर हो जाएगी, इसके लिए जिला पंचायत ने सात करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार कर ली है।
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जनपद के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। कहीं, जल निकासी की समस्या है तो कहीं बदहाल सड़क है। इन स्थितियों से निपटने के लिए बीते दिनों जिला पंचायत सदस्यों से अति आवश्यक निर्माण कार्यों के प्रस्ताव मांगे गए, इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने निर्माण कार्यों का लेखाजोखा तैयार कर लिया। कार्ययोजना के तहत पंचमपुर के ग्राम बानौली में 10 लाख की लागत से सीसी रोड, नौ लाख 90 हजार रुपये से ऊपरी राजघाट नहर से मिनोरा तक डब्लूबीएम, 10 लाख से सतगता स्थित ग्राम रसोई में सीसी रोड, 10 लाख से सौंजना कारीटोरन में गुंजौरा तक मार्ग, 10 लाख से सौंजना स्थित कारीटोरन से गुंजौरा तक मार्ग, 10 लाख से विजयपुरा में सीसी रोड निर्माण, 10 लाख से पूराकलां स्थित रोंगटाघाट से रसगइयन खिरका मार्ग, 10 लाख से धौर्रा में हनुमान मंदिर से धुबिया नाला तक केसी ड्रेन, 10 लाख से मड़ावरा स्थित सौंजना में मार्ग निर्माण, 10 लाख से धनवारा से पठापुरा तक संपर्क मार्ग, 10 लाख से खड़ोवरा में सीसी रोड निर्माण, 10 लाख से ही रोड़ा में सीसी रोड निर्माण, 10 लाख से दसरारा में सीसी रोड, 10 लाख से गिरार इमलिया संपर्क मार्ग बनाया जाएगा। वहीं, ग्रामसभा दिदौरा में 06 लाख से पेवरब्रिक्स, ग्राम गड़िया रामनगर में 10 लाख से सीसी रोड, 10 लाख से पाली घटवार मार्ग से बछलापुर संपर्क मार्ग, 10 लाख से ही सतवांसा में हनुमान जी मंदिर से पप्पू लोधी के मकान से राम किशोर सुड़ेले के मकान तक रोड निर्माण कराया जाएगा। इसके अलावा विभिन्न ग्रामीण इलाकों में संपर्क मार्ग, नाली, खड़ंजा आदि का निर्माण कार्य कराए जाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। राज्य वित्त आयोग के तहत बावन व तेरहवें वित्त आयोग की धनराशि से पच्चीस कार्य करवाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। बाकायदा टेंडर आमंत्रित किए गए हैं।



धन कम काम ज्यादा
ललितपुर। ग्रामीण इलाकों में विकास कार्य करवाने के लिए जिला पंचायत अधिकारियों ने कार्ययोजना तो तैयार कर ली है, पर विभागीय सूत्रों का कहना है कि राज्य वित्त आयोग व तेरहवें वित्त आयोग के मद में विभाग के पास सात करोड़ रुपये मौजूद ही नहीं हैं। ऐसे में तकनीकी व लेखा विभाग के अफसरों को टेंडर प्रक्रिया को स्वीकृति देने खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि राज्य वित्त आयोग की धनराशि के तहत कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, बीमा आदि का भी भुगतान किया जाता है।

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