चार सदस्यों ने दिया जिपं अध्यक्ष के समर्थन में शपथ पत्र

Lalitpur Updated Sat, 22 Dec 2012 05:31 AM IST
ललितपुर। जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करने वाले जिला पंचायत सदस्यों की एकता में सेंध लग गई है। बीते दिनों अध्यक्ष के खिलाफ शपथ पत्र देने वाले चार सदस्य अब उनके समर्थन में आ गए हैं और प्रशासनिक अधिकारियों को इस संबंध में शपथ पत्र भी सौंप दिए हैं। डीपीआरओ ने शपथ पत्रों की जांच करके जिला शासकीय अधिवक्ता से राय मांगी है।
बीते दिनों समाजवादी पार्टी में सक्रिय भूमिका निभाने वाले जिला पंचायत सदस्य स्वामी प्रसाद यादव, ज्योति सिंह, रामवती, लीलाधर दुबे उर्फ कुल्लू महाराज, सरोज, शिशुपाल सिंह यादव, चंद्रशेखर पंथ, नन्नी दुलैया, खुशराज राजे, पीयूष श्रीवास्तव, मेनका गंधर्व व राकेश कुमार खटीक ने अपनी ही पार्टी के जिला पंचायत अध्यक्ष प्रमोद बड़ौनिया के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था, अविश्वास से पहले एक जिला पंचायत सदस्य के घर बैठकर न केवल शपथ पत्र बनवाए गए थे, बल्कि इन सदस्यों ने हर हाल में एकता बनाए रखने की कसम ली थी। अचानक हुए इस घटनाक्रम ने समाजवादी पार्टी में जिला से लेकर प्रदेश स्तर तक भूचाल ला दिया। उधर, विश्वास में लिए बगैर उठाए गए इस कदम से संगठन ने अपने हाथ खींच लिए, इसके पश्चात नौ सदस्यों ने लखनऊ में डेरा डाल दिया। एक ताकतवर मंत्री के समक्ष इन लोगों ने अपना पक्ष रखा और मंत्री जी ने स्थानीय वरिष्ठ समाजवादी नेताओं से मोबाइल फोन पर बातचीत की। इधर, अध्यक्ष के समर्थन में चल रहे प्रयास रंग लाए और सदस्यों की एकता में सेंध लग गई। जनपद में मौजूद चार सदस्य जिला पंचायत अध्यक्ष प्रमोद बड़ौनिया के पाले में पहुंच गए। बीते रोज जिपं अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास जताने वाले राकेश खटीक, मेनका गंधर्व, ज्योति सिंह व चंद्रशेखर पंथ ने उनके समर्थन में शपथ पत्र जिलाधिकारी रणवीर प्रसाद को सौंप दिए हैं। जिला पंचायत राज अधिकारी की जांच में अविश्वास वाले शपथ पत्रों की तरह समर्थन वाले भी दुरुस्त पाए गए। इन हालातों में जिला पंचायत राज अधिकारी जेबी सिंह ने दिए गए शपथ पत्रों व अविश्वास की तिथि को लेकर जिला शासकीय अधिवक्ता से राय मांगी है। विधिक रायशुमारी के बाद ही प्रशासनिक अधिकारी आगे कोई कदम उठाएंगे।


अविश्वास पर ग्यारह को हो सकता है मतदान
ललितपुर। जिला पंचायत अध्यक्ष और जिला पंचायत सदस्यों के बीच चल रहा लुका छिपी का खेल नियमों के तहत कोई मायने नहीं रखता। शपथ पत्र आने के पश्चात तीस दिन के अंदर सदन में मतदान करवाना अधिनियमित है। सूत्रों का कहना है कि मतदान के लिए ग्यारह जनवरी की तारीख लगभग तय है।
क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम 1961 की धारा 28 के अनुसार अविश्वास से संबंधित शपथ पत्र प्राप्त होने के तीस दिन के अंदर सदन की बैठक बुलाना अनिवार्य होता है। बैठक में अविश्वास की प्रक्रिया पूर्ण कराई जाती है। आवश्यकता होने पर मतदान भी कराया जाता है। इस बैठक की तिथि से पंद्रह दिन पहले सभी सदस्यों को नोटिस भेजना भी आवश्यक है। जिला पंचयात सदस्यों ने चौदह दिसंबर को प्रशासनिक अधिकारियों को अविश्वास का शपथ पत्र सौंपा था। उपरोक्त नियमों के अनुसार अगर देखा जाए तो तेरह जनवरी को एक माह की मियाद समाप्त हो रही है और इस तिथि तक हर हाल में अविश्वास के लिए सदन बुलाया जाना आवश्यक है। सूत्रों का कहना है कि इस बाध्यता को देखते हुए उक्त प्रक्रिया के लिए ग्यारह जनवरी की तिथि निर्धारित कर दी गई है और 28 दिसंबर तक प्रशासनिक अफसर सभी जिला पंचायत सदस्यों को नोटिस भी जारी कर देंगे। अविश्वास पेश कर चुके इन नियमों के जानकार सपाई सदस्य भूमिगत होकर नोटिस का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के चार जिला पंचायत सदस्य इस फूट का फायदा उठाने के लिए बिलकुल शांत बैठे हुए हैं। जानकारों का भी मानना है कि अविश्वास की प्रक्रिया से जिला पंचायत अध्यक्ष प्रमोद बड़ौनिया को जूझना ही होगा।

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