चार दहेज लोभियों को दस -दस वर्ष की कैद

Lalitpur Updated Sat, 22 Dec 2012 05:31 AM IST
ललितपुर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजबहादुर प्रथम ने दहेज हत्या के सात वर्ष पुराने मामले में तत्कालीन एफएसओ समेत चार लोगों को दोषी करार देते हुए दस- दस वर्ष के कारावास की सज़ा सुनाई है। सभी आरोपियों पर अर्थदंड भी लगाया गया है, जिसे अदा न करने पर अतिरिक्त सज़ा का प्रावधान किया गया है।
उरई निवासी तत्कालीन पंचायत सचिव दशरथ सिंह ने अपनी पुत्री माया का विवाह तत्कालीन फायर स्टेशन ऑफीसर मनीराम के पुत्र अखिलेश के साथ छह फरवरी 2000 को किया था। विवाह के कुछ समय बाद दहेज में पचास हजार रुपये की मांग को लेकर माया का ससुराल में उत्पीड़न किया जाने लगा। जनवरी 2004 में ससुरालीजन माया के साथ मारपीट कर उसे मायके उरई छोड़ आए, जहां माया ने परिवार न्यायालय में वाद प्रस्तुत किया, जिस पर उसे पांच सौ रुपये प्रति माह के खर्चे का आदेश कर दिया गया। चौबीस जून 2005 को ससुरालीजन माया को ससुराल ले आए और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में संचालित पुलिस परामर्श केंद्र में समझौता करके आवास पर ले आए। ठीक एक महीने बाद जनपद मुख्यालय स्थित तत्कालीन एफएसओ के सरकारी आवास में माया आग से झुलस गई। कोतवाली में पदस्थ तत्कालीन उपनिरीक्षक महताब सिंह ने एफएसओ के आवास में आग लगने की सूचना दर्ज कराई। इसके बाद अगिभनदग्धा को जिला चिकित्सालय ले जाया गया, जहां तत्कालीन विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट हरनारायण श्रीवास्तव ने उसके मृत्युपूर्व बयान दर्ज किए। इसके बाद अगिभनदग्धा की हालत नाजुक होने की वजह से पिता दशरथ सिंह ने उसे नईदिल्ली स्थित सफदरगंज अस्पताल में भर्ती कराया। दिल्ली में भी अगिभनदग्धा के मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज कराए गए। एक अगस्त 2005 को माया की दिल्ली में उपचार के दौरान मौत हो गई। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे जिला शासकीय अधिवक्ता सुरेश खरे एवं सहायक शासकीय अधिवक्ता बृजेंद्र यादव ने बताया कि पहले इस मामले में पति अखिलेश, ससुर मनीराम, देवर अमित, सास पार्वती एवं ननद संतोषी के खिलाफ धारा 498ए, 326 व दहेज उत्पीड़न अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मामला पंजीकृत कराया गया था। अगिभनदग्धा की मौत के मामले मेंधारा 304बी की बढ़ोत्तरी की गई। तत्कालीन क्षेत्राधिकारी सदर ने विवेचना के दौरान ननद की संलिप्तता नहीं पाई थी। शेष आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट प्रस्तुत की गई। जनपद न्यायालय में शुक्रवार को प्रकरण की निर्णायक सुनवाई हुई।
अदालत में पेश हुए गवाहों, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, अगिभनदग्धा के मृत्यु पूर्व बयानों, अभियोजन पक्ष एवं वादी के अधिवक्ता देवेंद्र कुमार जैन की दलीलों पर गौर करने के बाद जनपद न्यायाधीश ने मृतका के पति, ससुर, देवर एवं सास को धारा 498 ए में दोषी करार देते हुए दो वर्ष का कारावास, पांच हजार रुपया अर्थदंड, दहेज उत्पीड़न की धारा 3/4 में छह माह का कारावास व एक हजार रुपया अर्थदंड तथा धारा 304 बी में दस- दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई है। सुनाई गईं सभी सजाएं साथ- साथ चलेंगी। मौजूदा समय में सभी आरोपी जमानत पर रिहा चल रहे थे। न्यायाधीश के निर्णय के बाद उन्हें कस्टडी में लेकर जिला कारागार भेज दिया गया।

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