तीन सौ चालीस पंचायतों के खाते सीज

Lalitpur Updated Thu, 20 Dec 2012 05:31 AM IST
ललितपुर। विकास कार्यों को दिए गए धन की पाई- पाई का हिसाब लेने के लिए केंद्र व राज्य सरकार सख्त हो गई हैं। पिछले दो वित्तीय वर्षों में राज्य वित्त व 13वें वित्त आयोग के तहत दी गई धनराशि के खर्च का ब्योरा नहीं दिए जाने के कारण जिले की सभी ग्राम पंचायतों के ग्राम निधि प्रथम खाते सीज कर दिए गए हैं, इसकी वजह से ग्राम प्रधानों में खलबली मच गई है।
जनपद में तीन सौ चालीस ग्राम पंचायतें हैं। इन ग्रामीण इलाकों में विकास कार्य करवाने के लिए केंद्र व राज्य सरकार प्रतिबद्ध है, जहां राज्य सरकार राज्य वित्त आयोग के तहत धन देती है वहीं 13वें वित्त आयोग के अंतर्गत केंद्र सरकार धनराशि जारी करती है। ग्राम निधि प्रथम के खाते में यह धनराशि भेजी जाती है और ग्राम प्रधान व सचिव संयुक्त रूप से इस खाते का संचालन करते हैं। इससे ग्रामीण इलाकों में हैंडपंपों की मरम्मत, सड़कों, गलियों व नालियों की मरम्मत कराई जाती है। इसके अतिरिक्त नाली सफाई व नये मार्ग प्रकाश बिंदु आदि भी लगाए जाते हैं। वित्तीय वर्ष 2010-11 एवं 2011-12 में शासन ने सभी ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों व जिला पंचायत को तेरहवें वित्त आयोग के तहत दस करोड़ तथा राज्य वित्त आयोग के तहत सोलह करोड़ रुपये जारी किए हैं। खाते में धन आने के पश्चात ग्राम प्रधानों व ग्राम विकास अधिकारियों ने गांव में विकास कार्य तो करवा दिए लेकिन अब खर्च की गई धनराशि का हिसाब किताब देने में उन्हें पसीना छूट रहा है। पिछले छह माह से शासन बार- बार व्यय धनराशि का ब्योरा उपलब्ध कराने के निर्देश देता आ रहा है, पर जिम्मेदार अफसर इस ओर ध्यान ही नहीं दे रहे हैं। इस हीलाहवाली को देखते हुए शासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है और प्रशासनिक अधिकारियों को हिसाब किताब नहीं देने वाली ग्राम पंचायतों के खाते सीज करने के निर्देश दिए। इधर, प्रशासनिक अधिकारियों ने जिला पंचायत राज अधिकारी व खंड विकास अधिकारियों के साथ बैठक करके जल्द से जल्द खर्च का ब्योरा तलब किया है। काम में तेजी तो आई पर निश्चित समयावधि के अंदर एक भी ग्राम पंचायत उक्त दो वित्तीय वर्षों में कराए गए विकास कार्यों का लेखाजोखा प्रस्तुत नहीं कर सकी। इन हालातों को गंभीरता से लेते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी जेबी सिंह ने सभी तीन सौ चालीस ग्राम पंचायतों का ग्राम निधि प्रथम खाता सीज कर दिया। उन्होंने ब्योरा दिए बगैर खाते के संचालन पर लगी रोक नहीं हटाने की बात कही है।


आन लाइन हो रही फीडिंग
ललितपुर। खर्च पर नजर रखने के लिए भारत सरकार ने आन लाइन फीडिंग के लिए पंचायती राज इंस्टीट्यूसन्स साफ्टवेयर संचालित कर रखा है। राज्य व 13वें वित्त आयोग से मिली धनराशि के खर्च की फीडिंग इस पर अनिवार्य कर दी गई है। कार्य का विवरण, बिल, वाउचर, उपभोग व पूर्ति प्रमाण पत्र सहित विभिन्न महत्वपूर्ण प्रपत्र भी इस साफ्टवेयर पर अपडेट किए जाते हैं।


आडिट आपत्तियों की भरमार
ललितपुर। राज्य वित्त व 13वें वित्त आयोग की धनराशि के खर्च में तमाम खामियां उभरकर सामने आई हैं। आडिट के दौरान एक दो नहीं दर्जनों आपत्तियां उठाई गई हैं, इन्हें दूर करने के लिए विभागीय अधिकारी जुटे हुए हैं।

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