कागजों में सिमटकर रह गई मातृ समिति

Lalitpur Updated Thu, 20 Dec 2012 05:31 AM IST
ललितपुर। हाट कुक्ड योजना को प्रभावी बनाने के मकसद से गठित की गई अधिकांश मातृ समितियां कागजों में सिमटकर रह गई हैं, इसके चलते न तो हाट कुक्ड योजना परवान चढ़ पा रही है और न ही आंगनबाड़ी केंद्रों से संबंधित योजनाओं का व्यापक प्रचार- प्रसार हो पा रहा है।
जनपद में एक हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन हो रहा है। शासन ने केंद्रों पर नामांकित नौनिहालों को पका पकाया भोजन मुहैया कराने के उद्देश्य से हाट कुक्ड योजना बीते सालों में शुरू की। तत्पश्चात योजना को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्रों पर मातृ समितियों का गठन किया गया है, इसमें वार्ड, ग्राम स्तर पर बारह से पंद्रह सदस्य नामित किए गए हैं। समिति के चुने हुए अध्यक्ष को मातृ समिति में सहखातेदार एवं आंगनबाड़ी कार्यकत्री को सचिव नामित कर खातेदार बनाया गया है। यही नहीं, शासन की ओर से दोनों के नाम से खोले गए बैंक खाते में हाट कुक्ड योजना चलाने को समय-समय पर धनराशि भेजी जा रही है। इसके अलावा समिति की मासिक बैठक करने का प्रावधान रखा गया है पर जिले में अधिकांश मातृ समितियां कागजों में सिमटकर रह गई हैं। इन स्थितियों में न ही वजन, कुपोषण, आयोडीन, विटामिन, पोषाहार, स्तनपान, गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सावधानियाें पर चर्चा हो पा रही है। महत्वपूर्ण बात यह है कि विभागीय अफसर समितियों को सक्रिय बनाने के स्थान पर चुप्पी साधे हैं। जानकारों का कहना है कि हाट कुक्ड योजना की आत्मा मातृ समिति हैं। जब तक समितियां सक्रिय नहीं होंगी, तब तक योजनाओं की प्रगति पाना बेहद मुश्किल है।


परिवार के सदस्य बने सहखातेदार
ललितपुर। हाट कुक्ड योजना की धनराशि को ठिकाने लगाने के उद्देश्य से कई कार्यकत्रियों ने मातृ समितियों में अपने परिवार के सदस्य, रिश्तेदार अध्यक्ष बनवाकर सहखातेदार बना लिया है। इसकी बानगी नगर क्षेत्र है। यहां संचालित 142 में से 22 केंद्रों के अध्यक्ष बदले जा चुके हैं। लेकिन, विभिन्न ब्लाकों में अभी भी कार्यकत्रियों के रिश्तेदार व परिवार के सदस्य सहखातेदार बने हुए हैं, जिन्हें न तो हटाया गया और न ही स्पष्टीकरण नोटिस जैसी कार्रवाई अमल में लाई गई।


राशि निकालने में हो रही परेशानी
ललितपुर। विभागीय अफसर अपनी कमियाें को छिपाने के लिए कई प्रकार के हथकंडे अपना रहे हैं। बीते माह में अफसरों ने बैंकों को बिना सहखातेदार के हाट कुक्ड की धनराशि निर्गत नहीं करने को पत्र लिखा है। इस वजह से हाड कुक्ड योजना का संचालन गड़बड़ा गया है।
इस संबंध में कार्यकत्रियों का तर्क है कि बार-बार अध्यक्ष को बैंक ले जाने में उन्हें यात्रा भत्ता का बोझ पड़ रहा है। वहीं, अध्यक्ष बैंक जाने को मनमानी तिथि तय कर रहे हैं, इसके चलते योजना प्रभावित हो रही है। उन्होंने अफसरों से उचित कार्रवाई की मांग की है।

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