तीन आरोपियों को चार-चार वर्ष की कैद

Lalitpur Updated Wed, 19 Dec 2012 05:30 AM IST
ललितपुर। दस्यु प्रभावित क्षेत्र अधिनियम न्यायालय के विशेष न्यायाधीश एडीजे मुकेश प्रकाश ने धौर्रा क्षेत्र में पठानकोट एक्सप्रेस में छह वर्ष पूर्व हुई लूटपाट के बहुचर्चित मामले में तीन आरोपियों को चार-चार वर्ष के कठोर करावास की सज़ा सुनाई है, साथ ही सभी आरोपियों पर अट्ठारह हजार रुपया अर्थदंड भी लगाया है, जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया है।
घटना की पृष्ठभूमि के बारे में अपर जिला शासकीय अधिवक्ता खुशीलाल लोधी ने बताया है कि 22 दिसंबर 2006 को धौर्रा क्षेत्र में 1057 डाउन पठानकोट एक्सप्रेस में लूटपाट की घटना को अंजाम दिया गया था। ट्रेन में सवार यात्री दामोदर पुत्र भागीरथ निवासी ग्राम जमनिया थाना सिवनी मालवा जिला होशंगाबाद मध्य प्रदेश ने झांसी जीआरपी थाने में तहरीर देकर घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसकी जांच जीआरपी ललितपुर को स्थानांतरित की गई थी। धौर्रा स्टेशन के नजदीक हुई इस वारदात में यात्रियों की मदद से जीआरपी, आरपीएफ, टीटी पंकज श्रीवास्तव व रमेश कुमार ने दो बदमाशों को पकड़ लिया। वहीं, एक बदमाश मौके से निकल भागने में कामयाब रहा था। पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से तमंचा, चाकू, मैगजीन व कारतूस भी बरामद किए गए थे। इस दौरान खास बात यह रही कि पकड़े गए आरोपियों ने पहले जीआरपी को अपने नाम क्रमश: भगवान सिंह पुत्र हरीसिंह निवासी ग्राम दुराई थाना भानगढ़ जिला सागर मध्य प्रदेश व अजीत सिंह निवासी ग्राम करौंदा थाना भानगढ़ बताए, लेकिन जांच के दौरान पता चला कि भगवान सिंह का असली नाम भुजबल पुत्र रघुवीर सिंह निवासी ग्राम दूधई थाना पाली एवं अजीत का वास्तविक नाम वीरेंद्र सिंह पुत्र रामसिंह निवासी ग्राम करौंदा थना भानगढ़ है। आरोपियों से पूछताछ के दौरान बंटी उर्फ बंटू उर्फ दीपक पुत्र राजाभैया निवासी ग्राम करौंदा एवं साहब सिंह पुत्र रघुनाथ सिंह निवासी ग्राम करौंदा थाना भानगढ़ के नाम प्रकाश में आए। जीआरपी ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार करके उनके खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट प्रस्तुत की। दस्यु प्रभावित क्षेत्र अधिनियम न्यायालय में मंगलवार को इस प्रकरण की निर्णायक सुनवाई हुई, जहां पेश हुए नौ गवाहों के बयानों, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों व अभियोजन पक्ष की दलीलों पर गौर करने के बाद न्यायाधीश ने अपना निर्णय सुनाया। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि न्यायाधीश ने भगवान सिंह, अजीत सिंह एवं बंटी उर्फ बंटू उर्फ दीपक को आईपीसी की धारा 393 में दोषी करार देते हुए चार-चार वर्ष का कारावास, पांच-पांच हजार रुपया अर्थदंड तथा अर्थदंड अदा न करने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया। भुजबल एवं वीरेंद्र पर आर्म्स एक्ट में दोष सिद्ध होने पर एक- एक वर्ष का कारावास, एक हजार रुपया अर्थदंड का प्रावधान किया गया। शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि चौथे आरोपी साहब सिंह की शिनाख्त नहीं हो पाई थी। इस कारण अदालत ने उसे बरी कर दिया। मौजूदा समय में भुजबल एवं अजीत सिंह जमानत पर रिहा चल रहे थे, जबकि बंटी के खिलाफ वारंट जारी होने के कारण वह जिला कारागार में निरुद्ध चल रहा था।

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