बर्बाद हो रहा नहर का पानी

Lalitpur Updated Mon, 10 Dec 2012 05:30 AM IST
ललितपुर। जहां किसानों फसल की सिंचाई के लिए गोविंद सागर बांध से निकाली गई छोटी नहर का पानी जरूरतमंद किसानों तक नहीं पहुंच पा रहा है, वहीं नहर का लाखों लीटर पानी प्रतिदिन बर्बाद हो रहा है। कारण, कई स्थानों पर पुलिया क्षतिग्रस्त होना और नहर का कटना है।
गोविंद सागर बांध से निकली छोटी नहर नगर क्षेत्र में सिंचाई विभाग कालोनी, आजादपुरा, करीमनगर, भरतपुरा, तुवन मंदिर, हजरत सैय्यद वली बाबा की दरगाह, चांदमारी, राजघाट रोड तक का सफर तय करती है। आवागमन के लिए कई स्थानों पर इस नहर के बीच में पुलियां बनीं हैं। मौजूदा समय में पुलियों की हालत दयनीय हो गई है, इनमें दरारों के साथ बड़े- बड़े गड्ढे हो गए हैं। नहर खुलते ही क्षतिग्रस्त हिस्सों से पानी बहने लगा। यही नहीं, कुछ स्थानों पर नहर की सफाई नहीं होने के कारण नहर के ऊपर से पानी बह रहा है। सिंचाई विभाग ने नहरों को खोलने से पूर्व साफ- सफाई करने व क्षतिग्रस्त पुलियों को सुधारने के दावे तो किए थे, लेकिन नहर में पानी छोड़ते ही हकीकत सामने आ गई। अब इसका खामियाजा उन किसानों को उठाना पड़ रहा है जिनके खेत पुलिया के पास हैं। मौजूदा समय में कई एकड़ भूमि जलमग्न हो गई है। खेतों में किसानों की अंकुरित फसल बरबाद हो गई। नगर दायरे में आने वाले हरदीला, ढिमरौला मुहल्ला के किसानों ने बताया कि नहर चालू करने से पूर्व सिंचाई विभाग को प्रार्थनापत्र देकर उसकी सिल्ट साफ करने व क्षतिग्रस्त पुलिया को सुधारने की मांग की थी, लेकिन अधिकारियों ने लीपापोती करके दी। नगर क्षेत्र के किसानों का आरोप है कि विभाग का रवैया हर बार ऐसा ही रहता है, इस कारण फसल बर्बाद होती हैं। वहीं नहर का पानी अनेक स्थानों पर बह जाने के कारण टेल पर मौजूद किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पाता।


सड़कें भी हो रही बर्बाद
छोटी नहर से अनेक स्थानों पर पानी का रिसाव हो रहा है। क्षतिग्रस्त नहर से लगातार पानी बहने के कारण कई स्थानों पर आरटीओ कार्यालय को जाने वाली सड़क सहित नगर की कई सड़कें उखड़ गईं हैं। खास बात यह है कि संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय पर आला अधिकारियों का यहां आना जाना लगा रहता है, इसके बाद भी नहर की मरम्मत नहीं कराई गई।

बोले किसान
बर्बादी की कगार पर पहुंची फसल
सिंचाई विभाग को नहर की मरम्मत करने के लिए प्रार्थनापत्र दिया था, लेकिन ऐसा नहीं होने से खेत जलमग्न हो रहे हैं। पांच एकड़ में फसल बोई है, लेकिन पानी भरने से वह बर्बादी की कगार पर पहुंच गई है।
पुरुषोत्तम कुशवाहा, किसान

निकलना भी हो रहा मुश्किल
खेतों में गेहूं, चना, मटर की फसल बोई गई है। नहर की पुलिया खराब होने से खेतों में तो पानी भर ही रहा है साथ ही यहां से निकलना भी मुश्किल हो गया है। कई बार तो बच्चे भी दलदल में फंस जाते हैं।
चुन्नू कुशवाहा, हरदीला


अफसर लापरवाह
खेतों में पानी भरने की समस्या नई नहीं है। नहर में पानी छोड़ते ही यह समस्या खड़ी हो जाती है। हर बार खेतों में पानी भरता है और फसल बर्बाद होती है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों को समस्या बताने के बाद भी वह मौके का निरीक्षण नहीं करते हैं।
अमर सिंह वाल्मीकि, झांसीपुरा

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