लापरवाह शिक्षकों को मिला अभयदान

Lalitpur Updated Thu, 06 Dec 2012 05:30 AM IST
ललितपुर। प्रत्येक विद्यालय में कम से कम एक शिक्षक पहुंचाने के उद्देश्य से अपनाई गई समायोजन स्थानांतरण की प्रक्रिया अब सवालों के घेरे में आ गई है। कारण, स्थानांतरण के तीन माह बीत जाने के बाद भी तमाम शिक्षकों ने पूर्व के विद्यालय नहीं छोडे़ । इन हालातों में तमाम स्कूलों का ताला नहीं खुल सका है।
परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की जबरदस्त कमी बनी हुई है। इसे ध्यान में रखकर हर साल मौजूदा शिक्षकों की संख्या में ही पठन-पाठन को सुचारु बनाने के मकसद से जुलाई-अगस्त माह में समायोजन स्थानांतरण की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस वर्ष भी बेसिक शिक्षा कार्यालय में प्रक्रिया जोरशोर से अपनाई। इस दौरान विज्ञान शिक्षकों की तैनाती में विषमता को दूर करने के लिए दो या तीन विज्ञान शिक्षक वाले विद्यालयों का चिह्नींकरण किया गया। तत्पश्चात उन्हें हटाने की कार्रवाई अपनाई गई पर तमाम विद्यालयों में अभी भी एक से अधिक विज्ञान अध्यापक कार्यरत बने हुए हैं। इस वजह से कई विज्ञान शिक्षक-शिक्षिकाओं ने अपने पूर्व के विद्यालय नहीं छोड़े, इनमें जूनियर हाईस्कूल खोखरा, इमलिया, धोवनखोरी, बिरधा, पनारी शामिल हैं। इसके चलते विद्यालयों में विज्ञान शिक्षक नहीं पहुंच सके हैं। कमोवेश यही स्थिति पद शून्य वाले विद्यालयों की है। तमाम विद्यालयों में पद सृजन के अभाव में शिक्षकों को हटाने की कार्रवाई की गई लेकिन, तमाम विद्यालयों से ऐसे शिक्षक नहीं हटाए जा सके हैं।
सूत्रों की माने तो प्राथमिक विद्यालय गुढ़ा के सहायक शिक्षक ने स्थानांतरित विद्यालय में कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। किसरदा के एक शिक्षक का जूनियर विद्यालय नैगुवां में स्थानांतरण हुआ था लेकिन, वह पूर्व के विद्यालय में जमे हुए हैं। प्राथमिक विद्यालय जखौरा के शिक्षक का स्थानांतरण निरस्त कर दिया गया, जबकि प्राथमिक विद्यालय नई बस्ती पड़वा में तैनात शिक्षिका का प्राथमिक विद्यालय पड़वा में संशोधन कर दिया गया। जूनियर हाईस्कूल गुढ़ा के शिक्षक का संशोधन करते हुए उन्हें प्राथमिक विद्यालय लहरैन भेज दिया। तालबेहट के जूनियर हाईस्कूल ककड़ारी में तैनात शिक्षिका स्थानांतरित प्राथमिक विद्यालय तलउआ नहीं पहुंची। बार में जूनियर हाईस्कूल की शिक्षिका यथावत बनी हुई हैं। जूनियर हाईस्कूल देवरान में तैनात शिक्षक ने दिदौरा के विद्यालय पहुंचना उचित नहीं समझा। वस्त्रावन स्कूल के शिक्षक ने भी मर्रोली के विद्यालय में कार्यभार ग्रहण नहीं किया। जूनियर हाईस्कूल खाकरौन की शिक्षिका ने भी स्थानांतरित विद्यालय का मुंह नहीं देखा। विकासखंड बिरधा के जूनियर हाईस्कूल भडरऊ में दो शिक्षकों को भेजा गया था लेकिन, एक ने भी ज्वाइन नहीं किया। जूनियर हाईस्कूल दांवर की एक शिक्षिका को अस्थाई व्यवस्था में भरतपुरा भेज दिया। इसके अलावा खोखरा, बिरारी, पनारी, पिपरियावंशा, अंडेला, खितवांस, बंगरिया के स्कूलों के शिक्षक शिक्षिकाओं ने विभागीय स्थानांतरण को तरजीह नहीं दी है। इस कारण शासन की मंशा को पलीता लग रहा है। दिलचस्प बात यह है कि विभागीय अफसरों ने उनके खिलाफ कार्रवाई करना तो दूर ऐसे शिक्षकों को अभयदान दे दिया है।

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