कूड़ाघर बने शहर के कुएं

Lalitpur Updated Wed, 05 Dec 2012 05:30 AM IST
ललितपुर। हैंडपंप और जेटपंप के युग में अब कुएं लोगों के लिए बेकार हो गए हैं। जिस कुएं ने कई दशकों तक लोगों की प्यास बुझाई, अब उसे नगर के लोगों ने कचरे का डिब्बा बना दिया है। हालांकि कुआं, तालाब, पोखरों को बचाने के लिए तमाम योजनाएं चल रही हैं, लेकिन नगर के कुओं का हाल देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह योजनाएं कितनी कारगर साबित हो रही हैं। नगर के कुओं की बदहाली के लिए अफसर व लोग बराबर दोषी हैं।
सरकारी नलों की टोटियों ने जब तक लोगों को पानी देना शुरू नहीं किया था, तब तक लोग पेयजल के लिए कुओं पर ही निर्भर थे। वर्षा जल संचयन में भी इनकी प्रमुख भूमिका है। इसके चलते शासन द्वारा कुओं को सुरक्षित रखने के लिए समय- समय पर अभियान चलाए जाते हैं। बावजूद इसके नगर के कूपों की हालत खस्ता है। अधिकतर कूपों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। सार्वजनिक उपयोग के कुएं खोजने पर भी दिखाई नहीं देते। गांधीनगर वार्ड नंबर दो में वर्षों पुराने कूप के आसपास लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है। जिसकी वजह से मंदिर जाने वाला रास्ता बंद सा हो गया है। आसपास रहने वाले लोग तो बहुत पढ़े लिखे हैं, लेकिन कूप में घर का कचरा डालना उनकी आदत बन गयी है। इन हालातों में कूप गंदगी से भर गया है और उससे सड़ांध आने लगी है। यही हाल आजादपुरा वार्ड प्रथम नहर के पास, तालाबपुरा, लक्ष्मीपुरा, घुसयाना, आजादपुरा द्वितीय, सिविल लाइन स्थित अनेक कुओं का है। रिसाला मंदिर के पास स्थित कुइया की जगह तो पत्थर रखे हुए हैं। इसके साथ ललित टाकीज के पास का कुआं अब दिखाई भी नहीं देता।


अधिकारियों को नहीं जानकारी
नगर के कूपों की संख्या के संबंध में विभिन्न विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों को जानकारी नहीं है। नगर पालिका परिषद के कर्मचारी तो कूपों को विभागीय दायरे से बाहर का मामला बताते हैं। विकास विभाग के अधिकारी इसे डूडा से संबंधित बताकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।

नेहरूनगर का पेयजल संकट हो सकता हल
नेहरूनगर वार्ड की मेन रोड पर स्थित कुएं के अवशेष अब खत्म हो गए हैं। एक समय था कि जब वार्ड चार व छह के लोग इस कुएं का पानी पीते थे। वर्तमान में मुहल्लावासी पेयजल के लिए दर- दर की ठोकरें खा रहे हैं। कारण, यहां सभी गलियों में पाइप लाइन नहीं डाली गई और हैंडपंप भी खराब पड़े हैं। लोगों का कहना है कि यदि कूप में मोटर डालकर पानी की आपूर्ति की जाए तो नेहरू नगर का पेयजल संकट हल हो सकता है।



इनका कहना है
कुएं के पास अतिक्रमण
कुएं में लोग कचरा डाल रहे हैं। सफाई करने के लिए कई बार नगर पालिका को प्रार्थनापत्र दिए गए, लेकिन सफाई कर्मी नहीं आए। लोगों ने कुएं के किनारों की जमीन पर अवैध कब्जा भी कर लिया है। जिससे मंदिर जाने का रास्ता बंद हो गया है।
मनमोहन चौबे, एडवोकेट गांधीनगर

पीने लायक नहीं पानी
कुएं की मुंडेर नहीं होने के कारण गंदगी भर जाती है, इस कारण यह पानी पीने योग्य नहीं रहता। कुएं में ब्लीचिंग आदि का कभी छिड़काव नहीं किया जाता, इसके पानी से नहाने से लोगों को त्वचा संबंधी रोग हो रहे हैं। अब लोग सिर्फ कपड़ा धोने में ही इसके पानी का प्रयोग कर रहे हैं।
सूरी कुशवाहा, तालाबपुरा प्रथम


बंद करवा दिया कूप
कुएं में मुंडेर न होने से इसमें जानवर व बच्चों के गिरने के कई हादसे हो चुके थे। इस कारण कई साल पहले इस कुएं को दबा दिया गया है। अब लोग पेयजल के लिए नलों व हैंडपंपों का ही सहारा ले रहे हैं।
संजय सोनी, लक्ष्मीपुरा वार्ड 22

कुएं पर देशी शराब का ठेका
कुएं के स्थान पर वर्तमान में देशी शराब का ठेका चलाया जा रहा है। इसके बगल की 12 फीट जमीन भी दबा ली गई है। पेयजल की समस्या हल करने के लिए कई बार आला अधिकारियों को प्रार्थनापत्र दिए गए, लेकिन आज तक कुएं पर ध्यान नहीं दिया गया।
राजकुमार यादव, नेहरूनगर

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