मौके पर ही करनी होगी तौलाई

Lalitpur Updated Mon, 03 Dec 2012 05:30 AM IST
ललितपुर। एनडीपीएस एक्ट के मामलों में बरामद मादक सामग्री के वजन में करीब, लगभग व अनुमानित जैसे शब्दों का प्रयोग अब नहीं चलेगा, बल्कि पुलिस को बरामदगी स्थल पर ही तराजू बांट से उसकी तौलाई करके फर्द में किलोग्राम, ग्राम व मिलीग्राम के हिसाब से सही वजन अंकित करना होगा। डीआईजी झांसी ने इस पर कड़ाई से पालन कराने के लिए रेंज के तीनों पुलिस अधीक्षकों को निर्देश जारी किए हैं।
डीजीपी की ओर से जारी दिशा निर्देशों के अनुपालन में पुलिस उप महानिरीक्षक झांसी परिक्षेत्र एसएन सिंह ने ललितपुर, झांसी एवं जालौन के पुलिस अधीक्षकों को पत्र जारी कर कहा है कि नारकोटिक ड्रग्स व साइकोट्रापिक सब्स्टेन्सेज की बरामदगी के समय बरादगी स्थल पर ही माल का वजन किलोग्राम, ग्राम व मिलीग्राम में ही अंकित किया जाए। आदेश के अनुपालन में पुलिस अधीक्षक जितेंद्र प्रताप सिंह ने जनपद के सभी थानाध्यक्षों को निर्देशित करते हुए कहा है कि एनडीपीएस से संबंधित माल में करीब, लगभग व अनुमानित शब्द का प्रयोग किसी भी दशा में न किया जाए। साथ ही बरामद माल का नमूना लेने, परीक्षण के लिए भेजने, भंडारण व विनिष्टीकरण के लिए भी भारत सरकार, नारकोटिक्स ब्यूरो, सीबीसीआईडी व पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी किए गए दिर्शों का कड़ाई से पालन किया जाए।
एनडीपीएस एक्ट (अमेंडमेंट) एक्ट 2001 के द्वारा एनडीपीएस एक्ट, 1985 की कुछ धाराओं में संशोधन करते हुए दंड का प्रावधान बरामद नारकोटिक ड्रग्स अथवा साइकोट्रापिक सब्स्टेन्सेज (स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ) की मात्रा के अनुसार किया गया है, जिसके तहत बरामद होने वाले नारकोटिक ड्रग्स व साइकोट्रापिक सब्स्टेन्सेज को ‘लघु मात्रा’, ‘वृहद मात्रा’ और ‘वाणिज्यिक मात्रा’, में वर्गीकृत किया गया है। इसमें करीब, लगभग व अनुमानित शब्दों का प्रयोग नहीं किया गया है। विधि विशेषज्ञों का कहना है कि आरोपियों से बरामद होने वाले मादक पदार्थ की मात्रा अपराध की प्रकृति का निर्धारण करती है।
एडीपीएस एक्ट के मामलों की अदालत में सुनवाई भी बरामद हुई मात्रा के हिसाब से की जाती है, मसलन, एक किलोग्राम गांजा व सौ ग्राम तक चरस बरामद होने के मामलों की सुनवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में होती है। इससे अधिक मात्रा में बरामद मादक पदार्थों के मामलों की सुनवाई जनपद न्यायाधीश की अदालत में की जाती है, जहां जमानत न मिलने पर हाईकोर्ट में अपील करनी होती है, लेकिन मौजूदा समय में एनडीपीएस एक्ट के अधिकांश मामलों में एनडीपीएस एक्ट (अमेंडमेंट) एक्ट 2001 के प्रावधानों की अनदेखी की जा रही है। मादक पदार्थ की बरामदकर्ता अधिकारी पदार्थ के वजन को प्रथम सूचना रिपोर्ट में स्पष्ट अंकित न करके करीब, लगभग व अनुमानित शब्दों से काम चलाते थे।



हाईकोर्ट ने भी जताई आपत्ति
ललितपुर। एनडीपीएस एक्ट के विभिन्न मामलों में जब्त किए गए माल का सही वजन अंकित न किए जाने पर उच्च न्यायालय लखनऊ खंडपीठ ने भी आपत्ति की है। उच्च न्यायालय लखनऊ खंडपीठ क्रिमिनल केस नेकपाल उर्फ विनोद सिंह उर्फ लंबुआ बनाम उत्तर प्रदेश राज्य धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट थाना रिसिया जनपद बहराइच द्वारा चरस की मात्रा करीब एक किलो 500 ग्राम अंकित किए जाने एवं मुशीर अहमद उर्फ मुन्ना निवासी प्रीतम नगर थाना घूूमनगंज जनपद इलाहाबाद बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, धारा 8/21 एनडीपीएस एक्ट थाना जैदपुर जनपद बाराबंकी द्वारा जब्त किए गए माल की मात्रा करीब 260 ग्राम अंकित करने पर आपत्ति जताई है।

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