आशा कार्यकत्रियों के ठहरने को बनेंगे आशालय

Lalitpur Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
ललितपुर। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) की विभिन्न योजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाली आशा कार्यकत्रियों की आवश्यकताओं के प्रति शासन गंभीर है। मुख्यालय स्तर पर आशा कार्यकत्रियों के ठहरने को आशालय बनाने का शासन ने निर्णय लिया है। वित्तीय वर्ष 2013-14 के लिए जनपद स्तर पर तैयार की जा रही पीआईपी में इसके लिए प्रस्ताव भी मांगे गए हैं।
दरअसल, गांव- गांव से आशा कार्यकत्रियां गर्भवती महिलाओं को नियमित टीकाकरण, नसबंदी व संस्थागत प्रसव के लिए लेकर सरकारी चिकित्सालय आती हैं। रात्रि के समय प्रसव पीड़ा होने पर उन्हें सुदूर क्षेत्र से मुख्यालय तक जाना पड़ता है, जहां ठहरने के लिए उपयुक्त स्थान न होने की वजह से उन्हें काफी असुविधाओं का सामना भी करना पड़ता है। जनपद में ही विभिन्न इलाकों की आशा कार्यकत्रियां अकेले गांव लौटते समय आपराधिक तत्वों की शिकार बनी हैं। गत आठ नवंबर को लखनऊ में प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, महानिदेशक एनएनआरएचएम की मौजूदगी में आहूत स्वास्थ्य अफसरों की बैठक के दौरान आशा कार्यकत्रियों को ठहरने संबंधी समस्या से निजात दिलाने के लिए मुख्यालय स्तर पर आशालय बनवाए जाने के लिए हरी झंडी दे दी गई, हालांकि इस संबंध में अभी कोई शासनादेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों सेे वित्तीय वर्ष 2012-13 के लिए जनपद स्तर पर तैयार की जा रही पीआईपी में आशालय निर्माण के लिए प्रस्ताव भी मांगे गए हैं, इसकी पुष्टि करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. आरसी निरंजन का कहना है कि जनपद स्तर पर तैयार की जा रही नई पीआईपी में आशालय निर्माण के प्रस्ताव को शामिल कर लिया गया है।
उल्लेखनीय है कि ग्रामीण इलाकों में रहने वाली गरीब जनता को बेहतर व नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए सूबे में सात सितंबर 2005 से राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) की शुरूआत की गई थी, जिसके तहत मातृ एवं शिशु मृत्युदर में कमी लाने के लिए सरकारी चिकित्सालय में संस्थागत प्रसव बढ़ाने के लिए जननी सुरक्षा योजना लागू की गई, इसके साथ ही चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की ओर से लगभग दर्जन भर कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक पहुंचाने के लिए आशा कार्यकत्रियों को गांव- गांव में उतारा गया है। लगभग सभी योजनाओं के क्रियान्वयन में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की गई। आशा कार्यकत्रियों के महत्वपूर्ण योगदान को दृष्टिगत रखते हुए उनकी आवश्यकताओं का विशेष ख्याल रखा जा रहा है।

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