पान किसानों से भी ज्यादा बदहाल है प्रशिक्षण केंद्र

Lalitpur Updated Mon, 05 Nov 2012 12:00 PM IST
पाली / ललितपुर। पान की नगरी पाली में उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा संचालित राजकीय पान उद्योग एवं प्रशिक्षण केंद्र पान कृषकों के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा है। अनुसंधान केंद्र पर व्याप्त अव्यवस्थाओं के कारण शासन की ओर संचालित योजनाएं वर्षों से बदहाल पान किसानों का भला नहीं कर पा रही हैं।
पाली के पान किसानों की दशा सुधारने के लिए शासन ने यहां अनुसंधान केंद्र की स्थापना की थी, जिससे पान किसान खेती के वैज्ञानिक तौर तरीकों से वाकिफ हो सकें। पान के बरेजों में अधिक से अधिक उत्पादन हो सके, लेकिन धरातल पर हालात यह हैं कि ज्यादातर पान किसान पुराने ढर्रे पर ही खेती कर रहे हैं, नतीजतन अत्यधिक मेहनत और लागत के बाद भी उनका मुनाफा लगातार घटता जा रहा है। हालांकि, आठ एकड़ के क्षेत्रफल में स्थापित अनुसंधान केंद्र प्रयोग के तौर पर 52 बरेजें संचालित कर रहा है, जिसकी खेती महज एक चौकीदार एवं महिला कर्मचारी के हवाले हैं। इन्हें बरेजों की देखरेख के एवज में महज 26 सौ रुपये प्रति माह भुगतान किया जाता है। पान अनुसंधान केंद्र के बरेजों में पान प्रयोग के लिए शासन स्तर से कौन सी योजना संचालित की जा रही है? इसकी जानकारी किसी को नहीं है। अनुसंधान पर तैनात अधिकारी एवं वैज्ञानिकों ने पान किसानों को उत्पादन के गुर सिखाने के लिए अब तक एक भी गोष्ठी आयोजित नहीं की। यहां होने वाली पान की नीलामी भी गुपचुप तरीके से कराई जाती है, न तो इसकी स्थानीय स्तर पर मुनादी की जाती है और न ही अखबार में विज्ञप्ति प्रकाशित की जाती है। अनुसंधान केंद्र अब तक ऐसा कोई उदाहरण प्रस्तुत नहीं कर पाया है, जिसे अपनाकर पाली के पान किसान अपनी खेती के स्तर को बढ़ा सकें। नगर पंचायत पाली अध्यक्ष रामकुमार चौरसिया कहते हैं कि वास्तव में अनुसंधान केंद्र पान कृषकों को सही लाभ नहीं दिला पा रहा है, जिससे लाखों रुपये की लागत से निर्मित इस केंद्र का यहां के लोगों को कोई लाभ नहीं पहुंच रहा।


इनका कहना है-
सिखाए जाएं आधुनिक तौर तरीके
पान कृषकों को कृषि के आधुनिक तौर तरीके सिखाएं जाएं, जिसे अपनाकर वे अधिक लाभ पा सकें। समय समय पर किसानों के लिए प्रशिक्षित भी किया जाए।
-कैलाश नारायण चौरसिया ‘पार्षद’
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डिपो की खल रही है कमी
पान के बरेजे तैयार करने में बांस, बल्ली, घास आदि की आवश्यकता पड़ती है, यदि इनकी डिपो चालू की जाए तो समस्या काफी हल हो सकती है।
- पुष्पेंद्र चौरसिया, पान किसान
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योजनाओं के क्रियान्वयन में मनमानी
पान अनुसंधान पर तैनात प्रशिक्षण के अधिकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में मनमानी बरत रहे हैं। सभी किसानों को लाभकारी योजनाओं की जानकारी नहीं दी जा रही हैं, बल्कि कुछ खास लोगों तक लाभ पहुंचाया जा रहा है।
- खेमचंद पटवारी, पान किसान
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अनुसंधान पर रहती ताला बंदी
पान अनुसंधान केंद्र पर अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। अधिकांश समय इसमें तालाबंदी रहती है। केंद्र पर अधिकारियों के दूरभाष नंबर भी अंकित नहीं है और न ही उन योजनाओं की सूची अंकित है, जो यहां संचालित की जा रही हैं।
महेश बढ़ेदा, पान किसान

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