मिड डे मील वार्ड समितियों के जिम्मे

Lalitpur Updated Sat, 27 Oct 2012 12:00 PM IST
ललितपुर। नगर क्षेत्र में मिड डे मील की पुरानी व्यवस्था बहाल कर दी गई है। स्कूलों में अनियमित तथा गुणवत्ता विहीन मध्याह्न भोजन बांटे जाने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने बीएसए को एनजीओ से अनुबंध समाप्त करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। एक नवंबर से योजना के संचालन की जिम्मेदारी एक बार फिर वार्ड समिति के हाथों में आ जाएगी।
मिड डे मील की व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए शासन की ओर से निरंतर प्रयास जारी हैं। पहले नगर में वार्ड समिति एवं ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम प्रधान व शिक्षकों के माध्यम से योजना का संचालन होता था। उदासीनता एवं असहयोग की बात सामने आने पर योजना की व्यवस्था में बदलाव करते हुए नगर क्षेत्र में वार्ड समिति के स्थान पर योजना चलाने की जिम्मेदारी एनजीओ को दे दी गई थी। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्र में बदलाव करके शिक्षकों को मध्याह्न भोजन की जिम्मेदारी दे दी गई थी। नगर क्षेत्र में पंद्रह महीने दिल्ली की एक एनजीओ ने कार्य किया। शुरूआती दौर में एनजीओ ने अध्यापक व बच्चों को संतुष्ट करने का प्रयास किया लेकिन, निर्धारित मात्रा से कम एवं गुणवत्ता विहीन भोजन परोसने से जनप्रतिनिधियों एवं शिक्षकाें में रोष पनपने लगा। कई बार तो शिक्षकाें ने लिखित व मौखिक रूप से अफसरों से शिकायत की। इसके बाद भी एनजीओ संचालक ने अपनी व्यवस्था में सुधार नहीं किया। आखिरकार संचालक को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। जिलाधिकारी रणवीर प्रसाद ने अफसरों के निरीक्षण व शिकायतों को सही मानते हुए एनजीओ के अनुबंध को समाप्त करने के निर्देश बीएसए को दिए। इस पर मिड डे मील सेल ने अनुबंध समाप्त करने की तैयार कर ली है, चूंकि बीएसए इस समय अवकाश पर हैं, इसके चलते संचालक को पत्र निर्गत नहीं हो सका। मिड डे मील समन्वयक कपिल दुबे का कहना है कि बीएसए के हस्ताक्षर होते ही पत्र संचालक को दे दिया जाएगा।


एनजीओ के हाथों में हैं 41 विद्यालय
ललितपुर। इस समय जनपद के 41 विद्यालयों में मिड डे मील एनजीओ परोस रहे हैं। इनमें 24 प्राथमिक, 8 उच्च प्राथमिक विद्यालय एवं 09 माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। लेकिन, जिलाधिकारी के सख्त रुख से अब एनजीओ चंद दिनों का मेहमान रह गया है।


पुराने रसोइयो को मिलेगा काम
ललितपुर। एनजीओ का अनुबंध समाप्त होने पर पुराने रसोइयो को काम मिल सकेगा। चूंकि बीच सत्र में पृथक से रसोइयाें की नियुक्ति का प्रावधान नहीं है, इसलिए विभागीय अफसर पूर्व में तैनात रसोइयाें को काम पर लेने का मन बना रहे हैं, जिससे रसोइयों की नियुक्ति का पेच न फंसे।

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