तत्कालीन तहसीलदार समेत चार पर मुकदमा

Lalitpur Updated Mon, 22 Oct 2012 12:00 PM IST
ललितपुर। दैलवारा क्षेत्र के दो वर्ष पुराने भूमि स्वामित्व विवाद में तत्कालीन तहसीलदार चंद्रप्रकाश उपाध्याय को न्यायालय ने जांच रिपोर्ट बदलने का दोषी पाया है। न्यायालय के आदेश पर तहसीलदार सहित चार लोेगों के विरुद्ध थाना कोतवाली में मामला दर्ज किया गया है।
ग्राम दैलवारा निवासी रामचरन उर्फ सतनाम ने दो वर्ष पूर्व परगनाधिकारी न्यायालय में भूमि के स्वामित्व से संबंधित वाद प्रस्तुत किया था, जिसमें परगनाधिकारी ने तत्कालीन तहसीलदार को मामले आख्या प्रेषित करने को कहा था। तत्कालीन तहसीलदार ने अपनी आख्या कुछ इस प्रकार दी, ‘राजस्व निरीक्षक से विवाद की जांच कराई गई, जिससे स्पष्ट है कि प्रतिवादी आम रास्ते को संकरा कर रहे हैं। इस प्रकार शिकायत किसी सीमा तक सत्य होने के कारण 133 सीआरपीसी केतहत कार्रवाई वांछित है।’ आरोप है कि बाद में तत्कालीन तहसीलदार ने अभियुक्तगणों के साथ मिलकर पहली आख्या में हेरफेर करके उसे इस तरह परिवर्तित कर दिया, ‘राजस्व निरीक्षक से जांच कराई गई, आख्या से स्पष्ट है कि दोनों पक्ष आम रास्ते को संकरा कर रहे हैं। इस प्रकार शिकायतकर्ता की बात हिसी हद तक सत्य न होने के कारण 133 सीआरपीसी की कार्रवाई वांछित है।’ इसके बाद शिकायतकर्ता रामचरन के विरुद्ध कार्रवाई कर दी गई। न्यायालय में सत्र परीक्षण के दौरान इसका खुलासा होने पर न्यायाधीश ने कहा कि तत्कालीन तहसीलदार ने विपक्षियों से साठगांठ करके अपनी आख्या 30 सितंबर 2000 में हेराफेरी करके उन्हें लाभ पहुंचाने के लिए जांच आख्या में कूटरचना की है, जिसे गंभीरता से लेते हुए न्यायाधीश ने कोतवाली प्रभारी को संबंधितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर विवेचना के आदेश दिए, इसके अनुपालन में कोतवाली पुलिस ने तत्कालीन तहसीलदार के अलावा अमान, लंपू एवं भुवन निवासीगण ग्राम दैलवारा के खिलाफ आईपीसी की धारा 218, 466, 471, 474, 120 बी के तहत मामला पंजीकृत कर लिया।


वीडीओ समेत चार पर एफआईआर के आदेश
ललितपुर। तालबेहट अंतर्गत ग्राम म्यांव में कम्प्यूटर शिक्षक का जॉब कार्ड बनाकर मनरेगा के तहत मजदूरी हड़पने के मामले में सीजेएम ने तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी, तकनीकी जेई, प्रधान एवं रोजगार सेवक के खिलाफ एफआईआर के आदेश कर दिए हैं।
ग्राम म्यांव निवासी मोहन सिंह ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 156 (3) केतहत प्रार्थना पत्र दे कर बताया कि गांव में मनरेगा योजना के तहत विभिन्न कार्य कराए गए थे। गांव के रोजगार सेवक ने अपने भाई का जॉब कार्ड बनाकर उसके नाम से एक नवंबर 2009 को नौ दिन, दो नवंबर 2011 को चौदह दिन कु ल 49 दिन का कार्य अभिलेखों में दर्ज करके भुगतान निकालकर हड़प कर लिया था, जबकि रोजगार सेवक के भाई ने कोई कार्य नहीं किया और उस अवधि में वह माताटीला स्थित एक कालेज में संविदा पर कंप्यूटर शिक्षक के रूप में कार्यरत था। 11 जुलाई 2011 को इस संबंध में जिलाधिकारी को शिकायती पत्र दिया गया, जिस पर खंड विकास अधिकारी ने सात अप्रैल 2012 को मुख्य विकास अधिकारी को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में शिकायत को सही करार दिया था। बाद में पूर्व प्रधान, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी ने आरोपी से साठगांठ कर मजदूरी की धनराशि को मनरेगा के खाते में जमा कराकर रोजगार सेवक को सेवा से पृथक कर दिया। शिकायतकर्ता मोहन सिंह ने आरोप लगाया कि खंड विकास अधिकारी ने आरोपियों को आपराधिक कार्यवाही से बचाने के लिए जांच रिपोर्ट को तोड़मरोड़ कर प्रस्तुत की, जिसके लिए वह भी इस मामले में आईपीसी की धारा 120 बी के दोषी हैं। आरोपों को गंभीरता से लेते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने संबंधित थानाध्यक्ष को एफआईआर दर्ज कर विवेचना के आदेश जारी कर दिए हैं।

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