स्मृति दिवस पर याद किया जवानों का बलिदान

Lalitpur Updated Mon, 22 Oct 2012 12:00 PM IST
ललितपुर। पुलिस स्मृति दिवस के मौके पर पुलिस लाइंस प्रांगण में शहीद स्मारक के समक्ष परेड का आयोजन किया। एक सितंबर 2011 से 31 अगस्त 2012 तक कर्तव्य वेदी पर अपने प्राणों की आहुति देने वाले पुलिस कर्मचारियों व अधिकारियों को श्रद्धांजली अर्पित की गई।
पुलिस अधीक्षक जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि 21 अक्तूबर 1959 को भारत की उत्तरी सीमा लद्दाख में पंद्रह हजार फीट ऊंचे बर्फीले पर्वत पर तैनात केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान अपने नियमित गश्त पर थे, उसी समय चीन के सैनिकों ने उन पर हमला कर दिया। दस वीर जवानों ने देश की रक्षा की खातिर अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। उनके समर्पण और शौर्य को याद रखते हुए देश भर में 21 अक्तूबर पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिसमें वर्ष के अंत तक शहीद होने वाले जवानों के बलिदान को याद किया जाता है। उन्होंने बताया कि गत एक वर्ष में प्रदेश के 135 पुलिस अधिकारियाें एवं कर्मचारियों ने कर्तव्य वेदी पर अपने प्राणों को न्योछावर किया है, इनमें एक निरीक्षक, 12 उपनिरीक्षक, सात उपनिरीक्षक विशेष श्रेणी, दो उपनिरीक्षक (एम), एक सहायक उपनिरीक्षक (एम), 12 मुख्य आरक्षी, पांच आरक्षी मुख्य चालक एवं 95 आरक्षियों के नाम शामिल हैं। सभी मौजूद पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों ने शहीदों के बलिदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्घासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर अपर पुलिस अधीक्षक दयाराम सरोज, क्षेत्राधिकारी सदर एसके शुक्ल, प्रतिसार निरीक्षक जटाशंकर राव, एलआईओ प्रभारी डीएन वर्मा, कोतवाली प्रभारी उदयभान सिंह यादव सहित समस्त राजपतित्र अधिकारी, पुलिस लाइंस के जवान, पीएसी बल एवं कार्यालय में नियुक्त सभी कर्मचारी मौजूद रहे। स्मृति परेड की समस्त व्यवस्थाएं प्रतिसार निरीक्षक ने की।
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पुलिस कर्मियों में बढ़ रहा जान देने का जज्बा
ललितपुर। पुलिस के बारे में भले ही लोगों की धारणा कुछ अलग हो, लेकिन समाज में सुरक्षा एवं सद्भाव की भावना जीवंत रखने लिए पुलिस के जवानों अपने प्राणों की परवाह नहीं की। महत्वपूर्ण बात यह है कि तमाम राजनीतिक एवं सामाजिक परिवर्तनों के बीच उत्तर प्रदेश पुलिस के जवानों में कर्तव्य की वेदी पर जान न्यौछावर करने का जज्बा साल-दर-साल बढ़ता जा रहा है।
कर्तव्य वेदी पर जान न्यौछावर करने वालों में आरक्षियों की संख्या सबसे अधिक है, उनके अलावा सूबे की जनता में सुरक्षा की भावना जाग्रत रखने निरीक्षक, उपनिरीक्षक एवं मुख्य आरक्षियों के अलावा आशुलिपिक, एएसआईएम और चालकों ने भी अपनी जान की परवाह नहीं की। एक सितंबर 2009 से 31 अगस्त 2010 तक प्रदेश में 99 पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने अपने प्राणों की आहुति देकर कर्तव्यनिष्ठा की मिशाल पेश की थी, इनमें सबसे अधिक 71 आरक्षी कर्तव्य की वेदी पर शहीद हुए, वहीं 12 उपनिरीक्षक, 01 एसआई आशुलिपिक, 01 गुल्मनायक, 01 एएसआईएम, 06 मुख्य आरक्षी, 01 फायर सर्विस चालक, 06 आरक्षी चालकों ने अपने प्राणों की आहुति दी। एक सितंबर 2010 से 31 अगस्त 2011 तक प्रदेश में कर्तव्य की खातिर जान देने वालों की संख्या बढ़कर 112 हो गई, जिनमें सबसे अधिक 81 आरक्षी शहीद हुए, वहीं, 02 निरीक्षक, 11 उपनिरीक्षक, 03 उपनिरीक्षक एम, 01 उपनिरीक्षक एमटी, 01 प्रधान परिचालक, 01 मुख्य आरक्षी प्रो., 08 मुख्य आरक्षी, 04 आरक्षी चालक शहीद हुए। एक सितंबर 2011 से 31 अगस्त 2012 तक कर्तव्य की वेदी पर प्राण न्यौछावर करने वालों की संख्या 135 हो गई, जिनमें सबसे अधिक 95 आरक्षी शहीद हुए, वहीं 1 निरीक्षक, 12 उपनिरीक्षक, 7 उपनिरीक्षक विशेष श्रेणी, 02 उपनिरीक्षक (एम), 01 सहायक उपनिरीक्षक (एम), 12 मुख्य आरक्षी एवं 05 आरक्षी मुख्य चालकों ने अपने प्राणों की आहुति दी, जिनके बलिदान को पुलिस स्मृति दिवस पर प्रदेश भर में याद किया गया।

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