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साढ़े सात हजार एकड़ भूमि सिंचित करेगा बांध

Lalitpur Updated Sat, 13 Oct 2012 12:00 PM IST
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ललितपुर। हवाई सर्वेक्षण में उभरी तकनीकी खामी के कारण भले ही जमड़ार बांध परियोजना को रद करने का निर्णय सिंचाई मंत्री ने ले लिया हो पर विभागीय आला अधिकारी अभी भी योजना की उपयोगिता बताने में जुटे हुए हैं, इसी क्रम में योजना की अन्य विशेषताओं समेत बांध से सिंचित होने वाली भूमि का लेखाजोखा शासन को सौंपा गया है।
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बुंदेलखंड में बांध का निर्माण पहाड़ी नदियों व नालों पर किया जाता है, किसी भी बांध परियोजना को स्वीकृति मिलने से पहले कई चरणों में अधिकारी उसकी उपयोगिता का अध्ययन करते हैं। लगभग दस वर्षों की बारिश के आंकड़ों को आधार बनाकर नदी व नाले में बहने वाले कुल पानी के भी आंकड़े तैयार किए जाते हैं। कम बारिश में भी पर्याप्त पानी की उपलब्धता होने पर ही सिंचाई विभाग के अफसर बांध निर्माण को हरी झंडी देते हैं। मड़ावरा स्थित क्योलारी गांव में जमड़ार नदी व बफरा नाला पर कई महीने पहले किए गए शोध के बाद बांध का 2008 में निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ। 185.43 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन इस बांध परियोजना के डूब क्षेत्र व नहर बनाने के लिए 905 हेक्टेयर भूमि आपसी समझौते से अधिग्रहीत की जाने लगी। बम्हौरी बहादुर सिंह, असौरा, क्लोलारी, टीकरी, रुकवाहा, खतौरा, खिरिया भारंजू, खिरिया, कुम्हैड़ी. गुढ़ा, अगौरा, पाली, बैसर्रा, पड़वा, धवारी के आंशिक हिस्से डूब क्षेत्र में आ गए। 271 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत करके विभागीय अधिकारियों ने किसानों को मुआवजा भी दे दिया और साठ करोड़ रुपये स्पिलवे, नहर निर्माण तथा मुआवजा वितरण में खर्च कर दिया। बांध निर्माण के पश्चात रबी व खरीफ में उक्त ग्रामीण इलाकों की 7,758.27 एकड़ भूमि की सिंचाई होनी थी। इस लिहाज से तो जमड़ार बांध परियोजना जनपद के लिए काफी उपयोगी नजर आती है और क्षेत्रीय किसान टकटकी लगाकर इसके पूर्ण होने का इंतजार कर रहे हैं । बीते दिनों सिंचाई मंत्री के हवाई सर्वेक्षण ने योजना की हवा निकाल दी। शासन ने भी योजना से संबंधित अभिलेख तलब किए, जिसके बाद सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने निर्माण कार्य प्रारंभ करने से पूर्व वर्षा, नदी, नाला व पानी की उपलब्धता से संबंधित अध्ययन की रिपोर्ट शासन को सौंप दी। अफसरों का मानना है कि अभिलेखों के अध्ययन के पश्चात परियोजना को लेकर सकारात्मक स्थितियां पैदा होंगी।

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