क्षेत्रपाल मंदिर में रही धार्मिक कार्यक्रमों की धूम

Lalitpur Updated Thu, 04 Oct 2012 12:00 PM IST
ललितपुर। क्षेत्रपाल मंदिर प्रांगण में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य सुधासागर जी महाराज का 30वां दीक्षा समारोह श्रद्धा के साथ मनाया गया। मुनिश्री के दीक्षा दिवस पर देश के विभिन्न प्रांतों से आए हजारों भक्तों ने भाग लिया। इस मौके पर धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही।
बुधवार का दिन जैन धर्मावलंबियों के लिए बेहद खास रहा, आज के ही दिन मुनि सुधासागर जी महाराज ने तीस वर्ष पूर्व आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से मुनि दीक्षा प्राप्त की थी। क्षेत्रपाल मंदिर प्रांगण में आयोजित दीक्षा समारोह में मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र व गुजरात आदि प्रांतों से आए हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रतिभाग किया। सुबह जैसे ही मुनिश्री के संघ का मंच पर आगमन हुआ समूचा परिसर उनके जयकारों से गुंजायमान हो उठा। राजस्थान से आए राणा परिवार ने मुनिश्री का पाद् प्रच्छालन किया। आरके मार्बल परिवार ने शास्त्र भेंट किए। आरती का सौभाग्य पहाड़िया परिवार को प्राप्त हुआ। इसके बाद राजस्थान के श्रृद्धालुओं के मंगलाचरण नृत्य ने सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया। जबलपुर की सौम्या जैन ने नृत्य नाटिका प्रस्तुत कर कन्या भ्रूण हत्या रोकने का संदेश दिया। वीरांगना छाबड़ा बैंड की प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। देर शाम तक क्षेत्रपाल मंदिर में विविध धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम चलते रहे।
आयोजन को सफल बनाने में सवाई सिंघई अजित खजुरिया, इंजीनियर अनिल जैन अंचल, डा. संजीव कड़ंकी, अनिल जैन, अखिलेश गदयाना, पंकज मोदी पार्षद, महेंद्र सिंघई पार्षद, शीलचंद अनौरा, डा. अक्षय टड़ैया, नरेंद्र कड़ंकी, विनोद कामरा, जिनेंद्र जैन, महेंद्र मड़वैया, सुरेश बड़ेरा, अजय बरया, शीलचंद, मनोज बबीना, सनत खजुरिया, नीरज मोदी, सुनील कौशल, अनूप कैरू, गेंदालाल सतभैया, पवन पंडित, राजेश, प्रदीप जैन सतरवांस, चक्रेश जैन, मुकेश, रत्नप्रभा, रमेश नीलकमल, गजेंद्र मोदी, कल्यान चंद, निर्मल पारौल, मुकेश भाईजी, निहाल, संजय, पदमचंद, राजेंद्र थनवारा, राजकुमार, वीरचंद सर्राफ, प्रभात, उदयचंद, अशोक, भागचंद, कैलाश दिनेश, कोमलचंद के अलावा बाल ब्रह्मचारी विनोद भैया, बाल ब्रह्मचारी प्रदीप भैया सुयश अशोकनगर, चन्द्रसेन कवि भोपाल व दिगंबर जैन पंचायत समिति, चार्तुमास समिति एवं स्वयंसेवी संस्थाओं का विशेष योगदान रहा।

दीक्षा दिवस नहीं गुरुकृपा दिवस: मुनिश्री
ललितपुर। दीक्षा दिवस समारोह को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने कहा दीक्षा दिवस को कुछ लोग संयम दिवस कहते हैं तो कुछ अहिंसा दिवस, लेकिन मेरे लिए तो यह गुरूकृपा दिवस है। गुरू की दृष्टि उस शिल्पी की तरह होती है, जो पाषाण में योग्यता देखकर उसे ऊंचाइयों को छूने वाला बना देता है। ऐसे ही गुरु दीक्षा देकर भक्तों को मोक्ष के मार्ग पर ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि दिगंबर दीक्षा पाते ही परम करुणा व दया प्रकट हो जाती है।


जय कुमार से मुनि सुधासागर बनने का सफर
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वर्ष 1958 जनपद सागर अंतर्गत इशुरवारा निवासी श्रीचंद के पौत्र व ऋषभ जैन के पुत्र के रूप में जय कुमार का जन्म।
वर्ष 1980 आचार्य श्री विद्यासागर जी से क्षुल्लक दीक्षा लेकर परम सागर बने।
वर्ष 1983 आचार्य श्री से जैनेश्वरी दीक्षा लेकर बने मुनि सुधासागर महाराज।
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सम्मानित हुए गृहस्थ
जीवन के पिता एवं भाई
ललितपुर। मुनि सुधासागर जी महाराज के 30वें दीक्षा समारोह में उनके गृहस्थ जीवन के पिता ऋषभ जैन एवं भाई रूपचंद जैन ने भी प्रतिभाग किया। देश भर के श्रद्धालुजनों को मुनिश्री की भक्ति में लीन देख उनके पिता एवं भाई भावविभोर हो गए। दिगंबर जैन पंचायत समिति ने मुनिश्री के पिता एवं भाई को सम्मानित किया।
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दस दिन में बदल दिया मुनिश्री ने जीवन
ललितपुर। क्षेत्रपाल मंदिर में चातुर्मास के दौरान पयूर्षण महापर्व पर मुनिश्री सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में दस दिवसीय श्रावक संस्कार शिविर में शामिल हुए श्रावकों ने भक्तिभाव के साथ अपने अनुभव व्यक्त किए।
श्रावकों ने मुनिश्री को जीवन में परिवर्तन लाने वाले संत बताते हुए कहा कि संस्कार शिविर के माध्यम से मुनि श्री ने दस दिन में जीवन बदल दिया, उन्होंने व्यसनों से दूर रहने की सीख देते हुए युवा वर्ग को नई राह दिखाई है।


मुनि श्री ने किया संस्कारित
मुनिश्री ने शिविर में हम लोगों को नैतिक एवं धार्मिक स्तर पर संस्कारित किया है। आत्मा से परमात्मा बनने की कला सिखाई। मुनिश्री ने शिविरार्थियों का जीवन ही बदल दिया।
विनोद जैन, जबलपुर (म.प्र.)।


सच होती है मुख से निकली बात
मेरा यह 21वां शिविर है। मुनि श्री सदी के ऐसे संत हैं, जिन्होंने युवा पीढ़ी की दशा और दिशा बदल दी। व्यसन मुक्ति की पहल का असर मध्य प्रदेश और राजस्थान में देखने को मिला है। इनके मुख से निकली हर बात पूरी होती है।
विजय कुमार धुर्रा, अशोकनगर (म.प्र.)।

दर्शन के क्षेत्र में मिला ज्ञान
12 वर्ष की उम्र से मुनिश्री के सानिध्य में दर्शन के क्षेत्र में बहुत कुछ पा लिया है। पहली बार राजस्थान में श्रावक संस्कार में भाग लिया था तथा जीवन मूल्य वसिंद्धात सीखे।
हुकुमचंद काका, कोटा राजस्थान।


प्रत्येक शिविर में लिया भाग
पहली बार सूरत में मुनिश्री का आशीर्वाद मिला था। जीवन में धर्म का प्रवेश श्रावक संस्कार शिविर के माध्यम से हुआ, तब से जहां भी शिविर लगता है, वहां जरूर जाता हूं।
संजय गदिया, सूरत गुजरात।
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