जिले में एमकाम, एमएससी की कक्षाएं नहीं

Lalitpur Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
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ललितपुर । 1974 में जनपद का दर्जा पा चुके ललितपुर के किसी भी डिग्री कालेज में वाणिज्य एवं विज्ञान संकाय की परास्नातक कक्षाएं नहीं हैं। यही नहीं 1981 में संचालित हुए रघुवीर सिंह राजकीय महाविद्यालय की स्थापना को पूरे 31 वर्ष गुजर गए पर शासन ने यहां भी परास्नातक कक्षाएं शुरू नहीं कीं। यह हालात जिले के लिए शर्मनाक हैं।
जिले में खेतीबाड़ी प्रमुख पेशा होने की वजह से सिंचाई के संसाधनों को मजबूत किया गया पर माध्यमिक व उच्च शिक्षा के ढांचे को जस का तस छोड़ दिया गया। मौजूदा समय में जनपद में सिर्फ सात डिग्री कालेज संचालित हैं और किसी में भी विज्ञान और वाणिज्य संकाय की परास्नातक कक्षाएं संचालित नहीं हैं। पूरे 31 वर्ष पूर्व 1981 में प्रारंभ हुए रघुवीर सिंह राजकीय महाविद्यालय में बीकाम व बीएससी की कक्षाएं संचालित हुई थीं, फिलहाल बीएससी में यहां रसायन, जीव विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, भौतिक शास्त्र व गणित पढ़ाई जाती है। वहीं, बीकाम में छात्र- छात्राओं को तय विषय पढ़ाए जाते हैं। डिग्री कालेज में भवन मैदान आदि की सभी सुविधाएं मौजूद होने के बावजूद यहां दोनों विषयों की परास्नातक कक्षाएं प्रारंभ करने की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उच्च शिक्षा के मामले में जनपद के हालातों को देखते हुए कालेज प्रशासन ने कई बार शासन व प्रशासन का इस ओर ध्यान आकर्षित किया पर हालातों में कोई बदलाव नहीं हो सका, जिसका खामियाजा वर्षों से छात्र- छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है।

पलायन कर रहे छात्र- छात्राएं
ललितपुर। बीकाम व बीएससी उत्तीर्ण करने के बाद एमएससी तथा एमकाम में प्रवेश लेने के इच्छुक छात्र- छात्राओं के समक्ष सिर्फ एक विकल्प बचता है, वह है पलायन। हर वर्ष दर्जनों छात्र- छात्राएं झांसी, ग्वालियर, सागर, इंदौर आदि जनपदों में जाकर अपनी पढ़ाई जारी रखने को मजबूर हैं। आर्थिक रूप से अक्षम छात्र- छात्राएं मन मसोस कर अपनी शिक्षा को बीच में ही बंद कर देते हैं, इससे शर्मनाक स्थिति और कोई हो नहीं सकती है।

डीएम के पत्रों का नहीं लिया संज्ञान
ललितपुर। शासन के समक्ष प्रशासन की भी एक नहीं चलती। इसकी नजीर उच्च शिक्षा के हालात हैं। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए पिछले कई जिलाधिकारियों ने रघुवीर सिंह राजकीय महाविद्यालय में परास्नातक कक्षाएं प्रारंभ करने के लिए शासन को अनगिनत पत्र लिखे लेकिन कक्षाएं शुरू होना तो दूर एक पत्र का भी जवाब नहीं आया।

जालौन, चरखारी को पंद्रह वर्ष पहले मिल गई थी मान्यता
ललितपुर। ललितपुर व आसपास के अन्य जनपदों में शिक्षा के विकास को लेकर शासन के नजरिए में बड़ा फर्क देखने को मिला है। इसका उदाहरण है जालौन व चरखारी स्थित राजकीय डिग्री कालेज। दोनों की स्थापना रघुवीर सिंह राजकीय डिग्री कालेज के साथ हुई थी। बावजूद इसके उनको 15 वर्ष पूर्व परास्नातक की मान्यता मिल गई और यहां कागजी घोड़े ही दौड़ रहे हैं।
जनपद की ध्वस्त उच्च शिक्षा के लिए काफी हद तक शासन ही जिम्मेदार है। ढांचे को मजबूत करने के बजाए शासन स्तर पर बैठे आला अधिकारी इस जनपद के साथ सौतेला व्यवहार वर्षों से करते चले आ रहे हैं, जिसकी वजह से यहां के छात्र- छात्राओं को अन्य जनपदों में प्रवेश लेने के लिए दर- दर की ठोकरे खाने को मजबूर होना पड़ता है। गौरतलब है कि वर्ष 1981 के दौरान शासन ने ललितपुर जनपद में रघुवीर सिंह राजकीय महाविद्यालय के साथ जालौन व चरखारी में भी एक- एक डिग्री कालेज शुरू किया था। जालौन व चरखारी में स्थापित राजकीय डिग्री कालेजों को पंद्रह वर्ष पूर्व 1997 में ही परास्नातक कक्षाएं संचालित करने की अनुमति शासन ने दे दी थी। बावजूद इसके रघुवीर सिंह राजकीय महाविद्यालय में परास्नातक कक्षाओं की शुरूआत पर शासन ने ध्यान नहीं दिया। पिछले 31 वर्षों से शासन के इस सौतेलपन का दंश जनपद के साथ- साथ डिग्री कालेज का स्टाफ भी झेल रहा है।

इनका कहना है
जनपद में उच्च शिक्षा के हालात बहुत ही दयनीय है। इस संबंध में शासन स्तर पर आला अधिकारियों से बातचीत की जाएगी। एमएससी व एमकाम की कक्षाएं रघुवीर सिंह कालेज सहित जनपद के सभी राजकीय डिग्री कालेजों में संचालित करवाने के लिए वे पूरा प्रयास करेंगे।
रमेश कुशवाहा
सदर विधायक

इनका कहना है
जनपद में उच्च शिक्षा के हालातों से वे वाकिफ हैं और सुधार के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। कुछ अड़चने थी जो अब दूर हो गई हैं। अगले शिक्षण सत्र से रघुवीर सिंह कालेज के साथ जनपद के विभिन्न राजकीय डिग्री कालेजों में परास्नातक कक्षाएं संचालित करवा दी जाएंगी।
प्रदीप जैन आदित्य
केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री

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