मनरेगा: कार्यों की होगी खुर्दबीनी पड़ताल

Lalitpur Updated Fri, 17 Aug 2012 12:00 PM IST
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ललितपुर। महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार योजना में बड़े पैमाने पर हुए घालमेल को लेकर शासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। प्राथमिक जांच में खामियां पाए जाने पर अपर जिलाधिकारी द्वारा विकास विभाग के अफसरों व कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई थी। इस मामले की विस्तृत जांच के लिए आगामी 23 अगस्त को मुख्य प्राविधिक परीक्षक के साथ एक टीम आ रही है, जो तीन दिन रुककर बारीकी के साथ जांच करेगी।
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लगातार मिल रहीं शिकायतों के पश्चात तत्कालीन जिलाधिकारी निधि केसरवानी ने अपर जिलाधिकारी महेश प्रसाद, उप जिलाधिकारी सदर गोरेलाल शुक्ल व वरिष्ठ कोषाधिकारी धीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव को मनरेगा के कार्यों की जांच का जिम्मा सौंपा था। पड़ताल के दौरान अफसरों को वर्ष 2009-10 में जैरवारा- टोरिया में हुए आदर्श तालाब निर्माण एवं वृक्षारोपण की जांच में गंभीर कमियां पाई गईं थीं। चार लाख के शासकीय धन का व्यापक पैमाने पर दुरुपयोग उजागर हुआ था, यही नहीं तालाब की भूमि पर अफसरों को लहलहाती हुई फसल मिली थी। इसके अलावा अंधियारी, थनवारा, टौरिया, बुढ़वार, रसोई व राखपंचमपुर गांव में मनरेगा के अभिलेख गड़बड़ मिले थे। काम मांगने के रजिस्टर व जाबकार्डों में व्यापक कमियां थीं, कार्य स्थल पर प्रारंभ व समाप्ति की तिथि अंकित नहीं थी। अपर जिलाधिकारी की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने तत्कालीन परियोजना निदेशक डीआरडीए राजीव लोचन पांडेय, जैरवारा टोरिया प्रधान सरोज राजा, ग्राम पंचायत अधिकारी मनोज सोनी, खंड विकास अधिकारी अजय कुमार एवं अन्य अज्ञात के विरुद्ध धारा 420, 467, 468, 471, 409, 120 बी एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7/13 के तहत मामला पंजीकृत कर लिया था। उधर, तत्कालीन जिलाधिकारी ने टीएसी जांच की संस्तुति शासन से की थी। इस मामले में अब शासन गंभीर हो गया है। कार्यों की जांच के लिए मुख्य प्राविधिक परीक्षक कुलभूषण के नेतृत्व में मेरठ व इलाहाबाद मंडल के अधिशासी अभियंता ग्राम्य विकास के साथ विभिन्न अफसरों का एक दल जनपद में भेजा जा रहा है, जो आगामी 23 से लेकर 25 अगस्त तक दर्शाई गई खामियों की जांच करेगा।
हिरासत में लिए गए थे परियोजना निदेशक
ललितपुर। इस मामले में ही तत्कालीन परियोजना निदेशक राजीव लोचन पांडेय को कोतवाली पुलिस ने उनके सरकारी आवास से हिरासत में ले लिया था और कई घंटे की पूछताछ के दौरान देर रात्रि उन्हें रिहा किया गया था। विकास विभाग के आला अफसरों के साथ सैकड़ों कर्मचारी कोतवाली में इकट्ठा हो गए थे और परियोजना निदेशक को रिहा करने के लिए प्रदर्शन व नारेबाजी भी की गई थी।
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