दो चिकित्सकों के जिम्मे है 80 पलंग का महिला अस्पताल

Lalitpur Updated Wed, 15 Aug 2012 12:00 PM IST
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ललितपुर। जनपद मुख्यालय स्थित जिला महिला चिकित्सालय में चिकित्सकों एवं पैरा मेडिकल स्टाफ का जबरदस्त अभाव है। 80 पलंग वाले इस अस्पताल की जिम्मेदारी दो चिकित्सकों के कंधों पर है। गत सप्ताह एक साथ चार चिकित्सकों के तबादले हो जाने से संस्थागत प्रसव भी नहीं हो पा रहे हैं। आलम यह है कि अब तक 35 से अधिक गर्भवती महिलाओं को प्रसव किए बगैर लौटाया जा चुका है।
जिला महिला चिकित्सालय में दस चिकित्सक, दस स्टाफ नर्स, पांच सिस्टर, आठ आया/ वार्ड ब्याय व आठ स्वीपर के पद स्वीकृत हैं। आपरेशन थियेटर में सर्जन चिकित्सक के अलावा एनेस्थीसिया स्पेशलिस्ट, स्टाफ नर्स व सिस्टर होनी चाहिए। इसी तरह प्रसव कक्ष में अलग स्टाफ की व्यवस्था होनी चाहिए। एक सप्ताह पहले तक यहां स्वीकृत स्टाफ के सापेक्ष छह चिकित्सक, दो स्टाफ नर्स, एक सिस्टर और तीन आया/ वार्ड ब्याय थे। बीते दिनों स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. रेखा रानी, डा. रजनी जसूरिया, डा. एन के निरंजन और डा. इटालिया का स्थानांतरण हो जाने के बाद चिकित्सालय की सभी व्यवस्थाएं डा. वर्मा एवं डा. अलका जैन के जिम्मे आ गई हैं। इसमें डा. अलका जैन की आयु 58 वर्ष होने के कारण वे ओपीडी का कार्य नहीं कर पा रही हैं। दो में से एक स्टाफ नर्स चंद दिनों बाद सेवानिवृत्त होने वाली हैं। रेडियोलॉजिस्ट, पैथालॉजिस्ट एवं एक्सरे टेक्नीशियन भी नहीं है, जबकि महिला चिकित्सालय के ओपीडी में शहरी व ग्रामीण इलाकों से रोजाना तीन से साढ़े तीन सौ महिलाएं उपचार के लिए आती हैं। इसके अलावा औसतन पैंतीस से चालीस प्रसव प्रतिदिन कराए जाते हैं। लेकिन, एनेस्थीसिया व अन्य चिकित्सकों की कमी के कारण सिजेरियन डिलेवरी नहीं हो पा रही है। मजबूरन, गर्भवती महिलाओं को चिकि त्सालय से लौटाया जा रहा है। संपन्न परिवारों की महिलाएं तो निजी नर्सिंग होम की सेवाएं लेने में सक्षम हैं, लेकिन गरीब वर्ग की गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव कराने के लिए कठिनाइयां उठानी पड़ रही हैं।
सीएमएस ने सीएमओ से मांगे डॉक्टर
ललितपुर। महिला चिकित्सालय मेें चिकित्सकों की कमी को दृष्टिगत रखते हुए चिकित्सा अधीक्षक ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं अपर निदेशक हेल्थ को पत्र लिखकर चार महिला चिकित्सकों की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महरौनी में पदस्थ डा. पूजा धूपिया, पीएचसी बार में तैनात डा. रजनी बजाज, पीएचसी बिरधा में पदस्थ डा. कल्पना राजपूत एवं पीएचसी जखौरा में कार्यरत डा. आशुतोष मेले जिला महिला चिकित्सालय में सेवाएं देने की इच्छुक हैं।

निरर्थक साबित हो रहे सुविधाओं के दावे
ललितपुर। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत मातृ एवं शिशु मृत्युदर में कमी लाने के लिए संस्थागत प्रसव कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत गर्भवती महिलाओं को घर से अस्पतालों तक आने - जाने के लिए वाहन, मुफ्त जांचें, खुराक, जननी सुरक्षा योजना के तहत चौदह सौ रुपये का चेक के अलावा अस्पतालों में सभी सेवाएं मुफ्त दिए जाने का प्रावधान किया गया है, लेकिन सुविधाओं के अभाव में महिला चिकित्सालय से गर्भवती महिलाओं को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। बताते चलें कि एनआरएचएम ने इस अस्पताल को फर्स्ट रेफरल यूनिट का दर्जा दे रखा है, जिसके तहत गर्भवती महिलाओं को सभी सुविधाएं दी जाती हैं।
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