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रुपये 5,459 खर्च, फिर भी शैक्षिक स्तर शून्य

Lalitpur Updated Mon, 30 Jul 2012 12:00 PM IST
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ललितपुर। परिषदीय शिक्षा के लिए दाम बड़े और दर्शन थोड़े कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है। सालाना प्रत्येक बच्चे पर औसतन 5,459 रुपये खर्च करने के बावजूद उनका शैक्षिक स्तर काफी कमजोर है, जबकि ग्रामीण इलाकों के प्राइवेट स्कूल में अधिकतम 200 रुपये महीना यानी 2,400 रुपये वार्षिक फीस अदा करने वाले नौनिहाल उनसे पढ़ाई में कोसों आगे हैं। इस फर्क की वजह जो भी हो, पर अफसरों को इन स्थितियों पर मंथन करना ही होगा।
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किसी भी देश, प्रदेश व जनपद के विकास में शिक्षा का अहम योगदान होता है। नौनिहालों व युवा पीढ़ी के शिक्षित होने से न केवल वे आर्थिक रूप से संपन्न होते हैं, बल्कि पूरा समाज आगे बढ़ता है। इस अहम जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहा परिषदीय शिक्षा विभाग हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी अधकचरों की फौज तैयार कर रहा है। खर्च के मामले में ग्रामीण प्राइवेट स्कूलों से आगे रहने के बाद भी परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले नौनिहाल, प्राइवेट स्कूलों के छात्र - छात्राओं से कोसों पीछे हैं। वित्तीय वर्ष 2011-12 के छात्रांकन को आधार मानकर वर्ष 2012-13 के लिए तैयार किया गया विभागीय बजट इसका गवाह है। बीते वर्ष के छात्रांकन पर नजर दौड़ाई जाए तो परिषदीय विद्यालयों में कक्षा एक में 37,978, कक्षा दो में 38,308, तीन में 37,153, चार में 35,180, पांच में 34,942, छह में 30,704, सात में 29,974 व कक्षा आठ में 25,757 बच्चों का छात्रांकन था। कुल 2,69,996 नौनिहाल जिले के 1,041 प्राथमिक और 493 जूनियर हाईस्कूलों में अध्ययनरत थे। इन बच्चों को आधार बनाकर वित्तीय वर्ष 2012-13 के विभागीय बजट में 01 अरब 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें शिक्षकों का वेतन, शिक्षा मित्रों का मानदेय, पाठ्य पुस्तक व ड्रेस की धनराशि आदि सम्मलित है। इसके अतिरिक्त मध्याह्न भोजन के खाद्यान्न व कनवर्जेंस पर सालाना 33,10,59,500 रुपये व्यय होता है। वहीं, 3,804 रसोइयों के मानदेय पर 1,000 रुपये मासिक के हिसाब से वार्षिक 4,56,48,000 रुपये खर्च हो जाता है। शिक्षा के बजट में इसे जोड़ दिया जाए तो नौनिहालों की शिक्षा पर कुल खर्च 1,47,67,07,500 आ जाएगा। यानी परिषदीय विद्यालयों के 2,69,996 छात्रों को शिक्षित करने के लिए विभाग 1,47,67,07,500 व्यय कर रहा है। इस लिहाज से सरकार एक छात्र के ऊपर सालाना 5,469 रुपये खर्च कर रही है। यह धनराशि ग्रामीण इलाकों के प्राइवेट स्कूलों की फीस से कहीं अधिक है, पर दुर्भाग्य यह है कि प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाले छात्र- छात्राएं परिषदीय विद्यालयों के नौनिहालों से कहीं ज्यादा शैक्षणिक व सामाजिक ज्ञान रखते हैं। इस कटु सच्चाई से सभी वाकिफ हैं, लेकिन इसको स्वीकारने और स्थितियों में सुधार करने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पा रहा है।

वेतन व मानदेय पर खर्च 79 करोड़
ललितपुर। जनपद के प्राथमिक व जूनियर हाईस्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को शिक्षित करने की जिम्मेदारी 2,425 शिक्षकों व 1,634 शिक्षा मित्रों के कंधों पर है। शिक्षा मित्रों को छोड़ दिया जाए तो शिक्षकों को काफी मोटी तनख्वाह मिलती हैं। कुल मिलाकर 79 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, लेकिन प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों की तरह परिषदीय विद्यालयों के मास्साब बच्चों को पढ़ाने में कितनी रुचि दिखाते हैं, यह किसी से छिपा नहीं है।

पास करने की अनिवार्यता बाधा
ललितपुर। परिषदीय स्कूलों में कक्षा एक से लेकर आठ तक पढ़ने वाले बच्चों को भले ही ककहरा नहीं आता हो, लेकिन उन्हें वार्षिक परीक्षा के दौरान अनुत्तीर्ण नहीं किया जा सकता है। शासन की इस व्यवस्था ने भी शैक्षिक स्तर को काफी नीचे गिराया है। कारण, बच्चों को फेल होने का भय नहीं रहता सो वे पढ़ने में मन नहीं लगाते। उधर, हर कक्षा में पास हो रहे बच्चे को देख अभिभावक भी संतुष्ट रहते हैं पर कक्षा नौ में पहुंचते ही कलई खुल जाती है। इन नियम ने बच्चों के शैक्षिक स्तर को परखने की व्यवस्था ही समाप्त सी कर दी।

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