डेंजर जोन में की हजारों आबादी!

Lalitpur Updated Thu, 26 Jul 2012 12:00 PM IST
ललितपुर। नगर के हजारों लोग खतरे के बीच जिंदगी जी रहे हैं। संकरे मार्गों में बने मकानों में यदि आग लग जाए तो वहां राहत कार्य संभव नहीं है। इन हालातों को लेकर प्रशासनिक अधिकारी खासे चिंतित हैं और रास्तों को चौड़ा करने का मार्ग तलाश रहे हैं।
वर्षों पहले विभिन्न विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण अनियोजित विकास धड़ल्ले से होता रहा। भूस्वामियों ने पांच से लेकर दस फिट के मार्ग निकालकर मनमाने ढंग से भूखंड बेचे, जिन पर लोगों ने अपने सपनों का महल बना लिया। इन हालातों में लगभग सभी प्रमुख मार्गों से अंदर की ओर गईं गलियां कुरूप हो गईं। यहां छोटे चार पहिया वाहन कार आदि ले जाने में भी चालकों को पसीना छूटने लगा। मार्ग पर सामने से चार पहिया वाहन आने की स्थिति में जाम लगना तय है।
संकरे मार्गों वाले मुहल्लों पर नजर डाली जाए तो गांधी नगर, नई बस्ती, चौबयाना, नदीपुरा, सुभाषपुरा, कटरा बाजार, महावीरपुरा, मऊठाना, बड़ापुरा, वंशीपुरा, कसाई मंडी सहित विभिन्न क्षेत्रों में चारपहिया वाहन पहुंच ही नहीं सकते। यदि प्रयास करके वाहन गली में ले भी जाया जाए तो उसे मोड़ना असंभव है। इन हालातों में आग लगने की घटना के दौरान इन इलाकों में दमकल के वाहन किसी भी सूरत में घटनास्थल तक नहीं पहुंच सकते हैं। कुछ क्षेत्र तो मुख्य मार्गों से इतने दूर बसे हैं जहां अग्निशमन विभाग के कर्मचारी पाइप से भी पानी नहीं पहुंचा सकते। इन हालातों में आर्थिक क्षति के साथ होने वाले जनजीवन के नुकसान की कल्पना करने में रूह कांप जाती है। देर से ही सही प्रशासनिक अधिकारी इस गंभीर समस्या को लेकर संजीदा हो गए हैं। जिलाधिकारी निधि केसरवानी ने वर्तमान में विकसित हो रही आबादी के मार्गों को न केवल चौड़ा रखने के निर्देश दिए हैं बल्कि संकरे मार्गों को चौड़ा करने पर गंभीरता से विचार कर रही हैं।

अग्निशमन विभाग के पास नहीं रणनीति
ललितपुर। संकरे मार्गों में आग लगने के दौरान त्वरित कार्रवाई के लिए अग्निशमन विभाग के पास भी कोई कार्ययोजना नहीं है। अभी तक विभागीय अधिकारियों ने उन इलाकों का सर्वे तक नहीं किया, जहां उनके वाहन प्रवेश नहीं कर सकते हैं। प्रभारी अग्निशमन अधिकारी रामदास वर्मा ने हालातों को चिंताजनक बताया पर संकरे मार्गों पर आग बुझाने के उपाय वे भी नहीं बता सके।

घरों के चबूतरे भी बाधा
ललितपुर। संकरे मार्गों के बावजूद घरों के बाहर चबूतरे बनाने की रवायत ने हालातों को और भी नाजुक बना दिया है। नाली के ऊपर से सड़क तक बनाए गए चबूतरों के कारण भी अक्सर आवागमन बाधित हो जाया करता है। संकरे रास्तों में बने चबूतरों को हटाने से समस्या का कुछ हद तक निदान हो सकता है।

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