नेतृत्व की कमी से जूझ रहे छात्र संगठन

Lalitpur Updated Tue, 24 Jul 2012 12:00 PM IST
ललितपुर। स्कूल, कालेजों में दाखिले की समस्या से जूझ रहे छात्रों को खुद अपनी लड़ाई लड़ना पड़ रही है। कारण, राजनीतिक दलों के छात्र संगठन प्रवेश समस्या के निदान को अभी तक आगे नहीं आए हैं। नेतृत्व के अभाव में छात्रों की आवाज बुलंद नहीं हो पा रही है। आलम तो यह है कि वर्तमान में जनपद में छात्र राजनीति में कोई मशहूर नाम भी नहीं है। ऐसे में छात्र संगठनों को नेतृत्व की कमी खल रही है।
एक समय था जब जिले की राजनीति में छात्रनेताओं का अच्छा खासा रुतबा था। छोटे से लेकर बड़े आंदोलन की अगुवाई छात्र नेताओं के द्वारा ही की जाती थी। छात्रों की मामूली समस्या पर भी घंटाघर के मैदान पर धरना प्रदर्शन हुआ करते थे। वर्तमान समय में जिले में माध्यमिक से लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश को लेकर मारामारी मची है। कक्षा नौ से लेकर 11, बीएससी, बीकाम, बीए में छात्रों को प्रवेश नहीं मिल पा रहा हैं। जीजीआईसी ललितपुर में कक्षा 11 के कला वर्ग में एक भी प्रवेश फार्म नहीं विक्रय किया। कारण, कालेज की छात्राओं से ही सारी सीटें फुल हो र्गईं। जिले के सभी कालेजों में दाखिले की समस्या दिनों दिन गहरा रही है। इसके अलावा नेहरू महाविद्यालय में सीटों की संख्या कम होने की वजह से करीब दो हजार छात्रों को बीए प्रथम वर्ष में प्रवेश के लाले पड़ गए हैं। राजकीय महाविद्यालय में भी बीकाम करने के इच्छुक छात्रों को डीएम का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। छात्रों की इन विकराल समस्याओं के बीच छात्र संगठनों की खामोशी बड़ा सवाल खड़ा करती है।
विद्यार्थी परिषद के जिला संयोजक गौरव गौतम का कहना है कि प्रवेश समस्या के संबंध में वे डीएम से चर्चा करेंगे। वहीं छात्र सभा के जिलाध्यक्ष राजीव यादव ने मुख्यमंत्री को खत लिखने की बात कही है। बयानों में भले ही छात्र नेताओं के पास हर सवाल का जवाब है, लेकिन धरातल पर छात्र संगठनों का काम नजर नहीं आ रहा है।

छात्रों में पैठ की कमी
छात्र संघ चुनाव विद्यार्थी संगठनों के लिए संजीवनी का काम करते रहे हैं। मायावती सरकार ने सत्तारूढ़ होते ही इन चुनावों पर रोक लग गई थी। इसके बाद छात्र संगठनों की गतिविधियां धीरे- धीरे सिमटने लगी। मुख्यमंत्री अखिलेश ने छात्र संगठनों में जान फूंकने के उद्देश्य से गद्दी पर बैठते ही चुनाव बहाली की घोषणा कर दी। लेकिन, छात्र संगठनों के पदाधिकारी अभी तक विद्यार्थियों में पैठ बनाने में सफल नहीं हो सके हैं। वर्तमान में संगठनों की गतिविधियां कार्यकारिणी विस्तार व बैठकों तक ही सीमित रह गई हैं।

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