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-संकट:सावन महीना में भी नदी, तालाब व जलाशय प्यासे

Jhansi Bureau Updated Thu, 09 Aug 2018 04:48 AM IST
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सावन में भी नदी व तालाब प्यासे
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- अनुमान से कम बारिश होने से बढ़ी किसानों की चिंता
- शहजाद नदी में अब तक तेज नहीं हुई पानी की धार
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। सावन के महीने में भी जिले के प्रमुख जलाशय सहित नदी, तालाबों की प्यास नहीं बुझ पाई है। पर्याप्त बारिश के अभाव में शहर से निकली शहजाद नदी में अब तक पानी का बहाव तेज नहीं हो पाया है। गोविंद सागर बांध के गेट खुलने पर इस नदी में पानी पहुंचता है। कमोवेश यही स्थिति छोटे तालाबों की है। जनपद के लगभग 91 तालाब अभी तक पानी से लबालब नहीं हो सके हैं। जिसे लेकर किसान के माथे पर सिलवटें पड़ गई हैं।
पिछले साल पड़े सूखे की वजह से जिले के अधिकांश जलाशयों, नदी, तालाब और नालों में न के बराबर ही पानी शेष रह गया। मौजूदा मानसून सीजन में इनके भरने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन अब तक हुई बारिश ने लोगों को मायूस किया है। जिले में 117 छोटे तालाब बने हैं। इनमें से 91 तालाबों में मछली पालन किया जाता है। इन सभी में मछली पालन योग्य पानी नहीं भर पाया है। तालाबों पांच फुट से कम पानी होने से मछली पालन बुरी तरह प्रभावित होता दिखाई दे रहा है। शहर के बीचोबीच बने सुम्मेरा तालाब में न के बराबर पानी भर पाया है। शहर के बीच से निकली शहजाद नदी की धार टूटी नजर आ रही है। इस नदी में अब तक पानी की धार गति नहीं पकड़ सकी है। इसका विपरीत असर इस नदी पर बने शहजाद बांध पर देखा जा रहा है। इसी तरह के हालात बेतवा नदी के हैं। इस नदी पर राजघाट व माताटीला बांध बने हैं। जब राजघाट बांध से पानी छोड़ा जाता है, तब जाकर माताटीला लबालब हो पाता है। वर्तमान में राजघाट बांध के गेट खुलने की नौबत नहीं आई है। कई अन्य बांधों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। ब्याना नाले में पानी के अभाव में जगह-जगह गंदगी देखी जा सकती है। महरौनी अंतर्गत ग्राम गुढ़ा में नाला सूखा पड़ा है। किसानों को पर्याप्त बारिश के अभाव में खरीफ फसल बचाना मुश्किल हो रहा है। तमाम गांवों में बोई गई उड़द, मूंग, सोयाबीन की फसलें मुरझाने लगी हैं। यदि बारिश का यही हाल बना रहा तो रबी सीजन में भी किसानों के लिए सिंचाई व मवेशियों के लिए पेयजल की समस्या उत्पन्न होना तय माना जा रहा है। शहर में दो दिनों से रुक-रुक कर बूंदा-बांदी हो रही है लेकिन बादल घुमड़-घुुमड़कर नहीं बरस रहे हैं। हर किसी को मूसलाधार बारिश होने का इंतजार है।

तालाबों में पांच की जगह तीन फुट ही है पानी
तालाबों में पांच फुट पानी मछली पालन के लिए उपयुक्त है, लेकिन इस समय तीन फुट ही पानी तालाबों में पहुंच सका है। ऐसे में तालाब का पानी गर्म हो जाता है जो मछली पालन के लिए उपयुक्त नहीं है। इसके चलते दो बांधों में ही बीज डाला जा सका है। माताटीला व जामनी बांध में ही मछली का बीज डाला गया है जबकि गोविंद सागर बांध में पानी बहुत कम है। इसमें पानी का भराव बढ़ने का इंतजार किया जा रहा है।

सावन का महीना बारिश का पीक समय होता है। इस समय जलाशय और तालाब लबालब हो जाना चाहिए। लेकिन वर्तमान के हालात उलट हैं। तालाबों में पानी कम होने से मछली का कम ही बीज डाला जा सका है। इससे लक्ष्य भी पिछड़ता दिख रहा है। यदि पानी कम में मछली का बीज डाल देंगे तो पानी गर्म होने की स्थिति में बीज नष्ट हो जाएगा।
बी लाल, सहायक निदेशक मत्स्य पालन

ये है बांधों की स्थिति
गोविंद सागर बांध में 4.81 मीटर, शहजाद बांध में 7.90 मीटर, जामनी बांध में 3.57 मीटर, सजनाम बांध में 5.62 मीटर, रोहणी बांध में 2.64 मीटर, राजघाट बांध में तीन मीटर व माताटीला बांध में पांच मीटर पानी पूर्ण क्षमता से भरने के मुकाबले कम है।

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