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सिलगन रेल अंडर ब्रिज निर्माण पर स्टे हटाया: संसोधित

Jhansi Bureau Updated Fri, 12 Oct 2018 02:17 AM IST
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सिलगन रेल अंडरब्रिज निर्माण पर स्टे हटाया
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निजी जमीन पर निर्माण करने पर भूमि स्वामी ने न्यायालय से लिया था स्टे
कोर्ट ने जनहित में हटाई अंडर ब्रिज पर डेढ़ वर्ष से लगी रोक
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। सिलगन रेलवे क्रॉसिंग पर बनाए जा रहे अंडरब्रिज के निर्माण पर करीब डेढ़ वर्ष पूर्व लगाई गई रोक अपर जिला और सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार शुक्ला की अदालत ने हटा दी है। हालांकि न्यायालय ने उक्त अंडरब्रिज भूमिधरी भूमि से निकलते पाए जाने पर पीड़ित को मामला निस्तारित होने के बाद नियमानुसार मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।
झांसी के सिविल लाइन स्थित कुंभ बिहार कॉलोनी निवासी मिथलेश सिंघल पत्नी स्वामी सिंघल की ओर से सिविल लाइन ललितपुर निवासी राजेंद्र अग्रवाल ने डेढ़ वर्ष पूर्व सिविल जज सीनियर डिवीजन की न्यायालय में एक प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि सिलगन रेलवे क्रासिंग के पास आराजी संख्या 2238/2 में 0.809 हेक्टेयर क्षेत्रफल जमीन और 2238/4 में 1.092 हेक्टेयर जमीन उसके नाम पर है। इस जमीन पर किसी भी व्यक्ति या संस्था का स्वामित्व नहीं है। प्रार्थनापत्र में बताया कि कि 23 जनवरी 2017 को दोपहर बारह बजे वह अपनी भूमि में खड़ी फसल देखने गया तो रेलवे के अधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मचारी व मजदूरों के साथ मशीनों से उसकी जमीन पर खुदाई करवा रहे थे। जबकि रेलवे द्वारा उससे उपरोक्त खुदाई या अंडरग्राउंड ब्रिज में उसकी भूमि अधिग्रहण की न सूचना दी गई, न ही उसकी परमीशन ली गई और न ही उससे कोई संपर्क किया गया। बल्कि अवैधानिक तरीके से उसकी कीमती जमीन की खुदाई करके भारी नुकसान पहुंचाया है। उसके द्वारा रोकने पर उक्त रेलवे के कर्मचारी व अधिकारी नहीं माने और अनाधिकृत तरीके से अंडरग्राउंड ब्रिज का निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया। परगना मजिस्ट्रेट के यहां पीड़ित ने जब रेलवे अधिकारियों के खिलाफ प्रार्थना पत्र दिया, जिस पर कोतवाली प्रभारी व तहसीलदार को आख्या देने व शांति बनाए रखने का आदेश दिया गया। लेकिन रेलवे विभाग ने उसकी जमीन पर अंडर ग्राउंड ब्रिज का निर्माणकार्य जारी रखा। इससे सड़क से उसकी जमीन तक अंदर जाने वाली सड़क बंद हो गई। पीड़ित के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए सिविल जज सीनियर डिवीजन की न्यायालय ने 22 अप्रैल 2017 को उक्त अंडरब्रिज निर्माण करने वाली रेलवे को निर्माण न करने और गड्ढे की खुदाई एवं वादी की भूमि के आवागमन के मार्ग को अवरुद्ध नहीं करने के आदेश जारी किए। तब से सिलगन रेलवे क्रॉसिंग के पास बनाए जा रहे अंडरग्राउंड रेल ब्रिज का निर्माण कार्य अटका हुआ है। उक्त स्टे आर्डर के खिलाफ रेलवे ने अपर न्यायालय में अपील दायर की थी, जिस पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र अधिनियम) ने सुनवाई करते हुए बुधवार को सिविल जज सीनियर डिवीजन के 22 अप्रैल 2017 के आदेश को निरस्त कर दिया। आदेश में बताया गया कि रेलवे विभाग जनहित में अपने अंडर पास निर्माण को पूर्ण करे और न्यायालय द्वारा गुणदोष के आधार पर न्याय निर्णयन होने पर यदि कोई वाइ पास वादी की भूमिधरी भूमि से निकला पाया जाता है तो उसे नियमानुसार मुआवजा प्रदान किया जाए। न्यायालय के उक्त आदेश से रेलवे को जहां राहत मिली है वहीं सिलगन क्रॉसिंग पर डेढ़ वर्ष से रुका हुआ अंडरब्रिज का निर्माण कार्य भी शीघ्र पूर्ण होने की उम्मीद जगी है। इसके निर्माण से शहरवासियों के साथ ही मध्य प्रदेश व अन्य प्रदेशों में जाने वाले राहगीरों को रेलवे गेट बंद होने के दौरान आवागमन के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।

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