सावधानी:सर्दी में नवजात का निमोनिया से करें बचाव

Updated Mon, 12 Nov 2018 01:46 AM IST
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सर्दी में नवजात का निमोनिया से करें बचाव
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पांच साल तक के बच्चों को रहता है सर्वाधिक खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। सर्दियों का मौसम शुरू होने के साथ ही निमोनिया जैसी बीमारियों का आना भी शुरू हो जाता है। निमोनिया एक गंभीर बीमारी है जो हर उम्र के व्यक्तियों को हो सकती है। लेकिन यह सबसे ज्यादा पांच साल तक के बच्चों में पाई जाती है। कई बार निमोनिया बच्चों की मृत्यु का कारण भी बन जाता है।
निमोनिया के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 12 नंबर को विश्व निमोनिया दिवस मनाया जाता है। इसके पीछे मकसद इस बीमारी से बच्चों की होने वाली मृत्यु से बचाना है। विश्व में निमोनिया पांच साल से कम उम्र के बच्चों में होने वाली मृत्यु का प्रमुख कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट वर्ष 2015 के अनुसार भारत में 926130 बच्चों की मृत्यु सिर्फ निमोनिया की वजह से हुई है जो कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों कि मृत्यु का 16 प्रतिशत है। निमोनिया फेफड़ों में होने वाला संक्रमण है जो बैक्टीरिया, वायरस एवं फंगस आदि के कारण होता है। इसकी पहचान है फेफड़ों की वायु कोष्ठिका में सूजन हो जाती है या उसमें तरल पदार्थ भर जाता है। कई बार निमोनिया गंभीर रूप धारण कर लेता है। इसी परिस्थिति में व्यक्ति की हालत बहुत खराब हो जाती है और जान भी जा सकती है। निमोनिया के लक्षण सर्दी जुकाम के लक्षणों से बहुत हद तक मिलते हैं। इसलिए जब भी ऐसा लगे तो पहले इसके लक्षणों को पहचान लेना बहुत जरूरी है। नवजात शिशुओं के कोई विशेष लक्षण दिखाई नहीं देते लेकिन यदि नवजात शिशु देखने में बीमार लगे, वह दूध न पिये, रोये या बुखार हो तो उन्हें निमोनिया हो सकता है। इसके लिए तुरंत डॉक्टर से इलाज करवाना अत्यंत आवश्यक है।


ये हैं प्रमुख लक्षण
सांस तेज लेना, कफ की आवाज आना आदि भी निमोनिया का संकेत हो सकते हैं। निमोनिया के आम लक्षणों में खांसी, सीने में दर्द, बुखार और सांस लेने में मुश्किल आदि होते हैं। उल्टी होना, पेट या सीने के निचले हिस्से में दर्द होना, कंपकंपी, शरीर में दर्द, मांसपेशियों में दर्द भी निमोनिया के लक्षण हैं। पांच साल से कम उम्र के ज्यादातर बच्चों में निमोनिया होने पर उन्हें सांस लेने तथा दूध पीने में भी दिक्कत होती है और वह सुस्त हो जाता है। बच्चे को मां का पहला गाढ़ा दूध जिसे कोलेस्टरम कहते है उसे अवश्य पिलाना चाहिए।

जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसते व छीकते हैं तो इसका वायरस व बैक्टीरिया सांस द्वारा फेफड़ों तक पहुंच कर व्यक्ति को संक्रमित कर देता है। निमोनिया का अटैक बच्चों पर ज्यादा होता है। खासतोर पर पांच साल से कम उम्र के ज्यादातर बच्चों में निमोनिया होने पर उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है। दूध पीने में भी दिक्कत होती है। इस बीमारी से बचाव के लिए छोटे बच्चों को संक्रमित व्यक्ति से दूर रखना चाहिए।
डॉ. राज नारायण, बाल रोग विशेषज्ञ

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